'मौलाना को घर से निकालो' वाले बयान पर भड़का मुस्लिम समाज, मंत्री इरफान अंसारी का जलाया पुतला, उठी इस्तीफे की मांग
झारखंड की राजनीति में उस समय तूफान खड़ा हो गया, जब स्वास्थ्य मंत्री और जामताड़ा से विधायक डॉ. इरफान अंसारी के 'मौलाना को घर से निकालो' वाला बयान सोशल मीडिया पर तेजी से फैल गया. बयान की भाषा ने खास तौर पर मुस्लिम समाज को आहत कर दिया. देखते ही देखते यह मामला ऑनलाइन नाराज़गी से निकलकर सड़क पर विरोध प्रदर्शन में बदल गया.;
झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री और जामताड़ा विधायक इरफान अंसारी के एक बयान ने प्रदेश की राजनीति में उबाल ला दिया है. “मौलाना को घर से निकालो” जैसी टिप्पणी सोशल मीडिया पर सामने आते ही मुस्लिम समाज में गहरी नाराज़गी फैल गई. बयान से आहत लोगों ने सड़कों पर उतरकर विरोध जताया, मंत्री के खिलाफ नारेबाजी की और पुतला दहन किया.
बढ़ते आक्रोश के बीच अब मंत्री से पद छोड़ने की मांग भी तेज हो गई है, जिससे यह मामला सियासी बहस के केंद्र में आ गया है. मुस्लिम लोगों ने कहा कि वह उनके समर्थक हैं, लेकिन इस तरह की बयानबाजी के खिलाफ वह चुप नहीं बैठेंगे.
'मौलाना है तो घर से निकालो'
मंत्री ने अपने बयान में कहा कि 'मौलाना है तो घर से निकालो, आदिवासी है तो घर के अंदर बैठाओ और चाय पिलाओ.' उनकी इस टिप्पणी के बाद मुस्लिम लोगों में आक्रोश है. लोगों का कहना है कि यह सिर्फ एक टिप्पणी नहीं, बल्कि सोच को उजागर करने वाला बयान है. जैसे ही वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया, मुस्लिम समुदाय में असंतोष फैल गया और विरोध की तैयारी शुरू हो गई.
लखनूडीह मोड़ बना विरोध का केंद्र
मंगलवार शाम जामताड़ा विधानसभा क्षेत्र के लखनूडीह मोड़ पर बड़ी संख्या में मुस्लिम समाज के लोग जमा हुए. हाथों में नाराज़गी और जुबान पर नारे थे. प्रदर्शनकारियों ने मंत्री के खिलाफ नारे लगाए और उनका पुतला दहन कर विरोध दर्ज कराया. प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे लोगों ने कहा कि जिन मतों की बदौलत डॉ. इरफान अंसारी विधायक और फिर मंत्री बने, उसी समाज का आज अपमान किया जा रहा है.
‘लोकतंत्र में हर वोट की बराबर कीमत’
प्रदर्शनकारियों ने सवाल उठाया कि आखिर किसी जनप्रतिनिधि को जनता के लिए अपमानजनक शब्द बोलने का अधिकार किसने दिया. उनका कहना था कि आदिवासी, मुस्लिम या हिंदू-लोकतंत्र में हर वोट की अहमियत समान होती है. ऐसा नहीं हो सकता कि एक वर्ग को सम्मान मिले और दूसरे को तिरस्कार का सामना करना पड़े.
समर्थन का मिला अपमानजनक जवाब
मौके पर मौजूद लोगों ने कहा कि वे लंबे समय से मंत्री के समर्थक रहे हैं, लेकिन इस बयान ने उनके भरोसे को तोड़ दिया है. समुदाय के लोगों का कहना था कि यह टिप्पणी उनके आत्मसम्मान पर सीधा हमला है. उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि वे इतने कमजोर नहीं हैं कि ऐसी बातों को चुपचाप सहते रहें.
वीडियो को लेकर उठे तीखे सवाल
प्रदर्शनकारियों का दावा था कि जो वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है, वह किसी और ने नहीं बल्कि मंत्री की ही सोशल मीडिया प्रोफाइल से सामने आया है. उनका कहना है कि अब चाहे इसे काट-छांट कर पेश किया गया बताया जाए, लेकिन बयान की मूल भावना से इनकार नहीं किया जा सकता.
इस्तीफे की उठी मांग
गुस्साए लोगों ने कहा कि जब कोई मौलाना या मुस्लिम समुदाय का व्यक्ति मंत्री के पास जाता है, तो वह किसी जरूरी काम या जनहित के मुद्दे को लेकर ही पहुंचता है. ऐसे में इस तरह की भाषा न केवल अस्वीकार्य है, बल्कि मंत्री पद की गरिमा के भी खिलाफ है. प्रदर्शनकारियों ने डॉ. इरफान अंसारी से पद छोड़ने की मांग की.
घटना की चौतरफा निंदा
इस विरोध प्रदर्शन में आसपास के कई गांवों से लोग पहुंचे. समाज के वरिष्ठों और स्थानीय प्रतिनिधियों ने मंत्री के बयान की कड़ी आलोचना की. उनका कहना था कि यह मामला सिर्फ एक बयान का नहीं, बल्कि समाज को बांटने वाली मानसिकता का है, जिसे किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं किया जा सकता.