क्या यूपी के बाद असम में भी फॉर्म-7 बना विलेन? वोटर्स लिस्ट में कम हो गए 2.43 लाख मतदाता
असम में 2.43 लाख लोगों के नाम वोटर लिस्ट से हट गए हैं. इसके लिए फॉर्म-7 को एक बड़ा फैक्टर माना जा रहा है. यूपी में भी फॉर्म-7 को लेकर काफी विवाद हुआ था.;
Assam Final Voter List: असम में विशेष मतदाता पुनरीक्षण (Special Revision) को लेकर फैले विवाद और राजनीतिक बयानबाज़ी के बीच बुधवार को असम के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) अनुराग गोयल का बयान आया है. उन्होंने जानकारी दी है कि फाइनल लिस्ट के आंकड़े बूथ लेवल अधिकारियों (BLO) के जरिए घर-घर सर्वे के दौरान जुटाए गए नतीजों से काफी हद तक मेल खाते हैं. इसके साथ ही फॉर्म-7 को लेकर भी असम में काफी विवाद देखने को मिल रहा है.
मंगलवार को पब्लिश अंतिम सूची में दिसंबर में जारी लिस्ट की तुलना में कुल 2.43 लाख मतदाताओं की कमी दर्ज की गई है. सीईओ कार्यालय के आंकड़ों के मुताबिक, दावे और आपत्तियों की प्रक्रिया के दौरान नए मतदाताओं को जोड़ने के लिए कुल 7.6 लाख फॉर्म-6 आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें से 5.86 लाख को कबूल किया गया.
फॉर्म-7 पर क्यों है सबसे ज्यादा विवाद?
वोटर लिस्ट से नाम हटाने के लिए इस्तेमाल होने वाले फॉर्म-7 आवेदन इस प्रक्रिया का सबसे विवादित हिस्सा रहे. इनका इस्तेमाल किसी मतदाता की मौत, गैर मौजूदगी होने या स्थायी तौर पर शिफ्ट होने के आधार पर नाम हटाने के लिए किया जाता है.
गोयल ने बताया कि कई जगहों पर बड़ी संख्या में एक साथ (बल्क में) आवेदन दायर किए गए थे. ऐसे मामलों में निर्वाचन पंजीकरण अधिकारियों (ERO) को यह सत्यापित करने का अधिकार दिया गया कि आवेदन वैध हैं या नही.
कितने फॉर्म-7 आवेदन मिले?
इस दौरान उन्होंने कहा कि कई मामले ऐसी भी सामने आए जहां एप्लीकेंट्स को यह तक नहीं पता था कि उनके ईपीसी नंबर के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई गई है. सीईओ के आंकड़ों के मुताबिक, कुल 12.97 लाख फॉर्म-7 के आवेदन प्राप्त हुए. इनमें से 1.9 लाख को खारिज किया गया, 10.63 लाख को स्वीकार किया गया और 43,536 आवेदन अभी भी लंबित हैं.
इसके अलावा, मतदाता सूची में विवरण सुधारने के लिए 15.36 लाख फॉर्म-8 आवेदन मिले, जिनमें से 13.46 लाख स्वीकार किए गए.
यूपी में भी फॉर्म-7 को लेकर विवाद
उत्तर प्रदेश में विशेष गहन मतदाता सूची संशोधन (SIR) के दौरान फॉर्म-7 को लेकर बड़ा विवाद हुआ था. वहां विपक्षी दलों ने आरोप लगाया कि फॉर्म-7 का दुरुपयोग कर भाजपा कार्यकर्ताओं ने दलित, पिछड़े और अल्पसंख्यक समुदाय के मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाने की कोशिश की, जिससे कुछ क्षेत्रों में वोटिंग अधिकार प्रभावित हो सकते हैं. विपक्षी नेताओं का कहना था कि कुछ गांवों में फॉर्म-7 के प्री-प्रिंटेड फॉर्म अलग-अलग व्यक्तियों के नाम पर जमा कराए गए और बिना उनके ज्ञान के उनके नाम हटाने के लिए आवेदन किया गया.
कितने नाम हटे और कितने जुड़े?
इन आंकड़ों के मुताबिक, कुल 10.63 लाख एंट्रीज़ वोटर लिस्ट से हटाई गईं. इसमें वे लोग भी शामिल हैं जिनका नाम एक मतदान केंद्र से हटाकर दूसरे स्थान पर स्थानांतरित किया गया. वहीं, 5.86 लाख नए मतदाता लिस्ट में जोड़े गए. गोयल ने कहा कि अंतिम जोड़ और हटाए गए नाम घर-घर सर्वे के दौरान BLO के जरिए किए गए आकलन से बहुत अलग नहीं हैं.
BLO के जरिए घर-घर जाकर किए गए सत्यापन में क्या मिला?
- 4.78 लाख से अधिक मतदाताओं के नाम मृत्यु के कारण हटाए जाने लायक थे.
- 5.23 लाख मतदाता अपने पंजीकृत स्थान से स्थानांतरित हो चुके थे
- 53,619 नाम डुप्लीकेट पाए गए
- 6.27 लाख ऐसे लोग थे जो 18 साल से अधिक आयु के थे और लिस्ट में शामिल नहीं थे.
- 1.46 लाख संभावित मतदाता 17 वर्ष से अधिक आयु के पाए गए.
पिछले नवंबर में ऐलान किया था कि 2026 में चुनाव वाले अन्य राज्यों से अलग, असम में राष्ट्रीय नागरिक पंजी (NRC) प्रक्रिया अभी अंतिम निष्कर्ष तक नहीं पहुंची है. इसी कारण यहां विशेष पुनरीक्षण (SR) प्रक्रिया लागू की गई. सीईओ अधिकारियों ने इसे सालाना रिव्यू का रिवाइज़्ड वर्जन बताया, जिसमें अतिरिक्त सख्ती के तौर पर BLO के जरिए घर-घर सत्यापन को जोड़ा गया.