घर बेचा, जेल गए- लेकिन बेटे को क्रिकेटर बनाने का जुनून कम नहीं हुआ! मुकुल चौधरी की 27 गेंद की पारी में दिखा पिता का संघर्ष

बादल बहुत समेटे हैं हमने, तब दरिया बनाना सीखा है... घर बेचने से लेकर जेल जाने तक, मुकुल चौधरी को क्रिकेटर बनाने में पिता ने कोई कसर नहीं छोड़ी... और जब बेटे ने अपनी टीम को जीत दिलाई तो पिता की आंखें नम हो गईं.

मुकुल चौधरी का इमोशनल कहानी

By :  अच्‍युत कुमार द्विवेदी
Updated On : 10 April 2026 5:56 PM IST

Mukul Choudhary father Emotional Story: खुदी को कर बुलंद इतना कि हर तकदीर से पहले खुदा बंदे से खुद पूछे कि बता तेरी रजा क्या है....  बेटा पैदा होगा या नहीं, उसके पहले ही पिता ने यह फैसला कर लिया था कि उसे क्रिकेटर ही बनाना है... और जब बेटा पैदा हुआ तो उन्होंने अपने वादे को निभाने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ी. घर बिक गया, जेल भी गए, लेकिन बेटे को क्रिकेटर बनाने का जुनून कम नहीं हुआ... और अब जब उसी बेटे ने कोलकाता के ऐतिहासिक ईडन गार्डन्स में 27 गेंद में नाबाद 54 रन बनाकर कोलकाता नाइटराइडर्स के खिलाफ अपनी टीम की तय मानी जा रही हार को टालकर अविश्वसनीय जीत दिला दी तो टीवी पर मैच देख रहे पिता की आंखें नम हो गईं.

पिता ने व्हाट्सएप स्टेटस लगाया- मिला नहीं कुछ भी पल भर में, एक दौर इसी में बीता है, बादल बहुत समेटे हैं हमने, तब दरिया बनाना सीखा है. यह पंक्तियां कवि Sandeep Dwivedi की किताब 'रोने से कुछ होता है क्या' से हैं ... यह सिर्फ एक कविता नहीं… बल्कि उनके बेटे Mukul Choudhary के क्रिकेटर बनने की कहानी है. पिता दलीप चौधरी कहते हैं, “ये लाइन बिल्कुल हमारी कहानी है… मेरी और मेरे बेटे की.”



जब रोने से लाल हो गई थी मुकुल की आंखें

Lucknow Super Giants के शुरुआती मैच में मुकुल चौधरी का प्रदर्शन संतोषजनक नहीं था. उन्होंने पहले मैच में दिल्ली कैपिटल्स के खिलाफ 11 गेंद में 14 रन बनाकर आउट हुए, जबकि सनराइजर्स हैदराबाद के खिलाफ वे 5 गेंद में 2 रन बनाकर नाबाद रहे. इस मैच में अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाने के बाद मुकुल चौधरी काफी टूट गए थे. Rishabh Pant ने उस मैच में टीम को जीत दिलाई, लेकिन मुकुल अपने प्रदर्शन से संतुष्ट नहीं थे.



मुकुल टीम के साथ होटल पहुंचने के बाद भी अपनी भावनाओं को नहीं रोक पाएं. जब पिता ने उन्हें वीडियो कॉल किया तो उनकी आंखें लाल दिखाई दी. इस पर पिता ने पूछा- रो लिया. मुकुल ने मुस्कुराते हुए कहा- हां...  मुकुल के मन में एक टीस थी कि टीम ने उन्हें 2 करोड़ 60 लाख रुपये में खरीदा है, जबकि उनका बेस प्राइस महज 30 लाख रुपये था. ऐसे में वे टीम को मैच नहीं जिता पाए तो क्या फायदा.


पिता से किए वादे को कैसे किया पूरा?

वीडियो कॉल के दौरान ही मुकुल ने पिता से वादा किया कि वे अगले मैच में अच्छा प्रदर्शन कर उन्हें गर्व महसूस कराएंगे.. पिता से किए गए इस वादे को मुकुल ने 9 अप्रैल को पूरा किया, जब उन्होंने 7 विकेट खोने के बावजूद टीम को अविश्वसनीय जीत दिला दी. अपनी 27 गेंद की इस पारी में मुकुल ने 7 गगनचुंबी छक्के और 2 चौके लगाए.



