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6 साल की उम्र में बिछड़ा, पहुंचा केरल के शेल्टर होम; क्या है झारखंड के राजा गोप की कहानी जिसकी 14 साल बाद हो रही है घर वापसी?

2012 में पिता से बिछड़कर केरल पहुंचा झारखंड का राजा गोप अब 22 साल की उम्र में घर लौट रहा है। कार्यकर्ताओं और सोशल मीडिया की मदद से परिवार से चमत्कारिक मिलन संभव हुआ.

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रूपाली राय
Edited By: रूपाली राय3 Mins Read

Updated on: 19 Feb 2026 9:31 AM IST

एक छोटे से बच्चे की वो दिल दहला देने वाली कहानी जहां 6 साल की उम्र में ट्रेन की भीड़ में पिता से बिछड़कर वह हजारों किलोमीटर दूर केरल पहुंच गया. 14 साल की अनजानी जिंदगी, घर की यादें धुंधली पड़ती गईं, लेकिन मां की दुआएं और मेहनती कार्यकर्ताओं की कोशिशों ने चमत्कार कर दिया. आज 22 साल का राजा घर लौट रहा है.

2012 में झारखंड के चाईबासा में रहने वाला छोटा सा बच्चा राजा गोप उस समय सिर्फ 6 साल का था. वह अपने पिता के साथ काम की तलाश में पश्चिम बंगाल के हावड़ा जा रहा था क्योंकि वे दोनों ईंट भट्ठे में मजदूरी करने वाले थे. भीड़ में किसी तरह राजा अपने पिता से बिछड़ गया. छोटी उम्र में घबराहट में उसने गलत ट्रेन पकड़ ली और वह ट्रेन उसे बहुत दूर केरल राज्य के एर्नाकुलम ले गई. केरल पहुंचने के बाद कुछ सामाजिक कार्यकर्ताओं ने उसे देखा और बचाया. उन्होंने उसे एक बच्चे के शेल्टर होम में रख दिया.

क्या याद रहा राजा को?

राजा को सिर्फ इतना याद था कि उसका घर चाईबासा में है, उसके माता-पिता के नाम क्या हैं और परिवार के कुछ सदस्यों के नाम. लेकिन गांव का सटीक पता या कोई और डिटेल याद नहीं थी. कई साल बीत गए राजा अब 22 साल का हो चुका है. वह अब बच्चा नहीं रहा, बल्कि एक जवान लड़का बन गया है. इन सालों में केरल के बाल कल्याण समिति (CWC) और अन्य संगठनों ने उसकी देखभाल की. बाद में उसे कन्नूर जिले में कौशल विकास और पुनर्वास कार्यक्रम में भेजा गया. वहां के स्थानीय कार्यकर्ताओं ने उसकी मदद की और झारखंड के एक संगठन रेलवे चिल्ड्रन के फरदीन खान से संपर्क किया.

कैसे पहुंची मां तक खबर?

फरदीन खान ने राजा का एक वीडियो बनवाया, जिसमें वह अपने परिवार और गांव के बारे में बात कर रहा था. इस वीडियो को सोशल मीडिया और अन्य जगहों पर फैलाया गया. आखिरकार यह वीडियो झारखंड के पश्चिम सिंहभूम जिले के हरिमारा गांव में राजा के परिवार तक पहुंचा. परिवार को पता चला कि उनका बेटा जिंदा है और अब घर लौटने वाला है. लेकिन खुशी के साथ-साथ दुख भी हुआ, क्योंकि राजा के पिता का 4 साल पहले ही देहांत हो चुका था. परिवार की मां मणि और बाकी भाई-बहन इन सालों में बहुत मुश्किलों से गुजरे. पिता के जाने के बाद वे मजदूरी करके गुजारा कर रहे थे.

होगी घर वापसी

मां ने कहा, 'मुझे बहुत खुशी है कि मेरा बेटा जिंदा है और घर आएगा. काश मेरे पति आज होते और अपने बेटे को देख पाते, तो मैं और भी ज्यादा खुश होती.' अब दोनों तरफ से प्रयास चल रहे हैं. झारखंड की महिला एवं बाल विकास विभाग और केरल की विभाग मिलकर कागजी काम पूरा कर रहे हैं. जल्द ही राजा को झारखंड लाया जाएगा. चाईबासा की बाल कल्याण समिति के सदस्य एमडी शमीम ने बताया कि पहले स्थानांतरण की प्रक्रिया पूरी होगी. उसके बाद राजा को आफ्टर केयर योजना में रखा जाएगा, कौशल प्रशिक्षण दिया जाएगा ताकि वह अपना भविष्य खुद संभाल सके.

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