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परीक्षा पे चर्चा में गमोसा, राहुल गांधी विवाद के बाद असम की पहचान को लेकर पीएम मोदी क्‍या दे गए संदेश?

परीक्षा पे चर्चा कार्यक्रम में छात्रों के कंधों पर गमोसा दिखाई देना प्रतीकात्मक माना जा रहा है. इसे राहुल गांधी विवाद और असम चुनाव से जोड़कर देखा जा रहा है.

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( Image Source:  ANI )
रूपाली राय
Edited By: रूपाली राय

Updated on: 6 Feb 2026 4:30 PM IST

असम पारंपरिक गमछा यानी गमोसा एक बार फिर चर्चा में है. वजह है पीएम मोदी की परीक्षा पे चर्चा कार्यक्रम. शुक्रवार 6 फरवरी को परीक्षा पे चर्चा कार्यक्रम के दौरान पीएम के साथ दिख रहे सभी बच्‍चों के कंधों पर गमोसा था. बता दें कि पिछले दिनों राहुल गांधी के गमोसा न पहने पर जमकर विवाद हुआ था जिसके बाद गमोसा चर्चा में आ गया था.

नॉर्थ-ईस्ट में गमोसा की वही सामाजिक और सांस्कृतिक हैसियत है, जो पंजाब में पगड़ी, तमिलनाडु में वेष्टी और उत्तर भारत में साफा की मानी जाती है. यही वजह है कि राहुल गांधी द्वारा गमोसा न पहनने की घटना सिर्फ एक तस्वीर या क्षणिक दृश्य तक सीमित नहीं रही, बल्कि यह सम्मान, पहचान और अस्मिता से जुड़ा राजनीतिक मुद्दा बन गई. बता दें कि असम में इसी साल विधानसभा चुनाव भी होने हैं. अब परीक्षा पे चर्चा के दौरान गमोसा के इस्‍तेमाल को इससे भी जोड़कर देखा जा रहा है.

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गमोसा क्या है?

‘गमोसा’ (Gamusa/Gamosa) असम और नॉर्थ-ईस्ट की सांस्कृतिक पहचान का सबसे प्रमुख प्रतीक माना जाता है. यह आमतौर पर सफेद रंग का सूती कपड़ा होता है, जिसके दोनों किनारों पर पारंपरिक लाल डिजाइन बने होते हैं. असमिया समाज में गमोसा को पवित्रता, सम्मान, आशीर्वाद और स्वागत का प्रतीक माना जाता है. बिहू पर्व, धार्मिक अनुष्ठान, विवाह समारोह, सामाजिक कार्यक्रम या किसी विशिष्ट अतिथि के सम्मान में गमोसा पहनाना या ओढ़ाना परंपरागत आदर-सम्मान की अभिव्यक्ति है.

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बच्‍चों को पीएम मोदी ने क्‍या दी सीख?

बात करें परीक्षा पे चर्चा की तो हर साल की तहर इस बार भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस कार्यक्रम के तहत देशभर के छात्रों से संवाद किया और उन्हें परीक्षा के तनाव से न घबराने की सलाह दी. उन्होंने कहा कि हर छात्र की पढ़ाई करने की अपनी अलग शैली होती है और उसी पैटर्न पर भरोसा बनाए रखना सबसे जरूरी है. पीएम मोदी ने छात्रों से कहा, “मैं प्रधानमंत्री बन गया हूं, फिर भी लोग मुझे अलग-अलग तरीके से काम करने की सलाह देते रहते हैं. लेकिन हर व्यक्ति का अपना एक पैटर्न होता है. कोई सुबह पढ़ना पसंद करता है, कोई रात में. जो तरीका आपको सूट करता है, उस पर पूरा भरोसा रखिए.” उन्होंने यह भी कहा कि दूसरों की सलाह जरूर सुननी चाहिए, लेकिन उसे आंख मूंदकर अपनाने के बजाय अपनी जीवन-शैली में तभी शामिल करें जब वह सच में लाभदायक लगे. “मैंने भी अपनी जिंदगी में कुछ बदलाव किए हैं, लेकिन अपने मूल पैटर्न को कभी नहीं छोड़ा,” पीएम मोदी ने कहा.

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शिक्षक और लक्ष्य को लेकर क्या बोले पीएम मोदी?

प्रधानमंत्री ने शिक्षकों की भूमिका पर भी बात की. उन्होंने कहा कि शिक्षक का प्रयास ऐसा होना चाहिए कि छात्र की गति से एक कदम आगे रहकर उसे दिशा दी जाए. उन्होंने कहा, “हमारा लक्ष्य ऐसा होना चाहिए जो पहुंच में हो, लेकिन इतना आसान भी न हो कि बिना मेहनत के हासिल हो जाए.'

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मानसिक स्वास्थ्य पर विशेष जोर

इस साल ‘परीक्षा पे चर्चा’ को पहले से ज्यादा व्यापक रूप में आयोजित किया गया, जिसमें छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य और बाल-केंद्रित शिक्षा पर विशेष जोर दिया गया. यह कार्यक्रम अब ‘एग्जाम वॉरियर्स’ अभियान का हिस्सा बन चुका है, जिसका उद्देश्य बच्चों के लिए तनाव-मुक्त माहौल तैयार करना है.

नरेंद्र मोदी
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