98 घंटे, 430 किमी और इतिहास! कहानी मनाली से लेह तक रनिंग में गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाने वाली सूफिया सूफी की

अजमेर की अल्ट्रा-रनर सूफिया सूफी ने मनाली से लेह तक हाई-एल्टीट्यूड रूट को 98 घंटे 27 मिनट में पूरा कर गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया है. पांच ऊंचे हिमालयी दर्रों और 8500 मीटर से ज्यादा चढ़ाई वाली इस दौड़ को दुनिया की सबसे कठिन चुनौतियों में गिना जाता है.;

इंडियन अल्ट्रा-रनर सूफिया सूफी(Image Source:  instagram.com/sufiyasufirunner )
By :  अच्‍युत कुमार द्विवेदी
Updated On : 7 Feb 2026 4:17 PM IST

Sufiya Sufi Guinness World Record: भारत की अल्ट्रा-डिस्टेंस रनर सूफिया सूफी ने एक बार फिर दुनिया को दिखा दिया कि इंसानी हौसले की कोई सीमा नहीं होती. राजस्थान के अजमेर जिले की रहने वाली सूफिया सूफी ने मनाली से लेह तक के बेहद कठिन हाई-एल्टीट्यूड रूट पर सबसे तेज़ दौड़ पूरी कर गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया है. अब इस ऐतिहासिक उपलब्धि को आधिकारिक तौर पर मान्यता मिल गई है. गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड का सर्टिफिकेट उन्हें मिल चुका है.

सूफिया ने मनाली से लेह तक लगभग 430–480 किलोमीटर की दूरी को महज 98 घंटे 27 मिनट में पूरा किया. इस दौरान उन्होंने हिमालय के पांच खतरनाक और ऊंचे दर्रों, रोहतांग ला, बारालाचा ला, नकी ला, लाचुलुंग ला और तंगलांग ला , को पार किया. इस रूट में कुल 8500 मीटर से ज्यादा की चढ़ाई शामिल थी, जहां कई जगहों पर ऑक्सीजन का स्तर समुद्र तल के मुकाबले सिर्फ 40 फीसदी तक रह जाता है.

 

रनर सूफिया सूफी

2023 में पूरी हुई थी दौड़, फिर सर्टिफिकेट अब क्यों जारी हुआ?

यह दौड़ 31 अगस्त 2023 को पूरी हुई थी, लेकिन लंबी जांच प्रक्रिया और औपचारिकताओं के बाद फरवरी 2026 में सूफिया को गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड का आधिकारिक प्रमाण पत्र मिला. सूफिया ने सोशल मीडिया पर मज़ाकिया अंदाज़ में लिखा कि “मैंने पहाड़ों को चार दिन से कम समय में पार कर लिया, लेकिन सर्टिफिकेट को मुझ तक पहुंचने में दो साल लग गए.”

इंडियन अल्ट्रा-रनर सूफिया सूफी

 

मनाली-लेह हाइवे पर दौड़ना क्यों हैं चैलेंजिंग?

मनाली-लेह हाईवे को दुनिया के सबसे चुनौतीपूर्ण रास्तों में गिना जाता है. यहां मौसम मिनटों में बदल जाता है. कभी तेज धूप, तो कभी बर्फीली हवाएं. रात में तापमान शून्य से नीचे चला जाता है और कई किलोमीटर तक कोई आबादी नहीं होती. ऐसे हालात में लगातार दौड़ना शारीरिक से ज्यादा मानसिक परीक्षा बन जाता है.

क्या सूफिया के लिए आसान था सफर?

सूफिया के लिए यह सफर आसान नहीं था. रन के दौरान उन्हें पेट में संक्रमण हो गया था, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और दौड़ पूरी की. इससे पहले 2021 में यह रूट 156 घंटे में पूरा किया गया था, जिसे बाद में एक अन्य रनर ने 100 घंटे से ज्यादा समय में पूरा कर नया रिकॉर्ड बनाया. तभी सूफिया ने ठान लिया था कि वह दोबारा दौड़ेंगी और 100 घंटे से कम समय में यह चुनौती पूरी करेंगी... और उन्होंने ऐसा कर दिखाया.

2019 में छोड़ी केबिन क्रू की नौकरी

सूफिया का सफर फिटनेस से शुरू होकर रिकॉर्ड तक पहुंचा. वह पहले एयरलाइन में केबिन क्रू और ग्राउंड हैंडलिंग ऑफिसर के तौर पर काम करती थीं. 1 अगस्त 1985 को जन्मी सूफिया के पिता का नाम रफीक अहमद और मां का नाम शहनाज खान हैं. सूफिया ने महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय, अजमेर से ग्रेजुएशन किया. 2008 में दिल्ली जाकर एविएशन कोर्स किया और 2009 में दिल्ली एयरपोर्ट पर ग्राउंड हैंडलिंग ऑफिसर की नौकरी मिली, लेकिन 2019 में उन्होंने नौकरी छोड़कर खुद को पूरी तरह रनिंग को समर्पित कर दिया.

सूफिया के नाम क्या पहले भी कोई रिकॉर्ड दर्ज है?

सूफिया के नाम पहले से ही कई बड़े रिकॉर्ड दर्ज हैं. वह कश्मीर से कन्याकुमारी (4000 किमी) दौड़ पूरी करने वाली सबसे तेज महिला रही हैं. गोल्डन क्वाड्रिलैटरल (6000 किमी) रन को वह रिकॉर्ड समय में पूरा कर चुकी हैं. इसके साथ ही, सूफिया कतर की पूरी लंबाई दौड़ने वाली पहली महिला हैं. वह सियाचिन-कारगिल व गलवान-कारगिल जैसे हाई-एल्टीट्यूड रूट भी पार कर चुकी हैं.

सूफिया सूफी ने बनाया गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड

 

सूफिया का अब क्या है लक्ष्य?

अब सूफिया की नजर और बड़े लक्ष्यों पर है. उन्होंने एलान किया है कि 1 अगस्त से भारत में पूर्व से पश्चिम तक दौड़ेंगी. इसके बाद 30 देशों में 30,000 किलोमीटर की ‘रन अराउंड द वर्ल्ड’ यात्रा शुरू करेंगी, जिसे करीब 630 दिनों में पूरा करने का लक्ष्य है.

 

सूफिया सूफी आज सिर्फ एक एथलीट नहीं, बल्कि लाखों लड़कियों के लिए यह संदेश हैं कि अगर इरादे मजबूत हों, तो दुनिया की सबसे ऊंची चोटी भी रास्ता बन जाती है.

Similar News