जेवर चोरी का शक या पढ़ाई का प्रेशर, क्‍या बाप की सख्‍ती ने बेटे को बना दिया कातिल? लखनऊ नीले ड्रम कांड का खौफनाक सच

लखनऊ के आशियाना इलाके में 23 फरवरी की सुबह एक ऐसी घटना सामने आई, जिसने हर किसी को सन्न कर दिया. पिता की गुमशुदगी की रिपोर्ट लिखवाने वाला बेटा ही उसका कातिल निकला, जिसने शव के टुकड़े कर ‘ब्लू ड्रम’ में छिपा दिया. आखिर एक बेटे ने अपने ही पिता के साथ ऐसा खौफनाक कदम क्यों उठाया, अब यही सवाल पूरे शहर को बेचैन कर रहा है.

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Edited By :  समी सिद्दीकी
Updated On : 24 Feb 2026 3:52 PM IST

Lucknow Murder: तारीख 23 फरवरी और दिन था सोमवार. अचानक लखनऊ का आशियाना इलाका पुलिस के सायरन से गूंज उठा. पुलिस के साथ था वर्धमान पैथोलॉजी लैब के मालिक मनवेंद्र प्रताप सिंह का बेटा अक्षत, जिस पर आरोप था कि उसने अपने पिता की हत्या की और उनकी लाश को ड्रम में भर दिया. इसके बाद से ही 'ब्लू ड्रम' शब्द एक बार फिर सनसनी बन गया है.

49 वर्षीय मनवेंद्र प्रताप सिंह, जो वर्धमान पैथोलॉजी लैब के मालिक थे, 20 फरवरी से लापता थे. उनकी गुमशुदगी की रिपोर्ट खुद उनके 21 साल के बेटे अक्षत सिंह ने दर्ज कराई थी. लेकिन जांच आगे बढ़ी तो यही शिकायत एक खौफनाक सच में बदल गई. जांच में सामने आया कि बेटे ने ही पिता की हत्या कर उनकी लाश के टुकड़ों में काटकर नीले ड्रम में छिपा दिया था.

हत्या करने वाला बेटा अक्षत बीकॉम का छात्र है और उसे हमेशा से एक बड़ा बिजनेसमैन बनना था. इसके लिए वह हर कीमत चुकाने के लिए तैयार था. इसी बात को लेकर उसके पिता से अक्सर उसकी बहस होती थी. पिता उसे डॉक्टर बनने के लिए कहते थे, लेकिन बेटा चाहता था कि वह बिजनेस करे. इसी बात को लेकर दोनों के बीच अक्सर लड़ाई होती थी। हद तो यहां तक हो गई थी कि एक बार अक्षत घर तक छोड़कर भाग गया था. कुछ दिनों बाद उसे रेलवे स्टेशन से पकड़ा गया और समझा-बुझाकर घर लाया गया.

मनवेंद्र प्रताप सिंह अपने बेटे को हर महीने 17 हजार रुपये दिया करते थे, लेकिन उन्हें अंदाजा नहीं था कि जिस बेटे को वह लाइन पर लाने के लिए यह सब कुछ कर रहे हैं, वह एक दिन उन्हें खुद डस लेगा.

अक्षत का बाग़ीपन या फिर कुछ और?

पुलिस को बताया था कि 20 फरवरी की सुबह करीब 6 बजे उसके पिता दिल्ली जाने की बात कहकर घर से निकले थे और 21 फरवरी दोपहर तक लौटने वाले थे. अक्षत ने दावा किया कि उसके बाद उनके तीनों मोबाइल फोन बंद हो गए. मामला आशियाना थाना क्षेत्र के सेक्टर-एल स्थित मकान नंबर 91 का है. पुलिस ने जब मोबाइल लोकेशन खंगाली तो आखिरी लोकेशन काकोरी में मिली, जहां मनवेंद्र की पैथोलॉजी लैब है। वहां तलाशी में कुछ खास नहीं मिला, लेकिन अक्षत के बयानों में विरोधाभास सामने आने लगे.

क्या अक्षत पहले से कर रहा था मर्डर की प्लानिंग?

पूछताछ के दौरान उसने कई बार बयान बदले. पहले आत्महत्या की बात कही, फिर हत्या की बात कबूल कर ली. डीसीपी (सेंट्रल) विक्रांत वीर के मुताबिक, 20 फरवरी की सुबह करीब 4:30 बजे पिता-पुत्र के बीच तीखी बहस हुई. गुस्से में अक्षत ने लाइसेंसी राइफल उठाई और पिता को गोली मार दी. मौके पर ही उनकी मौत हो गई. इस घटना को अंजाम देने के बाद बेटे के हाथ-पैर हरगिज नहीं कांपे, मानो वह पहले से ही इस पल का इंतजार कर रहा था. घर पर आरी लाना, एसिड का मिलना इस बात का सीधे तौर पर संकेत देता है कि वह पिता की हत्या की प्लानिंग पहले से कर रहा था.

