'यहां आए हो तो यहीं मरोगे!' नाम और राज्य पूछा… फिर तोड़ दी नाक, मध्य प्रदेश की आदिवासी यूनिवर्सिटी में असम के छात्र की बेरहमी से पिटाई

मध्य प्रदेश के अनूपपुर स्थित इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय (IGNTU) में असम के छात्र हेरोस ज्योतिदास पर हॉस्टल के अंदर जानलेवा हमला किया गया. हमलावरों ने छात्र से उसका नाम और राज्य पूछने के बाद बेरहमी से पिटाई की, जिससे उसकी नाक टूट गई और आंख-कान में गंभीर चोटें आईं. घटना के बाद कैंपस में भारी विरोध हुआ.;

( Image Source:  X/@Mithileshdhar )
Edited By :  प्रवीण सिंह
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मध्य प्रदेश के अनूपपुर जिले में स्थित इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय (IGNTU) एक बेहद शर्मनाक और डराने वाली घटना के चलते सुर्खियों में है. यहां हॉस्टल के अंदर असम से आए एक छात्र को सिर्फ उसकी पहचान और राज्य पूछकर बेरहमी से पीटा गया. इस हमले ने न सिर्फ कैंपस की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि देश की सामाजिक एकता को लेकर भी गंभीर बहस छेड़ दी है.

टाइम्‍स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, पीड़ित छात्र की पहचान हेरोस ज्योतिदास के रूप में हुई है, जो असम से ताल्लुक रखते हैं और IGNTU में एमए इकोनॉमिक्स के छात्र हैं. ज्योतिदास के मुताबिक, 13 जनवरी की सुबह करीब 4 बजे पांच से छह युवक उसके GGBH हॉस्टल के कमरे में घुस आए. हमलावरों ने पहले नाम पूछा, फिर यह जानना चाहा कि वह किस राज्य से है. जैसे ही उन्हें पता चला कि छात्र असम से है, उन्होंने हमला शुरू कर दिया.

दो ने पकड़े हाथ, बाकी ने चेहरे पर बरसाए घूंसे

शिकायत के अनुसार, दो आरोपियों ने छात्र के हाथ पकड़ लिए, जबकि बाकी ने चेहरे पर घूंसे और लातें बरसाईं. हमले की क्रूरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि छात्र की नाक की हड्डी टूट गई, जबकि आंखों और कानों में भी गंभीर चोटें आई हैं. इतना ही नहीं, हमलावरों ने धमकी दी - “यहां आए हो, तो यहीं मरोगे.”

डर और सदमे में छात्र, परीक्षा नहीं दे पा रहा

हमले के बाद से ज्योतिदास गहरे सदमे में हैं. उन्होंने बताया कि उन्हें अपनी जान का डर सता रहा है और मानसिक स्थिति इतनी खराब है कि वह 16 जनवरी से शुरू होने वाली परीक्षाएं भी नहीं दे पा रहे. यूनिवर्सिटी प्रशासन ने माना है कि नाक की चोट का असर आंख पर भी पड़ा है और छात्र की मानसिक हालत अभी स्थिर नहीं है.

छात्रों का उग्र प्रदर्शन, प्रशासन को घेरा

घटना के अगले ही दिन कैंपस में माहौल गर्म हो गया. छात्रों ने प्रशासनिक भवन का घेराव कर आरोपियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की. इसके बाद देर रात यूनिवर्सिटी प्रशासन ने CCTV फुटेज की जांच के आधार पर पांच छात्रों को निष्कासित कर दिया. यूनिवर्सिटी से निकाले गए छात्रों की पहचान अनुराग पांडे, जतिन सिंह, रजनीश तिवारी, विशाल यादव और उत्कर्ष सिंह के रूप में हुई है. प्रशासन ने बताया कि यह कार्रवाई मुख्य हॉस्टल वार्डन की सिफारिश पर की गई और मामला अब डिसिप्लिनरी कमेटी को सौंप दिया गया है.

पुलिस केस दर्ज, ABVP ने की सख्त कार्रवाई की मांग

पुलिस ने गुरुवार को आरोपियों के खिलाफ FIR दर्ज कर ली है. वहीं, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन सौंपकर आरोपियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की है.

राजनीतिक तूफान भी उठा

इस घटना ने राजनीतिक रंग भी ले लिया है. मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने हमले को “बेहद दुर्भाग्यपूर्ण” बताते हुए कहा कि यह सिर्फ एक छात्र पर हमला नहीं, बल्कि सामाजिक सौहार्द पर सीधा हमला है. उन्होंने भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों, इसके लिए सख्त कदम उठाने की मांग की.

कैंपस से देश तक सवाल

देश के अलग-अलग राज्यों से पढ़ने आए छात्रों की सुरक्षा को लेकर यह घटना एक खतरनाक चेतावनी बनकर सामने आई है. सवाल यह है कि अगर राष्ट्रीय विश्वविद्यालयों के हॉस्टल भी सुरक्षित नहीं हैं, तो फिर छात्रों की सुरक्षा की जिम्मेदारी कौन लेगा? यह मामला अब सिर्फ एक यूनिवर्सिटी का नहीं, बल्कि देश की एकता, छात्रों की सुरक्षा और कैंपस कल्चर से जुड़ा बड़ा सवाल बन चुका है.

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