दर्दनाक से ज्यादा शर्मनाक! झारखंड के अस्पताल ने मजदूर पिता को नहीं दी एम्बुलेंस, गत्ते के डिब्बे में घर पहुंचा नवजात का शव

झारखंड के पश्चिम सिंहभूम जिले में एक गरीब मजदूर को एम्बुलेंस नहीं मिलने पर अपने मृत नवजात बच्चे का शव गत्ते के डिब्बे में रखकर घर ले जाना पड़ा. वीडियो वायरल होने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने पूरे मामले की जांच के आदेश दिए हैं.

( Image Source:  X: @yoursudarshan )
Edited By :  रूपाली राय
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पश्चिम सिंहभूम जिले के चक्रधरपुर स्थित उप-मंडल अस्पताल के अधिकारियों द्वारा कथित तौर पर एम्बुलेंस देने से इनकार किए जाने के बाद, एक 35 वर्षीय दिहाड़ी मजदूर को शनिवार को अपने मृत शिशु के शव को एक गत्ते के डिब्बे में घर ले जाने के लिए मजबूर होना पड़ा, जिसके बाद स्वास्थ्य विभाग ने जांच की घोषणा की. यह मामला तब सामने आया जब एक व्यक्ति द्वारा शव को गत्ते के डिब्बे में ले जाते हुए का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया.

घटना का स्थान और समय

यह दुखद मामला झारखंड के पश्चिम सिंहभूम जिले में चक्रधरपुर के उप-मंडल अस्पताल (सब-डिविजनल हॉस्पिटल) का है. यह घटना शनिवार को हुई, और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद सबको पता चला. 

परिवार कौन है?

बंगरसाई गांव (कराईकेला थाना क्षेत्र) के रहने वाले रामकृष्ण हेमब्रम नाम के एक 35 साल के दिहाड़ी मजदूर ने अपनी गर्भवती पत्नी रीता तिरिया (उम्र 28 साल) को 5 मार्च को अस्पताल में भर्ती कराया था. वे बहुत गरीब परिवार से हैं और रोज़ कमाकर गुजारा करते हैं. 

क्या हुआ अस्पताल में?

शनिवार को डॉक्टरों ने जांच की तो बच्चे की धड़कन नहीं सुनाई दी. उन्होंने अल्ट्रासाउंड कराने को कहा. लेकिन अल्ट्रासाउंड पूरा होने से पहले ही रीता को प्रसव की पीड़ा शुरू हो गई.  उन्होंने एक मृत बच्चे को जन्म दिया. बच्चा जन्म के तुरंत बाद ही मर चुका था. 

एम्बुलेंस की मांग और इनकार

रामकृष्ण ने अस्पताल से अपने मृत बच्चे के शव को घर ले जाने के लिए एम्बुलेंस मांगी. उनका गांव अस्पताल से लगभग 12 किलोमीटर दूर है. लेकिन अस्पताल के कर्मचारियों ने एम्बुलेंस देने से मना कर दिया. परिवार का कहना है कि उन्हें कोई मदद नहीं मिली. 

शव को कैसे ले गए घर?

मजबूर होकर रामकृष्ण ने अस्पताल परिसर में पड़ा हुआ एक पुराना गत्ता (कार्डबोर्ड) का डिब्बा लिया. उसमें मृत बच्चे का शव रखा फिर शव को एक किराने के प्लास्टिक थैले में पैक किया.  उसके बाद ई-रिक्शा से घर पहुंचे. यह देखने में बहुत दर्दनाक और शर्मनाक था. 

अस्पताल का पक्ष क्या है?

अस्पताल के प्रभारी डॉक्टर अंशुमन शर्मा ने कहा, 'हमने महिला को अस्पताल में ही रखा और परिवार को अंतिम संस्कार के लिए कहा. परिवार ने कभी एम्बुलेंस की मांग नहीं की अगर मांग करते तो हम 'ममता वाहन' की व्यवस्था कर देते.' अस्पताल का दावा है कि कोई अनुरोध नहीं आया था. 

सरकार और विभाग की प्रतिक्रिया

इस वायरल वीडियो के बाद स्वास्थ्य विभाग ने गंभीरता से मामला लिया. अतिरिक्त मुख्य सचिव (स्वास्थ्य) अजय कुमार सिंह ने कहा, 'पूरी घटना की गहन जांच होगी. अगर आरोप सही निकले तो दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी.' जांच शुरू हो चुकी है. 

पहले भी ऐसी घटना हुई थी

पिछले साल 19 दिसंबर को इसी जिले के चाईबासा सदर अस्पताल में भी एक दुखद मामला हुआ था. वहां एक व्यक्ति को अपने 4 महीने के मृत बेटे का शव प्लास्टिक की थैली में लेकर 70 किलोमीटर दूर घर जाना पड़ा, क्योंकि एम्बुलेंस के लिए पैसे नहीं थे। वह सार्वजनिक बस से गया था. 

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