कलियुग का कालनेमि कौन? गंगा स्‍नान को लेकर 6 दिन से संतों में घमासान जारी, मैदान में औरंगजेब की‍ भी एंट्री- पढ़ें Top Updates

प्रयागराज माघ मेले में गंगा स्नान को लेकर शुरू हुआ विवाद अब छह दिन से लगातार गहराता जा रहा है. शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और मेला प्रशासन के बीच तनातनी ने धार्मिक, राजनीतिक और वैचारिक रंग ले लिया है. इस विवाद में ‘कलियुग का कालनेमि’ जैसे शब्दों ने बहस को और भड़का दिया है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, अखिलेश यादव, मायावती, संत समाज और हिंदू संगठनों के बयान सामने आ चुके हैं. अब औरंगजेब तक की तुलना ने माहौल को और गर्म कर दिया है.;

kaliyug ka kalnemi 

By :  सागर द्विवेदी
Updated On : 24 Jan 2026 3:35 PM IST

प्रयागराज माघ मेले में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और मेला प्रशासन के बीच शुरू हुआ विवाद अब धार्मिक दायरे से निकलकर पूरी तरह राजनीतिक और वैचारिक टकराव का रूप ले चुका है. मौनी अमावस्या के स्नान को लेकर शुरू हुई तनातनी में अब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, सपा प्रमुख अखिलेश यादव, बसपा प्रमुख मायावती, संत समाज, मंत्री और हिंदू संगठनों तक के बयान सामने आ चुके हैं.

इस विवाद ने न सिर्फ प्रशासनिक कार्यशैली पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि सनातन धर्म, राजनीति, संत परंपरा और सत्ता के रिश्तों पर भी बहस तेज कर दी है तो वहीं यूपी में कलयुगी कालनेमि कौन? इस सवाल पर बवाल भी मचा हुआ है, आइए, पूरे मामले को सिलसिलेवार समझते हैं कि अब तक क्या-क्या हुआ.

शंकराचार्य को लेकर क्या है विवाद?

18 जनवरी को मौनी अमावस्या के दिन शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती पालकी में संगम स्नान के लिए जा रहे थे. आरोप है कि मेला पुलिस ने उनकी पालकी रोक दी और पैदल जाने को कहा. इस दौरान शिष्यों और श्रद्धालुओं के साथ धक्का-मुक्की हुई, जिससे नाराज होकर शंकराचार्य शिविर के बाहर धरने पर बैठ गए.

'भक्तों को जूतों से मारा गया'

जयपुर के संत स्वामी देवकीनंदन पुरोहित परम ने दावा किया कि आईपीएस अधिकारियों ने सुनियोजित तरीके से संतों और भक्तों के साथ बदसलूकी की. उन्होंने कहा कि करीब 30 भक्तों को हिरासत में लेकर तीन घंटे थाने में रखा गया, जहां उनके साथ मारपीट हुई. उनका आरोप है कि 'बड़े अफसरों ने कुछ भक्तों को पैरों के जूतों से ठोकर मारी. नीचे के पुलिसकर्मी भी यह सब देखकर हैरान थे.'

क्या शंकराचार्य के जान को खतरा है?

विवाद बढ़ने के बीच शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने अपने शिविर के अंदर और बाहर 12 CCTV कैमरे लगवाए हैं. उनके विशेष प्रतिनिधि देवेंद्र पांडे ने कहा कि 'यह हमारी मजबूरी है, क्योंकि शंकराचार्य सड़क पर बैठे हैं. प्रशासन और उसके गुंडे हैं. संत के वेश में शैतान घूम रहे हैं. शंकराचार्य की जान को खतरा है.' उन्होंने यह भी बताया कि शंकराचार्य की तबीयत खराब चल रही है और उन्हें तेज बुखार भी रहा.

‘कालनेमि’ वाले बयान पर बवाल!

इस पूरे विवाद के बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बिना नाम लिए तीखा बयान दिया. उन्होंने कहा कि आज धर्म की आड़ में कुछ लोग सनातन को कमजोर करने की कोशिश कर रहे हैं. ये लोग बाहर से साधु दिखते हैं, लेकिन भीतर से कालनेमि हैं.' सीएम योगी के इस बयान को सीधे तौर पर शंकराचार्य विवाद से जोड़कर देखा गया, जिसके बाद ‘कालनेमि’ शब्द पर नई बहस शुरू हो गई. इसी के साथ सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने सीएम योगी पलटवार करने हुए सवाल किया लड़ते रहना चाहिए कालनेमि को याद करने वाले बताएंगे कलयुग के कालनेमी कौन? कालनेगी ही काल बनकर आएगा.

