SMA Type 2: वजन बढ़ा तो छिन जाएगी उम्मीद, बेहद घातक बीमारी से लड़ रही 3 साल की अनिका, लगना है 9 करोड़ का इंजेक्शन

SMA Type 2: तीन साल की अनिका शर्मा SMA टाइप-2 जैसी दुर्लभ और गंभीर बीमारी से जूझ रही है. 9 करोड़ रुपये के महंगे इंजेक्शन और 13.5 किलो वजन की शर्त के बीच उसकी जिंदगी की उम्मीद टिकी हुई है. जानिए क्या है SMA बीमारी, कितनी खतरनाक है और इसका इलाज इतना महंगा क्यों है.

( Image Source:  Instagram- @anikasharma_indore )
Edited By :  समी सिद्दीकी
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What is SMA Disease: तीन साल की अनिका शर्मा SMA टाइप-2 नाम की गंभीर बीमारी से पीड़ित है. उसके इलाज के लिए अब केवल एक ही मौका बचा है. डॉक्टरों ने कहा है कि अगर उसका वजन 13.5 किलो से ज्यादा हो गया, तो उसे जरूरी इंजेक्शन देना मुश्किल हो जाएगा. अभी उसका वजन 10.5 किलो है. इसलिए परिवार उसका वजन बढ़ने से रोकने की कोशिश कर रहा है.

अनिका को 9 करोड़ रुपये का एक इंजेक्शन लगना है, जो अमेरिका से आएगा. यह इंजेक्शन समय पर लगना जरूरी है. इंदौर के रतलाम का रहने वाला परिवार पिछले कई महीनों से क्राउडफंडिंग के जरिए पैसे जुटा रहा है. अब तक 5 करोड़ 60 लाख रुपये इकट्ठा हो चुके हैं. अभी 3 करोड़ 40 लाख रुपये की जरूरत है.

क्या है इंजेक्शन लगने की शर्त?

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक, अनिका की मां सरिता शर्मा ने बताया कि दिल्ली एम्स के डॉक्टरों ने इलाज के लिए दो शर्तें रखी थीं. पहली शर्त थी कि इंजेक्शन 2 साल की उम्र से पहले लग जाए. यह शर्त पूरी नहीं हो पाई. दूसरी शर्त है कि इंजेक्शन 13.5 किलो वजन होने से पहले लगना चाहिए. अब यही आखिरी मौका बचा है.

वजन न बढ़े, इसके लिए अनिका को तीन महीने से सामान्य खाना नहीं दिया जा रहा है. उसे रोटी, चावल, दाल या ऐसी चीजें नहीं दी जातीं जिससे वजन बढ़े. उसे पेट भरने के लिए फल, जूस, चाय-बिस्कुट और हलवा दिया जाता है.

अनिका क्या डाइट ले रही है?

मां ने बताया कि सुबह उठते ही अनिका को दवा दी जाती है. दवा देने से पहले उसे पपीता खिलाया जाता है. इसके बाद मखाने भूनकर उनका पाउडर बनाया जाता है. उसमें बादाम, अखरोट और खांड मिलाई जाती है. इससे हलवा बनाया जाता है, जिसे दूध में मिलाकर दिया जाता है.

दिन में उसे फलों का जूस दिया जाता है, शाम को चाय और बिस्कुट दिए जाते हैं. रात में फिर वही पाउडर दिया जाता है. मां कहती हैं कि एक ही तरह का खाना खाते-खाते बच्ची भी परेशान हो जाती है. कई बार वह सुबह से शाम तक भूखी रह जाती है और वही खाना खाने से मना कर देती है. माता-पिता को भी दुख होता है कि वे उसे उसकी पसंद का खाना नहीं दे पा रहे हैं.

अभी अनिका को क्या दिक्कत आ रही है?

