‘2 रुपये’ से सियासत गर्म: ओवैसी पर बरसे हिमंता, यूजर बोले - दोनों ही तुष्टिकरण के उस्ताद!
ओवैसी के ‘2 रुपये’ बयान पर असम के सीएम हिमंता बिस्वा सरमा ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है. सोशल मीडिया पर यूजर्स ने दोनों नेताओं को तुष्टिकरण की राजनीति का मास्टर बताया.;
देश की सियासत में बयान कभी-कभी बारूद से ज्यादा असरदार साबित होते हैं. AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी के ‘2 रुपये’ वाले बयान ने ऐसा ही सियासी तूफान खड़ा कर दिया है. असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए इसे राजनीति का स्तर गिराने वाला बताया. वहीं सोशल मीडिया पर बहस और तेज हो गई, जहां कई यूजर्स ने दोनों नेताओं को ‘तुष्टिकरण की राजनीति’ का मास्टर करार दिया.
हिमंता बिस्वा सरमा ने क्या कहा?
एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी के दो रुपये देने वाले बयान के बयान पर असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने पलटवार किया है. उन्होंने तंजिया लहजे में कहा, "असम से हैदराबाद जाने में ज्यादा पैसा खर्चा होगा. अगर वो देना चाहते हैं तो मैं ले लूुगा. दो रुपये भी तो रुपया है. वो भी देना चाहते हैं तो दीजिए. असम के विकास में इस्तेमाल करूंगा, लेकिन वो दो रुपया कहां मिला? क्या मेरे पास आएगा पैसा? क्या बोला, हिमंता बिस्वा सरमा को दो रुपया दूंगा, मैं तो लेने के लिए तैयार हूं."
ओवैसी ने क्यों कहा - मैं 2 रुपये दूंगा?
इससे पहले एआईएमआईएम के प्रमख असदुद्दीन ओवैसी ने असम के सीएम की ओर से हाल ही जारी बयान कि अगर कोई मुसलमान ऑटो बैठकर ले जाए तो उसे पांच रुपये की जगह चार रुपये दो, पर कहा, "मैं असम के मुख्यमंत्री को 2 रुपये का चंदा देता हूं. एक जनसभा में शामिल लोगों से ने उन्होंने कहा कि किसी के पास दो रुपये हैं तो दो. अरे, दो रुपये हैं, किसी के पास तो दो. पब्लिक से दो रुपये ओवैसी को मिलता भी है. उसके बाद सीएम सरमा तू इतना गरीब आदमी है तो बोल, मैं तुझे देता हूं. असम का सीएम भिखारी है क्या?"
ओवैसी यहीं नहीं रुके, उन्होंने आगे सीएम का मजाक उड़ाते हुए कहा, "मैं आपको भिक्षा के रूप में 2 रुपये देना चाहता हूं." इसके अलावा, सीएम पर ओवैसी ने आरोप लगाते हुए सीएम पर पूर्वाग्रह प्रेरित होने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा, "संविधान कहता है कि सभी समान हैं. किसी के साथ भेदभाव नहीं होना चाहिए, चाहे वह मुख्यमंत्री हो या कोई और."
सोशल मीडिया पर क्यों भड़के यूजर?
सीएम हिमंत बिस्वा सरमा और ओवैसी का बयान सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर भी इसको लेकर बहस छिड़ गई है. कुछ यूजर्स ने लिखा - “दोनों ही तुष्टिकरण के मास्टर हैं, फर्क सिर्फ स्टाइल का है.” दूसरों ने इसे राजनीतिक ड्रामा बताते हुए कहा कि जनता असली मुद्दों पर जवाब चाहती है.
क्या है ‘तुष्टिकरण’ की राजनीति का आरोप?
भारतीय राजनीति में ‘तुष्टिकरण’ शब्द अक्सर वोट बैंक की राजनीति के संदर्भ में इस्तेमाल होता है. सियासी जानकारों के अनुसार इस तरह के आरोप चुनावी माहौल में ज्यादा तेज हो जाते हैं, जब हर बयान का राजनीतिक मतलब निकाला जाता है.