कालनेमि कौन था? 

कालनेमि हिंदू पौराणिक कथाओं का एक प्रसिद्ध असुर था, जिसका उल्लेख रामायण में मिलता है. वह रावण का सहयोगी और मायावी असुर माना जाता था. जब हनुमान संजीवनी बूटी लाने हिमालय जा रहे थे, तब रावण ने कालनेमि को उन्हें रोकने भेजा. कालनेमि ने साधु का वेश धारण कर हनुमान को भ्रमित करने की कोशिश की और उन्हें एक झील में स्नान के लिए उकसाया. लेकिन हनुमान ने उसकी चाल पहचान ली और उसका वध कर दिया. कालनेमि को छल, पाखंड और नकली साधुत्व का प्रतीक माना जाता है.

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योगी के कालनेमि वाले बयान पर क्या बोले अविमुक्तेश्वरानंद?

कालनेमि राक्षस था और साधु के वेष में आया था. राक्षस क्या करता है? ब्राह्मणों को मार दे, साधुओं को मार दे, गायों को मार दे. वह मारता खाता है और चोला साधु का पहनता है. अब यहां देखिए, चोला तो साधु का है और गौहत्या हो रही है. अब बताओ कौन है कालनेमि?'

शंकराचार्य का पलटवार और केशव मौर्य की तारीफ

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने यूपी के डिप्टी सीएम केशव मौर्य को “समझदार नेता” बताया और कहा कि “ऐसा व्यक्ति मुख्यमंत्री होना चाहिए, जो समझे कि अफसरों से गलती हुई है. जो अकड़ में बैठा हो, उसे मुख्यमंत्री नहीं होना चाहिए.”

मेला प्रशासन के नोटिस और चेतावनी

मेला प्रशासन ने शंकराचार्य को 48 घंटे में दो नोटिस जारी किए.

  • पहला नोटिस: खुद को ज्योतिर्मठ का शंकराचार्य बताने पर
  • दूसरा नोटिस: मौनी अमावस्या विवाद पर स्पष्टीकरण के लिए

प्रशासन ने यह भी चेतावनी दी कि क्यों न उन्हें माघ मेले से हमेशा के लिए बैन कर दिया जाए.

शंकराचार्य को लेकर मायावती ने क्या कहां?

बसपा प्रमुख मायावती ने इस विवाद पर पहली बार बयान देते हुए कहा कि संकीर्ण राजनीतिक स्वार्थ के लिए धर्म और राजनीति को जोड़ना हमेशा खतरनाक होता है. प्रयागराज का विवाद इसका ताजा उदाहरण है.” उन्होंने कहा कि धार्मिक आयोजनों में बढ़ता राजनीतिक हस्तक्षेप नए विवादों को जन्म दे रहा है और इससे हर हाल में बचना चाहिए. अयोध्या के हनुमानगढ़ी मंदिर के महंत राजू दास ने शंकराचार्य पर निशाना साधते हुए कहा कि अगर शंकराचार्य होते तो सीएम योगी की तुलना औरंगजेब से करते? भगवे चोले में कालनेमि का रूप हैं.” वहीं श्रृंगबेरपुर पीठाधीश्वर आचार्य रामानुजाचार्य शांडिल्य ने प्रशासन से माफी मांगने की मांग की.

मंत्री नंदी और हिंदू संगठनों के बयान

यूपी सरकार के मंत्री नंद गोपाल गुप्ता ‘नंदी’ के बयान पर शंकराचार्य ने पलटवार करते हुए कहा कि 'जैसी सरकार, वैसे मंत्री. कंस के मंत्री कंस से ज्यादा क्रूर थे.' वहीं राष्ट्रीय हिंदू दल ने अखाड़ा परिषद को पत्र लिखकर शंकराचार्य पर तीखी टिप्पणी की और मेला प्रशासन को भी ज्ञापन सौंपा. शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद बीते छह दिनों से माघ मेला क्षेत्र में धरने पर बैठे हैं. विवाद थमने के बजाय और गहराता जा रहा है, जिसमें अब धर्म, सत्ता, संत और राजनीति चारों आमने-सामने खड़े नजर आ रहे हैं.

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