जब SKY मैदान पर हो तो डरने की जरूरत नहीं, T20 World Cup से पहले दहाड़े सूर्या; जानें कैसे की फॉर्म में वापसी, दिलचस्प है स्टोरी
न्यूजीलैंड के खिलाफ टी-20 सीरीज में Player of the Series बनने के बाद भारतीय कप्तान सूर्यकुमार यादव ने खराब दौर को स्वीकारते हुए कहा कि वे फॉर्म में थे, बस रन नहीं आ रहे थे. SKY वर्ल्ड कप से पहले मौजूदा लय को बेहद खास मान रहे हैं.;
Suryakumar Yadav: भारत ने न्यूजीलैंड को पांच मैचों की टी-20 सीरीज में 4-1 से करारी शिकस्त दी. शनिवार (31 जनवरी) को खेले गए पांचवें मुकाबले में भारतीय टीम ने 46 रन से जीत दर्ज की. ईशान किशन को प्लेयर ऑफ द मैच, जबकि सूर्यकुमार यादव को प्लेयर ऑफ द सीरीज चुना गया. मैच के बाद बेहद भावुक और आत्मविश्वास से भरे नजर आए भारतीय कप्तान ने कहा कि यह पल उनके लिए खास है क्योंकि इसके लिए उन्हें लंबा इंतज़ार करना पड़ा. उन्होंने स्वीकार किया कि पिछले एक साल में रन नहीं आ रहे थे, लेकिन उन्हें कभी यह नहीं लगा कि वे फॉर्म से बाहर हैं.
सूर्यकुमार यादव ने कहा, “मैं जानता था कि मैं आउट ऑफ फॉर्म नहीं, बल्कि आउट ऑफ रन हूं. मैंने अपने रूटीन पर भरोसा बनाए रखा और वही चीजें करता रहा, जो पिछले एक साल से करता आ रहा था.” उन्होंने मुरली कार्तिक के उस बयान को भी याद किया जिसमें कहा गया था, “जब SKY मैदान पर हो, तो डरने की जरूरत नहीं.”
“यही जिंदगी है, यह सफर का हिस्सा है”
खराब दौर पर बात करते हुए सूर्या ने मुस्कराते हुए कहा, “लगभग एक साल तक आसमान नीला नहीं था, लेकिन यही जिंदगी है. यह सफर का हिस्सा है.” सूर्यकुमार ने बताया कि उन्होंने उस समय ड्रॉइंग बोर्ड पर लौटकर अपनी गलतियों को समझा और सीरीज के बाद करीब दो-तीन हफ्ते अपने करीबी दोस्तों के साथ बिताए, जिन्होंने उन्हें अहम सलाह दी.
“हर मैच से कुछ न कुछ सीखते हैं”
वर्ल्ड कप से पहले आत्मविश्वास को लेकर सूर्यकुमार यादव ने कहा कि मौजूदा फॉर्म में टूर्नामेंट में उतरना उनके लिए बेहद खास है. उन्होंने कहा, “चाहे आप जीतें या हारें, हर मैच से कुछ न कुछ सीखते हैं. अब हम साउथ अफ्रीका के खिलाफ वॉर्म-अप मैच से पहले पिछले पांच मैचों और पूरे साल का विश्लेषण करेंगे.”
'बड़े स्कोर के बाद विपक्षी टीम का आक्रामक होना स्वाभाविक है'
न्यूजीलैंड के संघर्ष पर सूर्यकुमार ने कहा कि टी20 फॉर्मेट गेंदबाजों के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण होता है. बड़े स्कोर के बाद विपक्षी टीम का आक्रामक होना स्वाभाविक है. कप्तान के तौर पर सही प्लानिंग और सीखते हुए आगे बढ़ना ही सबसे अहम है.