तारीख पर तारीख! 15 जनवरी के बाद 15 फरवरी और अब 10 मार्च, असम में NDA के सीट बंटवारे की आ गई एक और डेडलाइन

असम विधानसभा चुनाव को लेकर सीएम हिमंता बिश्‍वा सरमा ने साफ कर दिया है कि अब और इंतज़ार नहीं होगा. उन्होंने सीट-बंटवारे पर 10 मार्च की अंतिम समयसीमा तय कर दी है

Himanta Biswa Sarma

(Image Source:  X/ @himantabiswa )
Edited By :  विशाल पुंडीर
Updated On :

असम की राजनीति में चुनाव से पहले सबसे बड़ा सवाल यही है - NDA में कौन कितनी सीट पाएगा? इसी सियासी खींचतान के बीच मुख्यमंत्री हिमंता बिश्‍वा सरमा ने साफ कर दिया है कि अब और इंतज़ार नहीं होगा. उन्होंने सीट-बंटवारे पर 10 मार्च की अंतिम समयसीमा तय कर दी है, जबकि इससे पहले वह दावा कर चुके थे कि गठबंधन का फॉर्मूला लगभग तय हो चुका है. बता दें कि पहले भी दो बार ये डेडलाइन बदली जा चुकी है.

गुरुवार को प्रेस ब्रीफिंग में सरमा ने माना कि बातचीत अब भी जारी है. बीजेपी की चर्चा फिलहाल मुख्य रूप से असम गण परिषद और बोडोलैंड पीपल्‍स फ्रंट के साथ चल रही है. उन्होंने कहा कि BPF से बातचीत एक-दो दिन में पूरी हो जाएगी और AGP से 9–10 मार्च तक समझौता हो जाएगा. इसके बाद ही पूरे गठबंधन की औपचारिक घोषणा की जाएगी.

बार-बार क्‍यों बदली जा रही डेडलाइन?

हालांकि, सरमा ने यह भी दोहराया कि Rabha Hasong Joutha Sangram Samiti (RHJSS) के साथ सीट-बंटवारे पर पहले ही सहमति बन चुकी है. बाकी दलों के साथ बातचीत में देरी की वजह उन्होंने राज्‍यसभा चुनाव और लंबी राजनीतिक सलाह-मशविरे को बताया. दिलचस्प बात यह है कि यह पहली बार नहीं है जब समयसीमा बदली गई हो.

दिसंबर में लक्ष्य था 15 जनवरी और जनवरी में कहा गया था 15 फरवरी. अब एक बार फिर नई तारीख 10 मार्च की तय की गई है. यानी NDA के भीतर सीटों को लेकर खींचतान जितनी सार्वजनिक हो रही है, उतनी ही अंदरखाने सख्त मोलभाव की तस्वीर भी सामने आ रही है.

फिलहाल NDA में बीजेपी, AGP, UPPL और BPF के विधायक हैं, जबकि RHJSS और जनशक्ति पार्टी बिना विधायक के गठबंधन का हिस्सा हैं. ऐसे में सवाल यही है कि जिन दलों का विधानसभा में जनाधार कम है, उन्हें कितनी राजनीतिक “स्पेस” दी जाएगी.

BJP के उम्‍मीदवार चुनने का क्‍या होगा फार्मूला?

इस बीच असम बीजेपी अध्यक्ष दिलीप सैकिया ने एक और बड़ा संकेत दिया है. उन्होंने साफ किया कि अभी तक किसी भी सीट पर उम्मीदवार फाइनल नहीं हुआ है. उन्होंने कहा कि उम्मीदवारों का फैसला पार्टी का संसदीय बोर्ड करेगा और चयन का आधार होगा - संगठनात्मक ताकत, जनता में स्वीकार्यता और जीतने की क्षमता. उन्होंने यह भी दो टूक कहा कि पार्टी नए और पुराने नेताओं में फर्क नहीं करेगी, बल्कि प्रदर्शन और ज़मीनी कामकाज ही टिकट दिलाएगा.

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह सिर्फ सीटों की बातचीत नहीं, बल्कि असम में NDA के भीतर शक्ति-संतुलन की लड़ाई है. हिमंत सरमा की डेडलाइन दरअसल सहयोगी दलों को यह संदेश है कि अब या तो शर्तें मानो, या गठबंधन से बाहर रहो. अब सबकी नजर 10 मार्च पर टिकी है कि क्या NDA एकजुट होकर मैदान में उतरेगा या सीटों की लड़ाई चुनाव से पहले ही गठबंधन को कमजोर कर देगी?

Similar News