ब्रह्मपुत्र नदी के अंदर चलेगी ट्रेन-गाड़ियां, बैलिस्टिक ट्रैक से होगा लैस; जानें देश के पहले अंडरवाटर ट्विन-ट्यूब टनल के बारे में

भारत एक बार फिर दुनिया को अपनी तकनीकी ताकत और दूरदर्शी सोच का एहसास कराने जा रहा है. देश के इतिहास में पहली बार ब्रह्मपुत्र नदी के नीचे ऐसा अंडरवॉटर टनल बनने जा रहा है, जिसमें सड़क और रेल दोनों की सुविधा होगी. यह सिर्फ एक इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट नहीं, बल्कि उत्तर-पूर्व भारत की तस्वीर बदलने वाला कदम माना जा रहा है.;

( Image Source:  AI SORA )
Edited By :  हेमा पंत
Updated On : 3 Jan 2026 10:44 AM IST

भारत अपनी इंजीनियरिंग की ताकत का एक और नया मुकाम हासिल करने जा रहा है. असम में ब्रह्मपुत्र नदी के नीचे बनने वाला यह देश का पहला अंडरवाटर ट्विन-ट्यूब टनल सिर्फ सड़क और रेल को जोड़ने वाला साधारण प्रोजेक्ट नहीं है. यह हाई-टेक टनल बैलिस्टिक ट्रैक से लैस होगा, जिससे ट्रेनें पूरी तरह सुरक्षित और तेज़ी से चल सकेंगी.

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तैयार होने के बाद गोहपुर और नुमालीगढ़ के बीच का सफर महज़ 30 मिनट में पूरा होगा, जो पहले छह घंटे से ज्यादा लगता था. यह प्रोजेक्ट उत्तर-पूर्व की कनेक्टिविटी और देश की सुरक्षा के लिहाज से भी बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है.

नदी के नीचे दौड़ेंगी गाड़ियां और ट्रेन

असम में गोहपुर और नुमालीगढ़ को जोड़ने वाला यह ट्विन-ट्यूब टनल करीब 15.8 किलोमीटर लंबा होगा. दो अलग-अलग टनल बनाए जाएंगे, जिनमें से एक में दो लेन की सड़क होगी और दूसरे टनल में एकल रेलवे ट्रैक की व्यवस्था रहेगी. खास बात यह है कि जिस ट्यूब से ट्रेन गुज़रेगी, उस समय उसमें वाहनों की आवाजाही नहीं होगी, जिससे सुरक्षा और संचालन दोनों बेहतर रहेंगे.

6 घंटे का सफर 30 मिनट में पूरा

इस परियोजना के पूरा होते ही गोहपुर से नुमालीगढ़ तक का सफर, जो अभी करीब साढ़े छह घंटे का है, सिमटकर महज़ 30 मिनट में पूरा हो जाएगा. जहां आज 240 किलोमीटर का लंबा रास्ता तय करना पड़ता है, वहीं यह दूरी घटकर सिर्फ 34 किलोमीटर रह जाएगी. इससे अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर और अन्य उत्तर-पूर्वी राज्यों की कनेक्टिविटी को जबरदस्त मजबूती मिलेगी.

देश की सुरक्षा के लिए भी बड़ा कदम

करीब 18,600 करोड़ रुपये की इस महत्वाकांक्षी परियोजना का खर्च सड़क परिवहन मंत्रालय, रेलवे मंत्रालय और रक्षा मंत्रालय मिलकर उठाएंगे. रेलवे ट्रैक की सुविधा जोड़ने की वजह से लागत बढ़ी है, लेकिन इससे मिलने वाले फायदे कहीं ज्यादा बड़े हैं. यह टनल रणनीतिक नजरिए से भी बेहद अहम मानी जा रही है. जरूरत पड़ने पर इससे सेना, हथियार और जरूरी सामान को तेजी से एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाया जा सकेगा. ट्रेनें पूरी तरह बिजली से चलेंगी और ट्रैक को खास बैलिस्टिक डिजाइन में तैयार किया जाएगा, ताकि यह हर चुनौती का सामना कर सके.

तकनीक और ताकत का अद्भुत संगम

इन दोनों टनलों को ब्रह्मपुत्र नदी के सबसे गहरे तल से करीब 32 मीटर नीचे बनाया जाएगा. हर टनल एक दिशा में चलेगी और उसमें दो लेन होंगी. पूरे प्रोजेक्ट में टनल के साथ-साथ अप्रोच रोड और रेलवे लाइन भी शामिल हैं, जिसकी कुल लंबाई करीब 33.7 किलोमीटर होगी.

पांच साल में पूरा होने का लक्ष्य

सरकारी अधिकारियों के मुताबिक, इस परियोजना को कैबिनेट की मंजूरी के लिए जल्द पेश किया जाएगा. मंजूरी मिलते ही काम शुरू होगा और करीब पांच साल में इसे पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है. यह प्रोजेक्ट न सिर्फ असम, बल्कि पूरे उत्तर-पूर्व के विकास की रफ्तार को नई उड़ान देगा.

विकास की नई सुरंग

ब्रह्मपुत्र के नीचे बनने वाला यह टनल भारत की इंजीनियरिंग क्षमता, रणनीतिक सोच और विकास के संकल्प का शानदार उदाहरण है. यह सुरंग सिर्फ दो किनारों को नहीं जोड़ेगी, बल्कि उत्तर-पूर्व को देश की मुख्यधारा से और मज़बूती से जोड़ने का काम करेगी.

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