बंदूक, ‘नो मर्सी’ और स्कलकैप… AI वीडियो बना बारूद, CM हिमंता को दिखाया बंदूक चलाते हुए, विपक्ष बोला - ये नरसंहार का संदेश है
असम बीजेपी ने एक वीडियो शेयर किया और फिर विवाद के बाद उसे हटा लिया. इस वीडियो में असम के सीएम बंदूक से जालीदार टोपी वाले एक शख्स की तरफ निशाना लगाते दिख रहे हैं.;
Assam: असम बीजेपी के आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट से पोस्ट किया गया एक AI-जनरेटेड वीडियो राज्य की राजनीति में भूचाल ले आया है. इस वीडियो में मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा को हाथ में बंदूक लिए दीवार पर टंगी तस्वीरों पर गोली चलाते हुए दिखाया गया, जिसके बाद विपक्षी दलों ने इसे नफरत फैलाने वाला और ‘नरसंहार का संकेत’ करार दिया है. विवाद बढ़ने पर पार्टी ने वीडियो को अपने X (पूर्व में ट्विटर) अकाउंट से हटा दिया.
शनिवार को पोस्ट किए गए इस वीडियो का कैप्शन था - “Point Blank Shot”. वीडियो में मुख्यमंत्री को निशाना साधते हुए दिखाया गया, जिन तस्वीरों पर “No Mercy” लिखा हुआ था. इन तस्वीरों में कुछ लोग जालीदार टोपी (स्कलकैप) पहने नजर आते हैं, जिनमें से एक चेहरा कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई से मिलता-जुलता बताया जा रहा है.
वीडियों में क्या है?
वीडियो के अंतिम हिस्से में मुख्यमंत्री को एक गनमैन जैसी स्टाइलिंग में पेश किया गया और स्क्रीन पर संदेश उभर रहे हैं-
“No mercy to Bangladeshis”,
“Why did you go to Pakistan?”,
“Foreigner-free Assam”.
इन शब्दों और दृश्यों को लेकर सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली. आलोचना इतनी तेज हुई कि असम बीजेपी को कुछ ही घंटों के भीतर वीडियो हटाना पड़ा.
कांग्रेस ने पूछा, यह नरसंहार का प्रचार नहीं तो और क्या है?
सबसे तीखी प्रतिक्रिया कांग्रेस की ओर से आई. पार्टी महासचिव केसी वेणुगोपाल ने कहा कि इसे मजाक या ट्रोल कंटेंट कहकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. उन्होंने आरोप लगाया कि यह वीडियो सीधे तौर पर सामूहिक हिंसा को बढ़ावा देता है. कांग्रेस ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि यह सामग्री अल्पसंख्यकों की “पॉइंट-ब्लैंक हत्या” को महिमामंडित करती है और समाज में हिंसा को सामान्य बनाने का प्रयास करती है. पार्टी ने इसे फासीवादी राजनीति का उदाहरण बताया.
कांग्रेस नेता सुप्रिया श्रीनेत ने कहा कि सिर्फ वीडियो हटाना काफी नहीं है. उनके मुताबिक इसमें मुख्यमंत्री को मुस्लिम पुरुषों जैसे दिखने वाले चेहरों पर गोली चलाते दिखाया गया है और “POINT BLANK SHOT” जैसे शब्दों का प्रयोग कर हिंसा को प्रतीकात्मक रूप से सही ठहराया गया है. उन्होंने सवाल उठाया कि जब राजनीतिक दल इस स्तर तक गिर चुके हैं, तब क्या संवैधानिक संस्थाएं मूकदर्शक बनी रहेंगी?
TMC और वाम दलों ने असम बीजेपी के वीडियो पर क्या कहा?
तृणमूल कांग्रेस ने इस वीडियो को “सामूहिक हत्या के लिए अप्रत्यक्ष हरी झंडी” बताया. पार्टी का आरोप है कि बीजेपी डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल कर जानबूझकर सांप्रदायिक ध्रुवीकरण को हवा दे रही है. भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) ने भी इसे जातीय सफाए और नरसंहार का खुला संदेश करार दिया. माकपा ने कहा कि असम सरकार घुसपैठियों के मुद्दे की आड़ में मुसलमानों के खिलाफ शत्रुता को वैध ठहराने की कोशिश कर रही है. पार्टी ने सुप्रीम कोर्ट से तत्काल हस्तक्षेप की मांग करते हुए चेतावनी दी कि इस तरह की सामग्री राज्य के सामाजिक ताने-बाने को गंभीर नुकसान पहुंचा सकती है.
बीजेपी प्रवक्ताओं ने साधी चुप्पी
वीडियो हटाए जाने के बाद असम बीजेपी के प्रवक्ता रंजीब कुमार सरमा ने टिप्पणी करने से इनकार करते हुए कहा कि अब इस पर कुछ कहने को नहीं है क्योंकि पोस्ट डिलीट कर दी गई है. वहीं पार्टी के सोशल मीडिया संयोजक बिस्वजीत खौंड ने भी कोई ठोस जवाब नहीं दिया और केवल इतना कहा कि डिजिटल टीम में कई युवा सदस्य काम करते हैं. इससे विवाद और गहरा गया क्योंकि यह स्पष्ट नहीं किया गया कि वीडियो बनाने और पोस्ट करने की जिम्मेदारी किसकी थी.
असम बीजेपी का सोशल मीडिया हैंडल पहले भी रहा है विवादित
यह मामला इसलिए भी गंभीर हो गया है क्योंकि असम बीजेपी का सोशल मीडिया हैंडल पहले भी विवादों में रह चुका है. पिछले साल इसी अकाउंट से एक AI-निर्मित वीडियो साझा किया गया था, जिसमें बीजेपी के बिना असम को अराजक और भयावह राज्य के रूप में दिखाया गया था. उस वीडियो को अदालत में चुनौती दी गई थी, जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने नोटिस जारी कर पोस्ट हटाने का आदेश दिया था. अब एक बार फिर AI आधारित राजनीतिक प्रचार पर सवाल उठने लगे हैं कि क्या तकनीक का इस्तेमाल डर और घृणा फैलाने के लिए किया जा रहा है.
चुनाव आयोग और न्यायिक जांच की मांग तेज
इस विवाद के बाद विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग से हस्तक्षेप, एफआईआर दर्ज करने और न्यायिक जांच की मांग शुरू कर दी है. उनका कहना है कि यह वीडियो न केवल संवैधानिक मूल्यों के खिलाफ है बल्कि समाज में हिंसा और नफरत को सामान्य बनाने की खतरनाक प्रवृत्ति को दर्शाता है. विपक्ष का आरोप है कि AI और डिजिटल माध्यमों के जरिए राजनीतिक दल लोकतांत्रिक विमर्श को कमजोर कर रहे हैं और अल्पसंख्यकों के खिलाफ भय का वातावरण बनाया जा रहा है.
AI प्रचार पर नई बहस
इस पूरे घटनाक्रम ने राजनीतिक संचार में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के इस्तेमाल की सीमाओं पर नई बहस छेड़ दी है. विशेषज्ञों का कहना है कि चुनावी राजनीति में AI के बढ़ते प्रयोग के बीच स्पष्ट नियम और जवाबदेही तय करना जरूरी हो गया है, ताकि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सामाजिक सौहार्द दोनों की रक्षा हो सके. फिलहाल यह वीडियो भले ही हटा दिया गया हो, लेकिन इसने असम की राजनीति में ऐसा विस्फोटक सवाल छोड़ दिया है- क्या डिजिटल प्रचार अब लोकतंत्र का हथियार है या नफरत फैलाने की मशीन?