चीन को होश में लाने वाले कुमार भास्कर वर्मा कौन? अचानक क्यूं हुई चर्चा- कैसे बदलेगी गुवाहाटी की कनेक्टिविटी- Detailed
असम में ब्रह्मपुत्र नदी पर तैयार हुआ Kumar Bhaskar Varma Setu गुवाहाटी और आसपास के इलाकों की कनेक्टिविटी को नई रफ्तार देगा. यह सेतु ट्रैफिक जाम, लंबी दूरी और समय की बर्बादी को कम कर आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा देगा.;
असम की लाइफलाइन कही जाने वाली Brahmaputra River पर बना कुमार भास्कर वर्मा सेतु अब गुवाहाटी की ट्रांसपोर्ट तस्वीर बदलने जा रहा है. 'भास्कर वर्मन: महान असमिया सम्राट' पुस्तक के लेखक महाश्वेता डे के मुताबिक कुमार भास्कर वर्मा वही राजा हैं, जिन्होंने अपने शासनकाल में चीन के सामने बड़ी चुनौती पेश कर उसके विस्तारवादी नीति पर लगाई थी. उन्हीं के नाम पर इस सेतु का नाम रखा गया है. जहां पहले 45 मिनट का सफर ट्रैफिक और लंबी डायवर्जन के कारण थका देता था, वहीं अब यह दूरी महज 10 मिनट में पूरी हो सकेगी. यह सिर्फ एक पुल नहीं, बल्कि इंफ्रास्ट्रक्चर की बड़ी छलांग है, जो Guwahati को राज्य और पूर्वोत्तर भारत के अन्य हिस्सों से और तेज, सुरक्षित और मजबूत तरीके से जोड़ेगा.
सरकार का दावा है कि इस सेतु के शुरू होने से न केवल ट्रैफिक का दबाव कम होगा, बल्कि व्यापार, पर्यटन और औद्योगिक गतिविधियों को भी बड़ा बूस्ट मिलेगा. खासतौर पर नॉर्थ गुवाहाटी और साउथ गुवाहाटी के बीच आवाजाही अब आसान हो जाएगी. इंफ्रास्ट्रक्चर विशेषज्ञों के अनुसार, यह परियोजना असम के शहरी विकास और क्षेत्रीय संतुलन में गेमचेंजर साबित हो सकती है.
कौन थे कुमार भास्कर वर्मा?
Bhaskaravarman (अक्सर “कुमार भास्कर वर्मा” कहा जाता है) 7वीं शताब्दी के शक्तिशाली शासक थे, जिन्होंने प्राचीन कामरूप राज्य (आज का असम और आसपास का क्षेत्र) पर शासन किया था. वे वर्मन वंश के अंतिम प्रमुख राजा माने जाते हैं और असम के इतिहास में सांस्कृतिक-राजनीतिक उन्नति के लिए याद किए जाते हैं. भास्करवर्मन ने उत्तर भारत के सम्राट Harsha से रणनीतिक मित्रता की थी. यह गठजोड़ पूर्वोत्तर और उत्तर भारत के बीच राजनीतिक संतुलन और सांस्कृतिक संपर्क का बड़ा आधार बना.
भास्करवर्मन के शासनकाल में शिक्षा, धर्म और कला को संरक्षण मिला था. कामरूप उस समय पूर्वोत्तर भारत का एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक केंद्र बना. प्रशासनिक दक्षता और कूटनीतिक सूझबूझ ने राज्य को स्थिरता दी. असम में उनके नाम पर बने Kumar Bhaskar Varma Setu जैसे ढांचागत प्रोजेक्ट सिर्फ विकास के प्रतीक नहीं, बल्कि क्षेत्र के गौरवशाली इतिहास से जुड़ाव का संकेत भी हैं. यानी अतीत की विरासत और वर्तमान की प्रगति का संगम.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार को ब्रह्मपुत्र नदी पर बने कुमार भास्कर वर्मा सेतु का उद्घाटन किया. यह केवल एक पुल नहीं, बल्कि असम के ट्रांसपोर्ट सिस्टम में एक नया अध्याय जोड़ने जा रही है. अधिकारियों के मुताबिक, इसके शुरू होते ही गुवाहाटी और नॉर्थ गुवाहाटी के बीच आवागमन की तस्वीर पूरी तरह बदल जाएगी. फिलहाल दोनों किनारों के बीच सफर में 45 मिनट से लेकर एक घंटे तक का समय लग जाता है, लेकिन नया पुल इस दूरी को महज 7 से 10 मिनट में तय करने लायक बना देगा.