क्या आसान थी मुकुल चौधरी के क्रिकेटर बनने की राह?

मुकुल चौधरी के क्रिकेटर बनने के पीछे उनके पिता दलीप का त्याग और समर्पण रहा. राजस्थान के झुंझुनू जिले के छोटे से गांव Khedaro Ki Dhani से आने वाले मुकुल का सफर आसान नहीं था. दलीप चौधरी ने 2003 में शादी के समय ही तय कर लिया था, "अगर बेटा हुआ, तो उसे क्रिकेटर बनाऊंगा." उन्होंने 6 साल तक RAS की तैयारी की, लेकिन कामयाबी नहीं मिली... फिर उन्होंने रियल एस्टेट बिजनेस किया, उसमें भी असफल रहे. बेटे की अकादमी में भेजने तक के पैसे नहीं थे... आखिरकार उन्होंने 2016 में सबसे बड़ा फैसला लिया- अपना घर बेच दिया.


घर बेचने से दलीप को 21 लाख रुपये मिले. इन पैसों से उन्होंने नया होटल शुरू किया, जिसके लिए उन्हें लोन लेना पड़ा... लेकिन समय से किश्तें न भर पाने की वजह से जेल भी जाना पड़ा.. इस बात को याद कर दलीप कहते हैं, “मैं जेल गया, लेकिन मैंने कभी धोखाधड़ी नहीं की… सिर्फ बेटे का सपना पूरा करना चाहता था.”


रिश्तेदारों ने कहा- पागल हो गए हो क्या

कहते हैं कि जब समय बुरा हो तो अपने भी साथ छोड़ देते हैं... कुछ ऐसा ही मुकुल चौधरी के पिता के साथ हुआ. उनके बुरे दौर में रिश्तेदारों ने भी उनका साथ छोड़ दिया. उन्होंने कहा- खुद की जिंदगी बर्बाद कर दी… अब बेटे को छोड़ दो... लेकिन दलीप चौधरी नहीं रुके. इन बातों ने उन्हें और मजबूत बना दिया… उन्हें यकीन हो गया कि वे सही रास्ते पर हैं.

किसके फैन हैं मुकुल?

दलीप चौधरी खुद भी क्रिकेट खेलते थे और Kapil Dev और Sachin Tendulkar उनके आदर्श थे, लेकिन 2011 वर्ल्ड कप फाइनल के बाद मुकुल का आदर्श बदल गया. जब MS Dhoni ने विजयी छक्का लगाया, तो मुकुल ने कहा, "मुझे भी ऐसे ही मैच खत्म करने हैं."



घरेलू क्रिकेट से IPL तक, कैसा रहा मुकुल चौधरी का सफर?

2025-26 अंडर-23 लिस्ट A ट्रॉफी में मुकुल ने शानदार प्रदर्शन किया. उन्होंने 2 शतक और 4 अर्धशतक के साथ 142.49 की स्ट्राइक रेट से 617 रन बनाए, जिसमें 39 छक्के शामिल हैं. इसके बाद राजस्थान रणजी कोच Anshu Jain की नजर उन पर पड़ी और Syed Mushtaq Ali Trophy में मौका मिला. इस टूर्नामेंट के 5 मैचों में उन्होंने 198.85 की स्ट्राइक रेट से 173 रन बनाए. दिल्ली के खिलाफ मैच में 26 रन चाहिए थे, मुकुल ने 4 छक्के लगाकर टीम को जीत दिला दी.


मुकुल ने अपनी पारी किसे डेडिकेट किया?

कोलकाता में नाबाद अर्धशतकीय पारी खेलने के बाद मुकुल ने कहा, "यह पारी मैं अपने पिता को समर्पित करता हूं… उन्होंने शादी से पहले ही तय कर लिया था कि उनका बेटा क्रिकेट खेलेगा." उन्होंने अपने आदर्श MS Dhoni को भी याद किया. मुकुल ने कहा, "मुझे धोनी की फिनिशिंग पसंद है… वो यॉर्कर पर भी छक्का मार देते हैं."


Eden Gardens में उस रात सिर्फ 27 गेंद की पारी नहीं थी… सालों का संघर्ष, पिता का त्याग, कर्ज, आलोचना, और एक बेटे का वादा था... मुकुल चौधरी ने सिर्फ मैच नहीं जिताया, बल्कि पिता के विश्वास को भी टूटने से बचा लिया.

Similar News