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बच्चे की ये आदतें देती हैं इशारा, ऐसे पहचानें कहीं आपका बच्चा तो नहीं हो रहा Child Abuse का शिकार

कई बार बच्चा खुलकर नहीं बता पाता कि उसके साथ कुछ गलत हो रहा है, लेकिन उनका बिहेवियर बहुत कुछ कह जाता है. अचानक चिड़चिड़ापन, किसी खास व्यक्ति से डरना, अजीब सवाल पूछना या उम्र से परे बातें करना, ये सब साइन हो सकते हैं कि बच्चा किसी तरह के चाइल्ड अब्यूज का शिकार है.

child abuse
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( Image Source:  AI SORA )
हेमा पंत
Edited By: हेमा पंत

Updated on: 6 Feb 2026 12:14 PM IST

इन दिनों एपस्टीन फाइल्स को लेकर हर तरफ हल्ला मचा हुआ है. इस फाइल्स को लेकर ऐसे कई दावे किए जा रहे हैं, जिन्हें जान लोगों की रातों की नींद उड़ गई हैं. इस फाइल्स से कुछ फोटोज और वीडियोज वायरल हो रहे हैं, जिनमें छोटे बच्चे भी नजर आ रहे हैं. फोटोज देख साफ पता चल रहा है कि बच्चों के साथ अब्यूज किया गया है. चाइल्ड अब्यूज भी एक क्राइम है. ऐसे में पेरेंट्स को अपने बच्चों पर खास ध्यान देन चाहिए.

दरअसल, कई बार बच्चे खुद यह समझ ही नहीं पाते कि उनके साथ गलत हो रहा है, और डर, शर्म या धमकी की वजह से वे कुछ कह भी नहीं पाते हैं, लेकिन वह कुछ न कहें भी इशारा दे देते हैं.

क्या होता है चाइल्ड अब्यूज?

चाइल्ड अब्यूज यानी बाल शोषण, किसी बच्चे के साथ किया गया ऐसा फिजिकल, मेंटल या सेक्सुअल बिहेवियर है, जो इलीगल है. इसमें बच्चे को गलत तरीके से छूना, उसके सामने अश्लील हरकतें करना, उसे अश्लील तस्वीरें या वीडियो दिखाना, बच्चे से कपड़े उतरवाना, या किसी भी तरह की सेक्सुअल एक्टिविटी में शामिल करना आता है. इतना ही नहीं, इंटरनेट के जरिए भी बच्चों को बहकाना, उनसे अश्लील तस्वीरें मांगना या वीडियो कॉल पर गलत हरकतें करवाना भी चाइल्ड अब्यूज की कैटेगरी में आता है.

बच्चे अक्सर क्यों नहीं बताते?

  • ज्यादातर मामलों में बच्चे इसलिए चुप रहते हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि गलती उनकी है.
  • अक्सर उन्हें डराया या धमकाया गया होता है.
  • उन्हें ‘सीक्रेट’ रखने के लिए कहा जाता है.
  • इतना ही नहीं, कई मामलों में वह अपराधी व्यक्ति से इमोशनली जुड़े होते हैं.
  • उन्हें लगता है कि कोई उनकी बात पर विश्वास नहीं करेगा.

कैसे पहचानें आपका बच्चा है चाइल्ड अब्यूज का शिकार

यदि बच्चा अचानक चिड़चिड़ा, गुस्सैल या बहुत शांत हो जाए तो यह साइन हो सकता है.

  • बार-बार डरना या सहम जाना.
  • रात में बुरे सपने आना.
  • बिस्तर गीला करना (बेडवेटिंग)
  • लोगों से दूरी बनाना या बहुत चिपकू हो जाना.
  • किसी खास व्यक्ति से डरना या बचना.
  • अगर बच्चा किसी खास व्यक्ति के साथ अकेले जाने से कतराता है, उससे मिलने से बचता है या उसके नाम से ही डर जाता है, तो इसे हल्के में न लें. यह एक बड़ा साइन हो सकता है.
  • इसके अलावा, उम्र से परे सेक्सुअल बिहेवियर या भाषा का यूज.
  • छोटे बच्चे अगर सेक्स से जुड़े टॉपिक पर बात करने लगें, अश्लील शब्दों का इस्तेमाल करें या सेक्सुअल हरकतों की नकल करें, तो यह नॉर्मल नहीं है. यह इस बात का साइन हो सकता है कि उन्होंने कुछ गलत देखा या झेला है.

फिजिकल साइन से पहचानें

  • जननांगों या गुदा के आसपास दर्द या सूजन
  • चलने या बैठने में असहजता
  • बार-बार संक्रमण या चोट के निशान
  • किशोरियों में अनचाहा गर्भधारण
  • बच्चे सीधे-सीधे नहीं बताते, लेकिन ‘सीक्रेट’, ‘अजीब गेम’, या ‘किसी अंकल/आंटी’ के बारे में अधूरी बातें कर सकते हैं. इन संकेतों को गंभीरता से लें.

पेरेंट्स को क्या करना चाहिए?

  • ऐसे हालात में बच्चे से खुलकर बात करनी चाहिए. उन्हें डांटे नहीं.
  • पेरेंट्स को अपने बच्चों को भरोसा दिलाना चाहिए कि वह सेफ है.
  • अपने बच्चे की बात ध्यान से सुनें. उन्हें बोलते हुए बीच में न टोकें.
  • जरूरत पड़े तो डॉक्टर, काउंसलर या पुलिस से कॉन्टैक्ट करें.


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