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दिन में 35 हजार रुपये का मांस, सालाना 1.27 करोड़ रुपये का खर्च; चीतों के खाने पर उठा सवाल

विधानसभा में कांग्रेस विधायक मुकेश मल्होत्रा के प्रश्नकाल के दौरान यह जानकारी सामने आई कि 'प्रोजेक्ट चीता' के तहत प्रतिदिन लगभग 35,000 रुपये बकरी के मांस पर खर्च किए जा रहे हैं.

Kuno National Park Cheetah Feeding Expenses
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Kuno National Park

( Image Source:  X/ @byadavbjp )

मध्य प्रदेश के श्योपुर जिले में स्थित कुनो राष्ट्रीय उद्यान में चीतों के भोजन पर करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं. विधानसभा में कांग्रेस विधायक मुकेश मल्होत्रा के प्रश्नकाल के दौरान यह जानकारी सामने आई कि 'प्रोजेक्ट चीता' के तहत प्रतिदिन लगभग 35,000 रुपये बकरी के मांस पर खर्च किए जा रहे हैं. मुख्यमंत्री मोहन यादव ने लिखित जवाब में बताया कि 2024-25 में बकरी का मांस खरीदने पर कुल 1,27,10,870 रुपये खर्च हुए.

हालांकि सरकार ने साफ किया कि चीतों के भोजन के लिए बजट में कोई अलग प्रावधान नहीं है और आवश्यकतानुसार अन्य मदों से धनराशि का उपयोग किया जाता है. वर्तमान में कुनो में 35 वयस्क, अर्ध-वयस्क और भारत में जन्मे चीते रह रहे हैं, जिनके भोजन और स्वास्थ्य की देखभाल के लिए समर्पित निगरानी दल चौबीसों घंटे काम कर रहा है.

कितनी बकरियां खिलाई जाती हैं?

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि प्रतिदिन कितनी बकरियों को भोजन दिया जाएगा, इसका कोई निश्चित मानक नहीं है. मांस की आपूर्ति पशु चिकित्सा संबंधी आवश्यकता और निगरानी आकलन के आधार पर की जाती है. औसतन प्रतिदिन लगभग 34,825 रुपये यानी लगभग 35,000 रुपये बकरी के मांस पर खर्च किए जा रहे हैं.

विधानसभा में उठे ये सवाल

1. चीतों के भोजन के लिए वार्षिक आवंटन कितना है?

2. प्रतिदिन कितनी बकरियों को भोजन दिया जाता है?

3. क्या चीतों या तेंदुओं ने आस-पास के गांवों में मवेशियों का शिकार किया?

4. 6 दिसंबर, 2025 को तेंदुए की मौत क्या भोजन की कमी के कारण हुई?

5. अधिकारियों के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई?

सरकार ने इन सभी सवालों का जवाब देते हुए कहा कि तेंदुओं को भोजन से वंचित नहीं किया जा रहा है और 6 दिसंबर को हुई तेंदुए की मौत सड़क दुर्घटना के कारण हुई थी, भोजन की कमी से इसका कोई संबंध नहीं था.

कुनों में कब छोड़े गए थे चीते?

17 सितंबर, 2022 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा नामीबिया से लाए गए 8 चीतों को कुनो राष्ट्रीय उद्यान में छोड़ा गया, जिससे यह भारत का पहला अफ्रीकी चीता निवास बन गया. फरवरी 2023 में साउथ अफ्रीका से 12 और चीतों को शामिल किया गया. इस परियोजना का नया चरण 28 फरवरी को बोत्सवाना से आठ और चीतों (दो नर और छह मादा) के स्थानांतरण के साथ शुरू होगा.

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