सचिन तेंदुलकर कभी नहीं भूलेंगे 24 फरवरी 2010 का दिन, ODI में पहली बार किसी खिलाड़ी ने किया था ये कारनामा
आज का दिन सचिन तेंदुलकर के लिए बेहद खास है. वनडे इंटरनेशनल में आज के दिन सचिन तेंदुलकर ने एक ऐसा बड़ा कारनामा करके दिखाया था जिसको उनसे पहले कोई दूसरा बल्लेबाज नहीं कर पाया था.
Sachin Tendulkar
(Image Source: X/ @thecricketgully )On This Day: वर्ल्ड क्रिकेट में मास्टर ब्लास्टर की क्लास और उनके रिकॉर्ड को किसी दूसरे खिलाड़ी के पास आज तक कोई तोड़ नहीं है. सचिन तेंदुलकर ने कई ऐसे बड़े रिकॉर्ड बनाए हैं जिनको आज तक कोई खिलाड़ी तोड़ नहीं पाया है. वहीं आज का दिन सचिन तेंदुलकर के लिए बेहद खास है.
वनडे इंटरनेशनल में आज के दिन सचिन तेंदुलकर ने एक ऐसा बड़ा कारनामा करके दिखाया था जिसको उनसे पहले कोई दूसरा बल्लेबाज नहीं कर पाया था. हालांकि कई खिलाड़ी उनके बाद ये कारनामा कर चुके हैं लेकिन वे पहले बल्लेबाज थे.
क्या था वो बड़ा कारनामा?
भारतीय क्रिकेट इतिहास में आज का दिन स्वर्ण अक्षरों में दर्ज है. इसी दिन ‘मास्टर ब्लास्टर’ सचिन तेंदुलकर ने वनडे इंटरनेशनल क्रिकेट में पहला दोहरा शतक जड़कर खेल की दिशा ही बदल दी थी. यह कारनामा उन्होंने साल 2010 में ग्वालियर के मैदान पर साउथ अफ्रीका के खिलाफ करके दिखाया था. उन्होंने 200 रन नाबाद बनाकर दुनिया को अपनी महानता का एक और प्रमाण दिया.
उस समय तक वनडे क्रिकेट में दोहरा शतक महज एक सपना माना जाता था, लेकिन तेंदुलकर ने इसे हकीकत में बदल दिया. इस उपलब्धि के साथ वह वनडे इंटरनेशनल में 200 रन बनाने वाले विश्व के पहले बल्लेबाज बन गए और क्रिकेट की रिकॉर्ड बुक में हमेशा के लिए अमर हो गए.
कितने लगाए थे छक्के?
सचिन तेंदुलकर के बल्ले से यह ऐतिहासिक पारी साउथ अफ्रीका के खिलाफ घरेलू सीरीज के दौरान आई थी. इससे पहले तेंदुलकर लगातार दो शतक जड़ चुके थे और शानदार फॉर्म में थे. उस मैच में भारत ने शुरुआती झटका वीरेंद्र सहवाग के रूप में जल्दी खो दिया, लेकिन तेंदुलकर ने जिम्मेदारी संभालते हुए पारी को विस्फोटक अंदाज में आगे बढ़ाया. डेल स्टेन की रफ्तार और स्विंग भी उस दिन मास्टर ब्लास्टर को रोक नहीं पाई.
तेंदुलकर ने अपनी नाबाद 200 रनों की पारी में 25 चौके और 3 छक्के लगाए थे. उन्होंने तेज गेंदबाजों और स्पिनरों दोनों के खिलाफ समान आक्रामकता दिखाई. जैसे ही उन्होंने दोहरा शतक पूरा करने के लिए बल्ला उठाया, पूरा मैदान तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा. यह सिर्फ एक व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं थी, बल्कि भारतीय क्रिकेट के लिए गर्व का पल था.