कितनी आई लागत?
करीब 3,000 करोड़ रुपये की लागत से तैयार किया गया यह पुल लगभग 1.24 किलोमीटर लंबा है. यह ब्रह्मपुत्र जैसी चुनौतीपूर्ण नदी पर बना असम का सबसे अहम ढांचा माना जा रहा है. छह लेन वाला यह सेतु पूर्वोत्तर भारत का पहला एक्स्ट्राडोज्ड ब्रिज है, जिसमें आधुनिक इंजीनियरिंग तकनीक और दीर्घकालिक मजबूती को प्राथमिकता दी गई है. परियोजना को अंजाम देने वाली कंपनी SPS Construction India ने इसे इंजीनियरिंग के लिहाज से एक बड़ी उपलब्धि बताया है. कंपनी के निदेशक रोहित सिंगला के अनुसार, यह पुल असम के दीर्घकालिक परिवहन नेटवर्क को मजबूती देगा और आने वाले दशकों तक इसका असर दिखेगा.
डिजाइन और निर्माण की खासियत क्या है?
साधारण सस्पेंशन ब्रिज के बजाय एक्स्ट्राडोज्ड डिजाइन अपनाने से पुल की मजबूती और टिकाऊपन बढ़ा है. ब्रह्मपुत्र के चौड़े पाट और बदलते जलस्तर को ध्यान में रखते हुए इसकी योजना बनाई गई. निर्माण कार्य के दौरान सुरक्षा मानकों, गुणवत्ता नियंत्रण और पर्यावरणीय नियमों पर विशेष ध्यान दिया गया. नदी की तेज धारा और मौसमी बदलावों के बावजूद परियोजना को तय समय सीमा में पूरा करना प्रशासन और इंजीनियरों के लिए बड़ी चुनौती थी.
इसे क्यों माना जाता है क्रांतिकारी बदलाव?
यह पुल गुवाहाटी को सीधे नॉर्थ गुवाहाटी से जोड़ता है और राज्य के प्रमुख ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर का हिस्सा बनेगा. इसके चालू होने से शहर के अंदर ट्रैफिक का दबाव कम होगा, रोजाना यात्रा करने वालों को समय और ईंधन की बचत होगी और मालवाहक गाड़ियों और लंबी दूरी के यात्रियों के लिए रास्ता आसान होगा. अधिकारियों का कहना है कि इससे नॉर्थ गुवाहाटी में स्थित राष्ट्रीय संस्थानों और सांस्कृतिक स्थलों तक पहुंच भी तेज होगी. सरकार इसे नॉर्थ गुवाहाटी को “ट्विन सिटी” के रूप में विकसित करने की दिशा में बड़ा कदम मान रही है.
क्षेत्रीय विकास पर कितना पड़ेगा असर?
राज्य सरकार के अनुसार, यह परियोजना केवल यातायात सुधार तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि आर्थिक और शहरी विकास को भी गति देगी. ब्रह्मपुत्र के दोनों किनारों के बीच मजबूत संपर्क बनने से :
- व्यापार और निवेश को बढ़ावा मिलेगा
- रियल एस्टेट और शहरी विस्तार को नया आधार मिलेगा
- पूर्वोत्तर राज्यों के बीच आवागमन और आसान होगा
- अधिकारियों का मानना है कि आने वाले वर्षों में यह पुल असम ही नहीं, पूरे पूर्वोत्तर क्षेत्र के लिए रणनीतिक रूप से अहम ढांचा बन जाएगा.
- कुमार भास्कर वर्मा सेतु ब्रह्मपुत्र पर बना सिर्फ एक पुल नहीं, बल्कि असम की भविष्य की अर्थव्यवस्था और शहरी विकास की रीढ़ बनने जा रहा है. यात्रा के समय में भारी कमी, आधुनिक इंजीनियरिंग और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी - तीनों मिलकर इसे पूर्वोत्तर भारत की सबसे महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं में शामिल कर देते हैं.