कंबल छीना, भाईचारा नहीं- राजस्थान में मुस्लिम महिलाओं के लिए ढाल बने हिंदू पड़ोसी; BJP नेता ने किया था भेदभाव

राजस्थान के टोंक जिले के एक गांव में कंबल वितरण कार्यक्रम के दौरान कथित भेदभाव का मामला सामने आया है. आरोप है कि धर्म पता चलने पर मुस्लिम महिलाओं से कंबल वापस ले लिए गए, जिससे गांव में आक्रोश फैल गया है. हालांकि, इस घटना के बाद हिंदू पड़ोसी मुस्लिम महिलाओं के समर्थन में खुलकर सामने आए और भाईचारे की मिसाल पेश की है.

( Image Source:  X- @Alsheikh2298 )
Edited By :  समी सिद्दीकी
Updated On : 26 Feb 2026 10:44 AM IST

Rajasthan Blanket Incident: राजस्थान के टोंक जिले के करेडा बुजुर्ग गांव में कंबल वितरण कार्यक्रम के दौरान हुई एक घटना ने पूरे इलाके में आक्रोश पैदा कर दिया है. पूर्व टोंक-सवा माधोपुर सांसद और भाजपा नेता सुखबीर सिंह जौनपुरिया पर आरोप है कि उन्होंने कुछ मुस्लिम महिलाओं को कंबल देने के बाद उनका धर्म पता चलने पर कंबल वापस ले लिया. इस घटना के बाद गांव के हिंदू पड़ोसी भी मुस्लिम महिलाओं के समर्थन में खड़े हो गए हैं.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, करीब 60 साल की शकूरन बानो का कहना है कि कंबल नहीं भी मिलता तो कोई दिक्कत नहीं थी हमें. बस बात ये थी बेइज्जती की. शाकुरन अकेली नहीं हैं, उनके हिंदू पड़ोसी भी इस व्यवहार से नाराज हैं. जौनपुरिया ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 28 फरवरी को अजमेर दौरे से पहले जनसंपर्क अभियान के तहत यह कार्यक्रम आयोजित किया था.

गांव वालों ने क्या कहा?

गांव की सरपंच बीना देवी चौधरी के पति हनुमान चौधरी का कहना है कि गांव में 'भारी आक्रोश' है. वे कहते हैं,"मुसलमानों से ज्यादा हिंदू नाराज हैं. हमने अगले दिन जौनपुरिया का पुतला जलाया." शकूरन बताती हैं, "जैसे ही कंबल वापस लिए गए, मैं वहीं से उठ गई. आयोजकों ने हमें अलग बैठने को कहा था. उन्होंने कहा कि जो मोदी को गाली देते हैं, उन्हें हक नहीं है. बहुत बुरा लगा. कोई जरूरी था कि कंबल ही दिलवाना है?"

शकूरन कहती हैं कि उन्हें एक स्थानीय महिला ने बैठक में आने के लिए बुलाया था. उनके साथ चार अन्य मुस्लिम महिलाएं भी आई थीं. वे रोजे से थीं. हमें नहीं पता था कि कंबल बांटे जाएंगे. हम वहां पहुंचने के बाद कंबल आए.

शकूरन के बेटों ने क्या कहा?

शाकुरन के पति निजाम का करीब छह साल पहले निधन हो चुका है. उनके दो बेटे हैं- करीब 50 साल के इस्लाम, जो चाकसू में रहते हैं, और करीब 47 साल के हनीफ, जो अपने परिवार के साथ करेडा बुजुर्ग में दो कमरों के किराए के मकान में रहते हैं. वे हर महीने 1000 रुपये किराया देते हैं. हनीफ, जो अपने पिता की तरह लोहार हैं, कहते हैं, इज्जत तो खराब हो गई. उन्हें हमें बेइज्जत नहीं करना चाहिए था. हालांकि वे यह भी कहते हैं कि गांव ने उनका साथ दिया है और आपसी भाईचारा मजबूत है.

क्या जौनपुरिया पर पड़ा कोई असर?

इस हादसे के पेश आने के बाद से जौनपुरिया की काफी फज़हीत हो रही है. एक वीडियो में जौनपुरिया को कुछ लोग टोकते सुनाई देते हैं. एक व्यक्ति कहता है,"आप कंबल वापस ले रहे हैं, लोकतंत्र में सब बराबर हैं." इस पर जौनपुरिया कहते हैं, 'क्या कंबल सरकार के हैं?" जवाब में व्यक्ति कहता है, "आपने गलती की है."

गांव के हिंदू परिवारों का क्या है रुख?

शकूरन कहती हैं कि गांव के हिंदू युवक आगे आए और जौनपुरिया से कहा कि हम यहां भाई-बहन की तरह रहते हैं. वहां मौजूद दो-तीन पुलिसकर्मियों ने भी कहा कि महिलाओं को हटाना ठीक नहीं था. वे बताती हैं कि हिंदू पड़ोसी कह रहे हैं कि चाची के साथ ऐसा किया गया, यह गलत हुआ.

गांव में मुसलमानों की कितनी आबादी है?

हनुमान चौधरी का कहना है कि गांव में मुसलमान अल्पसंख्यक हैं, करीब 3 फीसद आबादी, लेकिन हमेशा सद्भाव से रहते आए हैं. दीवाली, होली या ईद हो, हम साथ मनाते हैं. कोई भेदभाव नहीं है. जौनपुरिया ने यहां भाईचारा बिगाड़ने की कोशिश की है. उनका कहना है कि अन्य छोटे समुदाय भी चिंतित हैं कि आज मुसलमानों के साथ हुआ है, कल उनके साथ भी हो सकता है.

जौनपुरिया का क्या कहना है?

दूसरी ओर, जौनपुरिया ने कहा कि कंबल वितरण उनका निजी कार्यक्रम था. मैं ऐसे कार्यक्रम करता रहता हूं. हमने करीब 200 महिला कार्यकर्ताओं की लिस्ट बनाई थी, इन्हें नहीं बुलाया था. उनका दावा है कि महिलाएं कंबल बंटने की खबर सुनकर आ गईं. उनके सिर ढके थे, इसलिए पहले वे उन्हें पार्टी कार्यकर्ता समझ बैठे. बाद में उन्हें संदेह हुआ और उन्होंने नाम पूछे. स्थानीय नेता से पता चला कि वे मुस्लिम हैं. तब उन्होंने कहा, "ये तो गलत बुला ली हैं, ऐसा उचित नहीं है."

जौनपुरिया 2005 से 2009 तक हरियाणा के सोहना से विधायक रहे हैं और 2014 व 2019 में टोंक-सवाई माधोपुर से लोकसभा सदस्य चुने गए थे, हालांकि 2024 में वे चुनाव हार गए. 2020 में वे उस समय चर्चा में आए थे, जब उन्होंने मिट्टी स्नान और शंख बजाने का वीडियो साझा किया था और दावा किया था कि इससे कोविड-19 से बचाव होगा. बाद में वे खुद कोरोना संक्रमित पाए गए थे.

घटना के बाद अब शकूरन को दो कंबल मिले हैं, एक टोंक के एक नेता से और दूसरा राजस्थान कांग्रेस के अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ से। सर्दी लगभग खत्म हो चुकी है, इसलिए उन्होंने कंबल फिलहाल संभाल कर रख दिए हैं.

Similar News