सन 1987 का पुराना विमान, नहीं था ब्लैक बॉक्स; कैसे पता चलेगी हादसे की वजह? झारखंड एयर एंबुलेंस क्रैश में क्या है अपडेट?
झारखंड में सोमवार रात एक एयर एंबुलेंस हादसे का शिकार हो गया था, जिसमें सवार सभी सात लोगों की मौत हो गई थी. अब जानकारी सामने आई है कि इस एयर एंबुलेंस में ब्लैक बॉक्स ही नहीं था, जिससे हादसे के कारणों का पता लगाना जांच एजेंसियों के लिए चुनौती बन गया है.
Jharkhand Air Ambulance Crash Update: झारखंड में सोमवार रात एक एयर एंबुलेंस हादसे का शिकार हो गया, इसमें सवार सभी सात लोगों की मौत हो गई. एचटी की रिपोर्ट के मुताबिक प्लेन में कोई भी ब्लैक बॉक्स नहीं था, जिससे हादसे के कारण का पता लगाना चुनौतीपूर्ण होगाय
एक अधिकारी के मुताबिक, जांच में यह देखा जा रहा है कि क्या एयर एंबुलेंस खराब मौसम की वजह से अपनी रास्ते से भटक गया था. रिपोर्ट के मुताबिक जांचकर्ताओं ने बताया कि उसी रास्ते पर उड़ान भरने वाले एयर इंडिया और इंडिगो के दो कमर्शियल फ्लाइट्स ने खराब मौसम का सामना किया और रास्ता में बदलाव करने की इजाजत मांगी थी.
किधर बदलाव चाहता था एकर एंबुलेंस का पायलट?
इंडिगो की फ्लाइट ने बाएं की ओर बदलाव मांगा, जबकि हादसे वाला विमान दाएँ की ओर बदलाव चाहता था. एक अधिकारी ने कहा कि यह देखा जा रहा है कि क्या हादसे वाले विमान का मौसम राडार सही काम कर रहा था, या चालक दल ने राडार की कंडीशन को गलत पढ़ा था.
विमान दिल्ली स्थित रेडबर्ड एयरवेज प्रा. लि. द्वारा संचालित था और यह रांची से दिल्ली मेडिकल इवैक्यूएशन के लिए उड़ान भर रहा था. विमान में मरीज संजय कुमार (41), एक डॉक्टर, एक पैरामेडिक, दो अटेंडेंट और दो पायलट. कमांड पायलट विवेक विकास भगत, जिनके पास लगभग 1,400 उड़ान घंटों का एक्सपीरियंस था, और फर्स्ट ऑफिसर सवराजदीप सिंह, जिनके पास लगभग 450 उड़ान घंटों का एक्सपीरियंस था.
विमान का निर्माण 1987 में हुआ था और रेडबर्ड एयरवेज ने इसे 2022 में ओरिएंट फ्लाइंग स्कूल से खरीदा था. ओरिएंट फ्लाइंग स्कूल ने इसे 2001 में खरीदा था. एक अधिकारी ने कहा कि विमान 2018 से 2022 तक इस्तेमाल में नहीं था, हालांकि इसकी वजह आधिकारिक तौर पर सामने नहीं आ पाई है.
क्या इस प्लेन का किया गया था ऑडिट?
सिविल एविएशन मंत्रालय ने पिछले महीने महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री को ले जा रहे लीजर जेट के बारामती में क्रैश होने के बाद चार्टर जेट ऑपरेटरों का खास ऑडिट करने का आदेश दिया था. यह स्पष्ट नहीं है कि रेडबर्ड एयरवेज का ऑडिट हुआ या नहीं.
कैसे पता लगेगी मौत की वजह?
रिपोर्ट के मुताबिक, मार्टिन कंसल्टिंग के सीईओ मार्क मार्टिन ने कहा कि इस मामले में चश्मदीदों के बयान अहम होंगे. उन्होंने कहा,"कुछ ऑपरेटर जिनके विमान 5,700 किलोग्राम से कम हैं, सुरक्षा के लिए FDR और CVR इंस्टॉल करते हैं. लेकिन बीचक्राफ्ट C90 बहुत पुराना विमान है, लगभग 25-30 साल पुराना, और उस समय नियम आज जितने विकसित नहीं थे. जांचकर्ता अहम तौर पर चश्मदीदों पर भरोसा करते हैं. ये बयानों महत्वपूर्ण सुराग दे सकते हैं. जैसे कि विमान बादलों में दाखिस करने के बाद नाक नीचे हुआ, आग लगी, या कठिन मौसम जैसे अपड्राफ्ट या डाउनड्राफ्ट ने विमान को प्रभावित किया."
DGCA के मुताबिक, विमान रांची से 7:11 बजे रवाना हुआ और दिल्ली में लगभग 10 बजे लैंड करने की उम्मीद थी. रांची ATC ने उड़ान के तुरंत बाद इसे कोलकाता एरिया कंट्रोल को हैंडओवर किया. विमान को ATALI वेपॉइंट पार करना था, लेकिन यह अपने निर्धारित रास्ते से भटक गया. अंतिम राडार संपर्क 7:22 बजे रिकॉर्ड हुआ, जब यह 13,800 फीट ऊँचाई पर था और रांची से लगभग 40 नौटिकल मील दूर था. आखिरी रेडियो संपर्क 7:34 बजे कोलकाता कंट्रोलर्स के साथ हुआ, इसके बाद विमान ने न तो संवाद बनाए रखा और न ही राडार पर दिखाई दिया.