पिता को गोली मारने के बाद अक्षत कथित प्लान के मुताबिक तीसरी मंजिल से शव को नीचे लाया. एक खाली कमरे में लाश के टुकड़े किए गए. कुछ हिस्सों को कार में रखकर सदरौना इलाके में फेंक दिया गया, जबकि धड़ को नीले ड्रम में भरकर घर के बेसमेंट में ही छिपा दिया. जिस वक्त अक्षत अपने पिता के शरीर के आरी और चाकू से टुकड़े कर रहा था, उसी वक्त उसकी बहन ने उसे देख लिया. लेकिन अक्षत के सिर पर खून सवार था. उसने अपनी बहन को भी जान से मारने की धमकी दी और उसे चुप करा दिया.

अक्षत ने अपने पिता के टुकड़े करने के बाद सारे सबूत मिटाए. कार में लगे खून के धब्बे भी मिटाने की कोशिश की. इस दौरान उसकी बुआ ने उसे देख लिया और सवाल पूछा कि वह गाड़ी क्यों धो रहा है. जिस पर अक्षत ने कहा कि उसकी कार गंदी हो गई थी. लेकिन अपराधी जितना अपराध को छिपाने की कोशिश करे, कहीं न कहीं तो सबूत पीछे रह ही जाता है. पुलिस ने जब गाड़ी की तलाशी ली तो उसमें खून के धब्बे मिले, जिनकी फॉरेंसिक जांच कराई जा रही है.

उधर, अक्षत की शिकायत के बाद पुलिस का शक धीरे-धीरे बढ़ रहा था और पुलिस पूरी तरह से मान चुकी थी कि मनवेंद्र के गायब होने के पीछे बेटे का ही हाथ है. आखिरकार वही हुआ. पुलिस ने जब सख्ती से पूछताछ की तो अक्षत ने सारे राज खोल दिए. सोमवार शाम पुलिस अक्षत को घर लेकर गई, जहां ड्रम से मनवेंद्र का धड़ बरामद हुआ. लेकिन अभी तक पिता का सिर नहीं मिल पाया है.

आखिर लखनऊ के अक्षत ने पिता की हत्या क्यों की?

हत्या की पुख्ता वजह अभी सामने नहीं आ पाई है, लेकिन जांच में एक नया एंगल सामने आया है. करीब चार महीने पहले घर से ज़ेवर गायब हुए थे. मनवेंद्र ने पहले घरेलू कामगार पर शक जताते हुए शिकायत दर्ज कराई थी, लेकिन बाद में उन्हें पता चला कि जेवर बेटे ने लिए थे. उन्होंने कानूनी कार्रवाई से बचाने के लिए शिकायत वापस ले ली, लेकिन इसके बाद वे अक्षत की गतिविधियों पर नजर रखने लगे थे. एक पुलिस अधिकारी के मुताबिक, "जेवर चोरी और उसके बाद निगरानी ने दोनों के रिश्ते को बुरी तरह प्रभावित किया था. यही एंगल अब जांच का अहम हिस्सा है."

परिवार के मुताबिक, अक्षत का बिल्कुल भी पढ़ाई में मन नहीं लगता था और वह दो बार नीट परीक्षा में असफल रहा था. उस पर पिता लगातार पढ़ाई के लिए दबाव बनाते रहते थे. उसने 12वीं की पढ़ाई ला मार्टिनियर कॉलेज से की थी. शुरुआती जांच में पढ़ाई का दबाव कारण माना गया, लेकिन अब पुलिस का मानना है कि चोरी और पिता की सख्ती ने रिश्ते को ज्यादा तनावपूर्ण बना दिया था.

बता दें, मनवेंद्र सिंह मूल रूप से जालौन जिले के थे। पैथोलॉजी लैब के अलावा वे शराब के कारोबार से भी जुड़े थे. उनकी पत्नी का नौ साल पहले निधन हो चुका था. परिवार में बेटा अक्षत और बेटी कृति हैं. मनवेंद्र के पिता सुरेंद्र पाल सिंह उत्तर प्रदेश पुलिस से रिटायर्ड हैं. उनके छोटे भाई एसएस रजावत उत्तर प्रदेश सचिवालय में तैनात हैं.

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