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झारखंड में पकड़ा गया फर्जी IAS अधिकारी, UPSC में हुआ था 4 बार फेल, नहीं तोड़ना चाहता था पिता का सपना

झारखंड के पलामू जिले में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां 35 वर्षीय राजेश कुमार ने करीब सात साल तक खुद को आईएएस अधिकारी बताकर लोगों और सरकारी दफ्तरों को गुमराह किया. हुसैनाबाद थाना प्रभारी की सतर्कता से उसके बयानों में विरोधाभास सामने आया, जिसके बाद जांच में उसके फर्जी होने की पुष्टि हुई. पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया और उसकी कार से फर्जी पहचान पत्र, नीली नंबर प्लेट और अन्य दस्तावेज बरामद किए. आरोपी के खिलाफ प्रतिरूपण और जालसाजी सहित कई धाराओं में मामला दर्ज किया गया है.

झारखंड में पकड़ा गया फर्जी IAS अधिकारी, UPSC में हुआ था 4 बार फेल, नहीं तोड़ना चाहता था पिता का सपना
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( Image Source:  Create By AI Sora )
रूपाली राय
Edited By: रूपाली राय

Updated on: 5 Jan 2026 11:17 AM IST

झारखंड के पलामू जिले में एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है. यहां एक व्यक्ति ने लगभग सात सालों तक खुद को बड़ा सरकारी अधिकारी बताकर लोगों को बेवकूफ बनाया. वह खुद को आईएएस अधिकारी बताता था और इसके लिए उसने कई तरह की तरकीबें अपनाई थी. लेकिन आखिरकार पुलिस की सतर्कता से उसका झूठ पकड़ा गया और उसे गिरफ्तार कर लिया गया. यह व्यक्ति राजेश कुमार है, जिसकी उम्र 35 साल है वह पलामू जिले के हुसैनाबाद थाना क्षेत्र के कूखी गांव का रहने वाला है.

2 जनवरी को वह हुसैनाबाद पुलिस स्टेशन पहुंचा. वहां उसने खुद को 2014 बैच का ओडिशा कैडर का आईएएस अधिकारी बताया. उसने कहा कि वह भुवनेश्वर में मुख्य लेखा अधिकारी के पद पर तैनात है. उसने बताया कि वह अपने पैतृक गांव कूखी में निजी काम से छुट्टी पर आया हुआ है. राजेश कुमार पुलिस स्टेशन इसलिए आया था क्योंकि हुसैनाबाद क्षेत्र में उसके एक रिश्तेदार का जमीन से जुड़ा विवाद चल रहा था. वह पुलिस से मदद मांगने आया था उसने थाना प्रभारी से कहा कि मामले की जांच करें और उसका रिश्तेदार अगले दिन पुलिस स्टेशन आएगा तो उसका नाम लेकर आएगा.

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ऐसे कोई झूठ नहीं बोलता

थाना प्रभारी सोनू कुमार चौधरी ने एक आईएएस अधिकारी के साथ बातचीत करते समय पूरा प्रोटोकॉल का पालन किया, जैसा कि पुलिस वाले बड़े अधिकारियों के साथ करते हैं. लेकिन बातचीत के दौरान जब राजेश ने अपनी पोस्टिंग के बारे में बताया देहरादून, हैदराबाद और भुवनेश्वर में काम करने की बात कही तो थाना प्रभारी को शक हो गया. बाद में जब और पूछताछ हुई तो राजेश ने अपनी बात बदल दी उसने कहा कि वह आईएएस नहीं बल्कि आईपीटीएएफएस (इंडियन पोस्ट एंड टेलीकॉम अकाउंट्स एंड फाइनेंस सर्विस) का अधिकारी है, जो आईएएस के बराबर की सेवा है. यह बदलती हुई बातें सुनकर थाना प्रभारी को गहरा संदेह हो गया क्योंकि कोई असली सरकारी अधिकारी अपनी सेवा या पोस्टिंग के बारे में इस तरह लापरवाही से झूठ नहीं बोलता या बात नहीं बदलता.

