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असम कांग्रेस में ये क्या हो रहा? पहले दिया इस्तीफा और फिर लिया वापस, कौन हैं भुपेन बोरा, जिनके जाने से लगता सदमा

असम के प्रदेश अध्यक्ष ने अपना इस्तीफा वापस ले लिया है. आज ही उन्होंने पार्टी से नाराज़गी ज़ाहिर करते हुए इस्तीफा दिया था. उनका कहना था कि उन्हें पार्टी ने वह जगह नहीं दी जो उन्हें मिलनी चाहिए थी.

असम कांग्रेस में ये क्या हो रहा? पहले दिया इस्तीफा और फिर लिया वापस, कौन हैं भुपेन बोरा, जिनके जाने से लगता सदमा
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समी सिद्दीकी
Edited By: समी सिद्दीकी

Updated on: 16 Feb 2026 4:46 PM IST

Assam News: असम विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस को बड़ा झटका लगा था, हालांकि अब पार्टी ने राहत की सांस ली होगी. पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष भूपेन कुमार बोरा ने अपने पद से इस्तीफा दिया और फिर अपने फैसले से पीछे हट गए. उनके इस फैसले ने राज्य की राजनीति में हलचल पैदा कर दी थी. माना जा रहा था इससे कांग्रेस की चुनावी तैयारियों पर काफी असर पड़ेगा.

भूपेन कुमार बोरा ने अपना इस्तीफा कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को भेजा था. उनके इस्तीफे की वजह पार्टी से नाराज़गी बताई थी. करीब चार साल प्रदेश अध्यक्ष रहे बोरा ने उन्हें नज़रअंदाज़ करने का आरोप लगाया था.

भूपेन कुमार बोरा ने क्या लगाए थे आरोप?

पत्र में भूपेन ने आरोप लगाया था कि पार्टी नेतृत्व उन्हें नजरअंदाज कर रहा है और राज्य यूनिट में उन्हें सही जगह नहीं दी जा रही है. बोरा साल 2021 से 2025 तक असम कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष रहे. पिछले साल उनकी जगह गौरव गोगोई को यह जिम्मेदारी सौंपी गई थी. बोरा दो बार विधायक भी रह चुके हैं.

गुवाहाटी में पत्रकारों से बातचीत करते हुए भूपेन कुमार बोरा ने कहा था कि उन्होंने सुबह 8 बजे ईमेल के जरिए पार्टी हाईकमान को अपना इस्तीफा भेज दिया था. उन्होंने अपने फैसले के पीछे के कारणों का जिक्र पत्र में विस्तार से किया था.

अपने इस्तीफे पर क्या बोले थे बोरा?

उन्होंने कहा था कि मैं इससे ज्यादा अभी कुछ नहीं कहना चाहता. मैंने निश्चित रूप से इस्तीफा दे दिया है और अपना इस्तीफा उच्च कमान को भेज दिया है. जब भी मुझे आवश्यक लगेगा, मैं आपको फोन करके विस्तार से बात करूंगा.

उन्होंने आगे कहा था कि अखिल गोगोई ने मुझे बताया है कि उनके दरवाजे मेरे लिए खुले हैं. लुरिन गोगोई ने भी मुझे फोन किया. मुख्यमंत्री ने मुझे फोन नहीं किया...सीपीआई (एम) ने भी मुझे फोन किया. कांग्रेस उच्च कमान ने भी मुझे फोन किया. लेकिन यह कोई बड़ी बात नहीं है. आप मेरे इस्तीफे के बारे में थोड़ा बहुत जानते हैं; यह बात सभी जानते हैं. यह सब बेहाली से शुरू हुआ...मैंने पीसीसी प्रमुख से कहा है कि अगर कांग्रेस पार्टी यह भी तय नहीं कर सकती कि माजुली यात्रा में उन्हें अपने साथ कौन चाहिए, तो हमें पार्टी के भविष्य पर विचार करने की जरूरत है.

असम के सीएम ने इस्तीफे पर क्या कहा?

बोरा के इस्तीफे पर असम के सीएम का भी बयान आया था उन्होंने कहा था कि वह असम कांग्रेस पार्टी का आखिरी हिंदू नेता हैं, और वह उनसे मिलने शाम को उनके घर जाएंगे.

कौन हैं भूपेन कुमार बोरा?

भूपेन कुमार बोहरा असम के कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष थे. उन्होंने 2006 से 2016 तक बिहपुरिया का प्रतिनिधित्व किया और लगातार दो कार्यकाल में एमएलए रहे. भूपेन असम के लखीमपुर के रहने वाले हैं. भूपेन कुमार बोरा की राजनीतिक यात्रा छात्र जीवन से ही शुरू हो गई थी.

भूपेन कुमार बोरा का कैसा है राजनीतिक करियर?

उन्होंने नॉर्थ लखीमपुर कॉलेज और डिब्रूगढ़ विश्वविद्यालय से अपनी पढ़ाई पूरी की. छात्र राजनीति में वे नॉर्थ लखीमपुर कॉलेज स्टूडेंट्स यूनियन के उपाध्यक्ष रहे. इसके बाद वे डिब्रूगढ़ यूनिवर्सिटी पोस्टग्रेजुएट स्टूडेंट्स यूनियन के महासचिव भी चुने गए. आगे चलकर उन्होंने असम प्रदेश युवा कांग्रेस के अध्यक्ष के रूप में भी जिम्मेदारी संभाली. भूपेन कुमार बोरा पहली बार 2006 में बिहपुरिया विधानसभा क्षेत्र से असम विधानसभा के लिए चुने गए. इसके बाद 2011 में वे दोबारा इसी सीट से विधायक निर्वाचित हुए.

तरुण गोगोई के मुख्यमंत्री कार्यकाल के दौरान वे असम सरकार के प्रवक्ता और संसदीय सचिव भी रहे. साल 2013 में उन्हें अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी का सचिव नियुक्त किया गया. इसके बाद 2021 में उन्हें असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी का अध्यक्ष बनाया गया.

बोरा के इस्तीफे का असम चुनाव पर क्या पड़ता असर?

असम चुनाव करीब हैं और ऐसे में पार्टी से ऐसे शख्स का निकल जाना जिसकी जमीन पर पकड़ है काफी बड़ा नुकसान होता. इसके साथ ही इसका असर असम विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस के संगठन और मनोबल पर पड़ सकता था. वे लंबे समय तक प्रदेश अध्यक्ष रहे हैं और ऊपरी असम, खासकर बिहपुरिया क्षेत्र में उनकी राजनीतिक पकड़ मानी जाती है. ऐसे में उनके जाने से कार्यकर्ताओं में असंतोष बढ़ सकता था और विरोधी कांग्रेस में अंदरूनी कलह का मुद्दा उठाकर राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश कर सकते थे.

असम न्‍यूज
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