कुख्यातों का नया ठिकाना: पोर्ट ब्लेयर नहीं, झारखंड की नई हाई सिक्योरिटी जेल, जहां गुमनाम जिंदगी जिएंगे कैदी

झारखंड में राज्य की पहली हाई सिक्योरिटी स्पेशल जेल का निर्माण हजारीबाग के जयप्रकाश नारायण केंद्रीय कारा परिसर में चल रहा है.इस जेल में देश भर के कुख्यात कैदियों को रखा जाएगा. इसका मकसद खतरनाक अपराधियों और उग्रवादियों को अलग रखने के लिए बेहद कड़ी सुरक्षा व्यवस्था तैयार करना है. इसमें पोर्ट ब्लेयर जेल जैसे कठोर और गुमनाम कारागार की याद दिलाने वाले सुरक्षा और तकनीक उपाय शामिल होंगे.;

( Image Source:  Sora AI )

समाज में बढ़ते अपराध, उग्रवादी गतिविधियों और जेलों के भीतर संचालित नेटवर्क ने अब भारत के कई राज्यों को अत्याधुनिक जेलों की ओर कदम बढ़ाने पर मजबूर कर दिया है. इसी कड़ी में झारखंड सरकार और केंद्र सरकार मिलकर राज्य की पहली हाई सिक्योरिटी स्पेशल जेल का निर्माण करने में जुटी है. यह जेल पोर्ट ब्लेयर जेल की याद दिलाएगी, लेकिन कैदियों के लिए उससे भी ज्यादा खतरनाक माना जा रहा है. इस जेल में न सिर्फ सुरक्षा के सर्वोच्च स्तर पर होगी, बल्कि यहां रहने वाले कुख्यात अपराधियों के लिए अलग, गुमनाम जीवन सुनिश्चित किया जाएगा, ताकि जेल से अपराध का असर बाहर न फैल सके न ही जेल से अपने नेटवर्क को आपरेट कर सकें.

हाई सिक्योरिटी जेल की खासियत

1. लोकेशन और साइज

यह जेल हजारीबाग के जयप्रकाश नारायण केंद्रीय कारा परिसर के भीतर बनाई जा रही है. लगभग 18.20 एकड़ में इसे विकसित किया जा रहा है. निर्माण का कुल अनुमानित खर्च लगभग 98 करोड़ है. जेल में करीब 300 कैदियों को रखने की क्षमता होगी. इसे हार्डकोर उग्रवादियों और खतरनाक अपराधियों के लिए विशेष रूप से डिजाइन किया जा रहा है. ताकि सामान्य कैदियों और अन्य बंदियों पर इसका प्रभाव न पड़े.

2. सुरक्षा व्यवस्था

झारखंड में बन रहा नया और हाई सिक्योरिटी जेल में आधुनिक सुरक्षा तकनीक और इंतजाम होंगे जैसे: सीसीटीवी निगरानी सिस्टम, तगड़ी दीवारें और ऊंचे बाउंडरी सुरक्षा घटक, इलेक्ट्रॉनिक बेंगल बम/एक्स-रे स्कैनिंग, सिग्नल जैमर/टेक्नोलॉजी ब्लॉकिंग, कंट्रोल रूम और गार्ड टॉवर निगरानी व अन्य सुविधाएं होंगी.

3. जेल को कौन बना रहा है?

झारखंड पुलिस हाउसिंग कार्पोरेशन लिमिटेड (JPHCL) निर्माण एजेंसी के रूप में काम कर रही है. यह राज्य सरकार के जेल आधुनिकीकरण प्रोजेक्ट का हिस्सा है. केंद्रीय गृह मंत्रालय और राज्य सरकार के संयुक्त सहयोग में इस हाई सिक्योरिटी जेल के निर्माण के लिए लगभग ₹97.73 करोड़ की राशि स्वीकृत की गई है. इसमें निर्माण लागत, सुरक्षा उपकरण और प्रशासनिक सुविधाएं शामिल हैं.

4. कौन रहने वाला है इस जेल में?

यह जेल उग्रवादी, आतंकवादी, सख्त किस्म के संगीन अपराधियों और हाई-रिस्क कैदी रखे जाएंगे. इसका मकसद यह है कि अन्य सामान्य जेलों पर बोझ न पड़े और विशेष निगरानी की आवश्यकता वाले अपराधियों को अलग रखा जाए.

5. तकनीकी सुविधाएं और एडवांसमेंट

यह हाई सिक्योरिटी जेल संभावित रूप से निम्न तकनीकी सुविधाओं से सुसज्जित होगी. इनमें 24×7 CCTV और सेंसर नेटवर्क, बायोमेट्रिक कंट्रोल और एक्सेस प्रबंधन, बॉर्डर/दीवार सुरक्षा और इलेक्ट्रिक सिस्टम्स, सिग्नल ब्लॉकिंग/जैमर सपोर्ट, कंट्रोल रूम वीकली रियल-टाइम मॉनिटरिंग, आइसोलेटेड वार्ड और यार्ड, इमरजेंसी रिस्पांस सिस्टम और आईटी आधारित रिकॉर्ड मैनेजमेंट सुविधाएं शामिला हैं.

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