पकड़ी गई चोरी

राजेश के पुलिस स्टेशन से जाने के बाद थाना प्रभारी ने अपने बड़े अधिकारी, हुसैनाबाद के एसडीपीओ (सब-डिविजनल पुलिस अधिकारी) को इस बारे में बताया. एसडीपीओ मोहम्मद याकूब ने राजेश के दिए गए नाम, बैच, कैडर और सेवा की डिटेल्स की जांच करवाई. जांच से पता चला कि ऐसे किसी अधिकारी का कोई रिकॉर्ड नहीं है. कोई भी व्यक्ति उनके बताए विवरण से मैच नहीं करता. इसके बाद पुलिस ने राजेश का पता लगाया और उसे पास के इलाके से पकड़कर पुलिस स्टेशन लाया गया. उसके साथ उसकी हुंडई ऑरा कार भी थी, जो झारखंड नंबर की थी. पुलिस ने जब राजेश से लगातार और सख्ती से पूछताछ की तो उसने कबूल कर लिया कि वह न तो आईएएस है और न ही किसी सरकारी सेवा में है वह पूरी तरह फर्जी था.

तोड़ना नहीं चाहता था पिता का सपना

आगे की जांच से पता चला कि राजेश कई सालों से अपने गांव और आसपास के इलाकों में खुद को आईएएस अधिकारी बता रहा था. वह अपनी कार में घूमता था और कार के आगे नीला बोर्ड लगा रखा था, जिसमें लिखा था 'भारत सरकार, दूरसंचार विभाग'. इस फर्जी पहचान का इस्तेमाल करके वह पुलिस स्टेशनों और सरकारी दफ्तरों में अपना रौब दिखाता था और काम करवाता था. पूछताछ में राजेश ने बताया कि आईएएस बनना उसका और उसके पिता का सपना था. वह यूपीएससी की सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी करने दिल्ली गया था. उसने चार बार परीक्षा दी एक बार तो प्रारंभिक परीक्षा पास भी कर ली, लेकिन मुख्य परीक्षा या इंटरव्यू में सफल नहीं हो पाया और अंतिम लिस्ट में जगह नहीं बना सका. पिता को निराश नहीं करना चाहता था, इसलिए उसने परिवार को झूठ बोल दिया कि वह आईएएस बन गया है फिर धीरे-धीरे यह झूठ इतना बड़ा हो गया कि वह सालों तक इसे बनाए रखने लगा.

फर्जी IAS हुआ गिरफ्तार

पुलिस ने जब राजेश की तलाशी ली तो उसके पास से एक फर्जी पहचान पत्र मिला, जिसमें उसे कनिष्ठ श्रेणी का मुख्य लेखा अधिकारी बताया गया था. इसमें एक मोबाइल नंबर भी लिखा था कार से भी कई चीजें बरामद हुईं चाणक्य आईएएस अकादमी का आईडी कार्ड, लाइब्रेरी कार्ड और कार पर लगी नीली सरकारी नंबर प्लेट जैसी चीजें. हुसैनाबाद के एसडीपीओ मोहम्मद याकूब ने बताया कि ऐसे फर्जी अधिकारी बनने के मामले कभी-कभी सामने आते हैं. कई जगहों पर ऐसे लोग पकड़े गए हैं बातचीत में इन पर शक हो जाता है क्योंकि जब इनसे सेवा, पोस्टिंग या कैडर के बारे में विस्तार से पूछो तो इनके जवाब आपस में मेल नहीं खाते. इस मामले में थाना प्रभारी की सतर्कता की बहुत तारीफ की जा रही है. अगर वे गहराई से नहीं पूछते तो शायद यह फर्जीवाड़ा पकड़ में नहीं आता. अंत में राजेश कुमार को गिरफ्तार कर लिया गया. उसके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है, जिसमें प्रतिरूपण (किसी और की पहचान अपनाना), जाली दस्तावेज बनाना और इस्तेमाल करना, और सरकारी अधिकारियों को गुमराह करने जैसे आरोप शामिल हैं.

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