अब प्रशासन तय करेगा कौन बेचेगा जमीन? क्या है राजस्थान Disturbed Ara Bill, जिसका उल्लंघन करने पर होगी 5 साल तक की जेल

राजस्थान विधानसभा में ‘डिस्टर्ब एरिया बिल, 2026’ पेश किया गया बै, जिसके तहत दंगा प्रभावित या सांप्रदायिक रूप से संवेदनशील इलाकों में संपत्ति के लेन-देन पर रोक लगाई जा सकेगी. बिल के मुताबिक, ऐसे इलाकों में ज़मीन खरीदने-बेचने के लिए जिला कलेक्टर या एडीएम से पहले इजाजत लेना जरूरी होगी.

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Edited By :  समी सिद्दीकी
Updated On : 26 Feb 2026 8:22 AM IST

Rajasthan Disturbed Area Bill: राजस्थान विधानसभा में बुधवार को 'राजस्थान डिस्टर्ब एरिया में अचल संपत्ति के ट्रांसफर पर रोक और किरायेदारों को बेदखली से संरक्षण बिल, 2026 पेश किया गया. मौजूदा सेशन में बहस पूरी होने के बाद इस बिल को विस्तार से चर्चा और पारित करने के लिए लाया जाएगा.

माना जा रहा है इस बिल पर संसद में भारी हंगामा होने की उम्मीद है. प्रस्तावित कानून राज्य सरकार को यह अधिकार देता है कि वह दंगा प्रभावित या सांप्रदायिक रूप से संवेदनशील इलाकों को औपचारिक रूप से 'अशांत क्षेत्र' घोषित कर सके और वहां प्रोपर्टी के लेन देन को कंट्रोल कर सके.

क्या कहता है डिस्टर्ब एरिया बिल?

  • बिल के मुताबिक, अगर किसी एरिया को सरकार डिस्टर्ब एरिया घोषित करती है तो ऐसे में अचल संपत्ति का ट्रांसफऱ, खरीद, बिक्री या रजिस्ट्रेशन संबंधित जिले के जिला कलेक्टर या अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट (एडीएम) की पूर्व लिखित अनुमति के बिना नहीं किया जा सकेगा. सीधे तौर पर आप अपनी जमीन बेचना चाहते हैं, यह तय पूरी तरह से प्रशासन करेगा.
  • बिल में यह भी प्रावधान है कि अगर किसी खास इलाके में किसी एक समुदाय की आबादी में इज़ाफा होता है, या उस इलाके का डेमोग्राफिक स्ट्रक्चर को इस तरह बदलने का कथित प्रयास होता है जिससे सांप्रदायिक सौहार्द प्रभावित हो सकता है, तो राज्य सरकार उस इलाके को अशांत क्षेत्र घोषित कर सकती है और वहां संपत्ति लेन-देन पर प्रतिबंध लगा सकती है.
  • बिल के प्रावधनाों का उल्लंघन करने पर कड़ी सजा का प्रावधान किया गया है. दोषी पाए जाने पर कम से कम तीन साल और अधिकतम पांच वर्ष तक की सजा हो सकती है.
  • विधेयक में यह भी कहा गया है कि जो कोई सक्षम प्राधिकारी के जरिए धारा 6 की उपधारा (4) के खंड (b) के तहत पारित आदेश की अवहेलना करेगा, उसका सहयोग करेगा, साजिश करेगा या जानबूझकर अवहेलना कराने में मदद करेगा, उसे कम से कम तीन वर्ष और अधिकतम पांच वर्ष तक की सजा दी जा सकेगी.
  • कारावास के अलावा दोषी व्यक्ति पर कम से कम एक लाख रुपये या संबंधित संपत्ति की मार्केट वेल्यू के 10 प्रतिशत के बराबर जुर्माना, जो भी अधिक हो, लगाया जाएगा.
  • बिल में यह भी प्रावधान है कि धारा 8 के तहत दंडनीय सभी अपराधों को संज्ञेय और गैर-जमानती अपराध माना जाएगा.
  • इस कानून के तहत जब भी कोई जांच या सुनवाई जिला कलेक्टर, एडीएम या राज्य सरकार के सामने होगी, तो उसे साधारण प्रशासनिक कार्रवाई नहीं माना जाएगा, बल्कि उसे अदालत जैसी कानूनी कार्यवाही माना जाएगा.

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