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'CM हिमंता के खिलाफ अनाप शनाप न बोलें कांग्रेस नेता', Assam कोर्ट का बड़ा आदेश, नोटिस जारी

असम की कामरूप मेट्रो कोर्ट ने कांग्रेस नेताओं को CM हिमंता बिस्वा सरमा और उनके परिवार के खिलाफ कथित जमीन घोटाले पर सार्वजनिक बयान देने से रोक लगा दी है. मुख्यमंत्री ने 500 करोड़ रुपये के मानहानि दावे के साथ केस दायर किया, अगली सुनवाई 9 मार्च को.

CM हिमंता के खिलाफ अनाप शनाप न बोलें कांग्रेस नेता, Assam कोर्ट का बड़ा आदेश, नोटिस जारी
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( Image Source:  ANI/facebook )

असम की राजनीति में बयानबाजी की गरमाहट अब अदालत तक पहुंच गई है. कामरूप मेट्रो की सिविल कोर्ट ने बड़ा आदेश देते हुए कांग्रेस नेताओं को सख्त चेतावनी दी है कि वे हिमंता बिस्वा सरमा के खिलाफ अनाप-शनाप या बदनाम करने वाले बयान देने से परहेज करें. अदालत ने अंतरिम रोक लगाते हुए संबंधित नेताओं को नोटिस जारी किया है और पूछा है कि यह रोक स्थायी क्यों न की जाए.

यह मामला उस प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद सामने आया, जिसमें कांग्रेस नेताओं ने मुख्यमंत्री और उनके परिवार के कथित जमीन स्वामित्व को लेकर आरोप लगाए थे. अब अदालत के हस्तक्षेप के बाद राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप कानूनी दायरे में आ गए हैं, और 9 मार्च की अगली सुनवाई पर सबकी नजर टिकी है.

असम कोर्ट का फैसला क्या है?

हिमंता बिस्वा सरमा के खिलाफ कथित जमीन खरीद मामले में बयानबाजी पर असम की कामरूप (मेट्रो) कोर्ट ने अंतरिम रोक लगा दी है. कामरूप (मेट्रो) स्थित सिविल जज (सीनियर डिवीजन) नयन ज्योति सरमा की अदालत ने कांग्रेस नेताओं को स्पष्ट निर्देश दिया है कि वे मुख्यमंत्री और उनके परिवार के खिलाफ कथित जमीन स्वामित्व को लेकर बदनाम करने वाले बयान न दें. ऐसा करने पर कार्रवाई की जाएगी.

मामला क्या है?

हाल ही में कांग्रेस नेताओं ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर आरोप लगाया था कि मुख्यमंत्री ने अपनी पत्नी और परिजनों के नाम पर बड़ी मात्रा में जमीन खरीदी है. इन आरोपों के बाद अखबारों में खबरें प्रकाशित हुईं. मुख्यमंत्री की ओर से अदालत में कहा गया कि ये आरोप झूठे, दुर्भावनापूर्ण और प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने वाले हैं.

किन नेताओं के खिलाफ कार्रवाई?

कारुप कोर्ट का आदेश कांग्रेस नेता गौरव गोगोई समेत अन्य के खिलाफ दायर मुकदमे पर आया है. साथ ही दो स्थानीय अखबारों को भी इस मामले में पक्षकार बनाया गया है.

कोर्ट ने क्या कहा?

सीनियर जज नयन ज्योति सरमा नेने अपने आदेश में कहा कि अगर अंतरिम रोक नहीं लगाई गई तो 'न्याय खत्म होने की आशंका' और कई कार्यवाहियों की संभावना बन सकती है. कोर्ट ने संबंधित नेताओं को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए पूछा है कि अंतरिम रोक को स्थायी क्यों न किया जाए. अगली सुनवाई 9 मार्च को निर्धारित की गई है.

500 करोड़ का हर्जाना क्यों?

मुख्यमंत्री ने कांग्रेस नेताओं के खिलाफ 500 करोड़ रुपये के मानहानि दावे के साथ मुकदमा दायर किया था. उनका आरोप है कि प्रेस कॉन्फ्रेंस में लगाए गए आरोप न सिर्फ राजनीतिक बल्कि व्यक्तिगत प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने वाले हैं.

कोर्ट के फैसले के कानूनी और राजनीतिक मायने क्या हैं?

यह मामला सिर्फ बयानबाजी बनाम मानहानि का नहीं, बल्कि राजनीतिक आरोपों की कानूनी सीमा तय करने का भी है. अगर कोर्ट अंतरिम रोक को स्थायी रूप देता है, तो यह भविष्य में राजनीतिक प्रेस कॉन्फ्रेंस और आरोपों की भाषा पर भी असर डाल सकता है.

इस मामले में आगे क्या?

कामरुप कोर्ट का आदेश आने के बाद अब सबकी नजर 9 मार्च की सुनवाई पर है. क्या कांग्रेस नेता अपने आरोपों के समर्थन में सबूत पेश करेंगे या मामला समझौते की ओर बढ़ेगा? राजनीति और कानून के इस टकराव में अगला कदम तय करेगा कि सार्वजनिक जीवन में आरोप लगाने की सीमा क्या होगी.

असम न्‍यूजहिमंत बिस्वा सरमा
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