मां ने बताया कि अनिका को सांस लेने में भी दिक्कत होती है. बाहर ले जाने पर उसे जल्दी सर्दी लग जाती है, जिससे सांस की समस्या बढ़ जाती है. ऐसे में डॉक्टर को दिखाना पड़ता है और दवा देनी पड़ती है. घर में वजन नापने की मशीन रखी गई है और बार-बार उसका वजन चेक किया जाता है. परिवार को उम्मीद है कि लोग मदद करेंगे ताकि बाकी 3 करोड़ 40 लाख रुपये भी जल्द जुट सकें और बच्ची को इंजेक्शन मिल सके.

पिता प्रवीण शर्मा ने बताया कि नवंबर से वे इलाज के लिए पैसे जुटा रहे हैं. अलग-अलग जगह कैंप लगाकर अब तक 5 करोड़ 60 लाख रुपये इकट्ठा किए गए हैं. इनमें से 50 लाख रुपये दिल्ली एम्स से जेपी नड्डा के जरिए स्वीकृत हुए थे. अभी 3 करोड़ 40 लाख रुपये और चाहिए.

क्या है SMA बीमारी?

रिपोर्ट के मुताबिक इंदौर के बाल रोग विशेषज्ञ और पूर्व डीन डॉ. हेमंत जैन ने बताया SMA एक दुर्लभ न्यूरो-मस्कुलर जेनेटिक बीमारी है. इसमें बच्चे की मांसपेशियां धीरे-धीरे कमजोर होने लगती हैं. दिमाग और रीढ़ की हड्डी से मांसपेशियों तक जाने वाले मैसेज कम हो जाते हैं. रीढ़ की हड्डी की मोटर नसों को नुकसान पहुंचता है, जिससे शरीर को चलाने में दिक्कत होती है.

शुरुआत में हाथ-पैर और शरीर हिलाने में कमजोरी दिखती है. समय के साथ बैठना, चलना, सांस लेना और निगलना भी मुश्किल हो सकता है. गंभीर मामलों में लकवा या मौत तक हो सकती है. डॉक्टरों के मुताबिक, इस बीमारी की दवा फिलहाल केवल एक कंपनी नोवार्टिस बनाती है. किसी और कंपनी ने अभी इसका उत्पादन शुरू नहीं किया है, इसलिए यह बहुत महंगी है.

SMA बीमारी कितने तरीके की होती है?

  • SMA टाइप-1: यह सबसे गंभीर होता है. जन्म से लेकर दो साल तक के बच्चों में पाया जाता है. इसमें 90 प्रतिशत से अधिक बच्चों की मौत हो जाती है.
  • SMA टाइप-2: यह 2 से 25 साल की उम्र तक के मरीजों में पाया जाता है, इसमें 30 प्रतिशत से अधिक मरीजों की मृत्यु हो सकती है.

क्या मां के पेट में हो सकती है पहचान?

डॉ. जैन ने बताया कि इस बीमारी की पहचान गर्भ में ही की जा सकती है. अगर गर्भ में बच्चा सही तरह से हरकत नहीं करता, तो विशेषज्ञ डॉक्टर जांच करते हैं. जन्म के तुरंत बाद इलाज शुरू हो जाए तो बच्चा स्वस्थ हो सकता है. देर होने पर कई सेल्स डैमेज हो जाती हैं, जिन्हें वापस नहीं लाया जा सकता. इंजेक्शन मृत कोशिकाओं को ठीक नहीं कर सकता, लेकिन नई कोशिकाओं को बचा सकता है.

इतनी महंगी क्यों है यह दवा?

डॉ. जैन के मुताबिक, भारत में हर 10,000 लोगों में से एक व्यक्ति SMA से पीड़ित होता है. मरीज कम होने के कारण दवा के ट्रायल के लिए भी मरीज ढूंढना मुश्किल होता है. यह इलाज जीन थेरेपी पर आधारित है, जिसमें शरीर की कोशिकाओं में नया या सुधरा हुआ जीन डाला जाता है, ताकि वे सही प्रोटीन बना सकें. इसी वजह से यह दवा बहुत महंगी है.

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