हिमंता सरमा के ‘मियां’ बयान पर FIR की मांग खारिज, सुप्रीम कोर्ट बोला - यह 'डिस्टर्बिंग ट्रेंड' है
असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिश्वा सरमा के कथित ‘मियां’ बयान पर FIR की मांग सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दी. अदालत ने कहा कि चुनाव से पहले सीधे शीर्ष अदालत आना एक “डिस्टर्बिंग ट्रेंड” बनता जा रहा है.;
Himanta Biswa Sarma
(Image Source: ANI )असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के कथित ‘मियां’ बयान और विवादित वीडियो को लेकर दर्ज एफआईआर की मांग पर सुप्रीम कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए याचिकाएं खारिज कर दीं. अदालत ने कहा कि चुनाव से पहले सीधे सुप्रीम कोर्ट आने की प्रवृत्ति “डिस्टर्बिंग ट्रेंड” बनती जा रही है. मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत की अगुवाई वाली पीठ ने याचिकाकर्ताओं से पूछा कि उन्होंने पहले गुवाहाटी हाईकोर्ट का रुख क्यों नहीं किया.
अदालत ने राजनीतिक दलों को संवैधानिक मर्यादा में रहने की नसीहत दी और हाईकोर्ट की गरिमा को कमजोर करने की कोशिशों पर आपत्ति जताई. वहीं वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने SIT जांच की मांग करते हुए इसे मौलिक अधिकारों से जुड़ा मामला बताया.
सुनवाई की 10 बड़ी बातें
1. सुप्रीम कोर्ट ने कहा- हर मामला सीधे शीर्ष अदालत में लाना “खतरनाक चलन” बनता जा रहा है.
2. CJI ने पूछा - याचिकाकर्ता पहले गुवाहाटी हाईकोर्ट क्यों नहीं गए?
3. अदालत ने चेताया- हाईकोर्ट की वैधता और मनोबल को कमजोर न करें.
4. राजनीतिक दलों को “संवैधानिक नैतिकता” के दायरे में रहने की सलाह दी गई.
5. अभिषेक सिंघवी ने कहा - यह मामला अनुच्छेद 14, 15 और 21 से जुड़ा है.
6. याचिका में SIT से जांच कराने की मांग रखी गई.
7. सिंहवी ने तर्क दिया- मुख्यमंत्री “आदतन” ऐसे बयान देते रहे हैं.
8. कोर्ट ने कहा - सुप्रीम कोर्ट “कन्वीनियंस फोरम” नहीं है.
9. गुवाहाटी हाईकोर्ट पर अविश्वास जताने को कोर्ट ने सिरे से खारिज किया.
10. यह याचिका पहले Jamiat Ulama-i-Hind ने दायर की थी, जिसे उसके प्रमुख महमूद मदनी ने आगे बढ़ाया था.