क्या है Nipah Virus जो करता है दिमाग पर वार, जानें कैसे फैलती है ये बीमारी और लक्षण

भारत में Nipah Virus का केस सामने आया है, जिसके बाद लोग घबराए हुए हैं. यह बीमारी सीधा दिमाग पर असर करती है और शुरुआत में बुखार और सिरदर्द जैसे लक्षण दिखाए देते हैं.;

what is Nipah Virus

(Image Source:  META AI )
Edited By :  हेमा पंत
Updated On : 27 Jan 2026 5:37 PM IST

समय-समय पर दुनिया में ऐसे वायरस सामने आते हैं, जिनके कारण लाखों लोग अपनी जान गंवा देते हैं. निपाह वायरस (Nipah Virus) भी उन्हीं में से एक है. भारत में भी इस बीमारी के केस सामने आ रहे हैं. यह एक रेयर लेकिन खतरनाक वायरस है, जो जानवरों से इंसानों में फैलता है. 

इसकी सबसे बड़ी चिंता यह है कि यह तेजी से गंभीर रूप ले सकता है और कई मामलों में जानलेवा भी साबित हुआ है. स्टेट मिरर हिंदी ने इस विषय पर डॉक्टर डॉ देव राज राय से बात की है, जो आईएम के जनरल सेकेट्ररी रह चुके हैं. चलिए ऐसे में जानते हैं कितनी खतरनाक है ये बीमारी और इससे बचाव के तरीके. 

निपाह वायरस क्या है?

निपाह वायरस एक ज़ूनोटिक वायरस है, यानी यह जानवरों से इंसानों में फैल सकता है. माना जाता है कि इसका मुख्य स्रोत फल खाने वाले चमगादड़ (फ्रूट बैट) होते हैं. संक्रमित जानवरों, दूषित फलों या संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने से यह वायरस फैल सकता है.

कैसे फैलती है यह बीमारी?

निपाह वायरस कई तरीकों से फैल सकता है. यदि कोई फल चमगादड़ों ने खाया या छुआ गया हो और उसे बिना अच्छी तरह साफ किए खा लिया जाए, तो इंफेक्शन का खतरा बढ़ जाता है. इसी तरह इंफेक्टेड जानवरों के कॉन्टैक्ट में आने से भी यह वायरस इंसानों तक पहुंच सकता है. इसके अलावा, यह बीमारी एक संक्रमित व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में भी फैल सकती है. मरीज की लार, खांसी या छींक के संपर्क में आने से संक्रमण हो सकता है.

लक्षण क्या होते हैं?

निपाह वायरस के शुरुआती लक्षण सामान्य फ्लू जैसे हो सकते हैं, जैसे:

  • मांसपेशियों में दर्द
  • उल्टी और कमजोरी
  • बुखार
  • सिरदर्द
  • मांसपेशियों में दर्द
  • उल्टी और कमजोरी
  • सांस लेने में दिक्कत
  • दौरे पड़ना
  • बेहोशी
  • लेकिन कुछ ही दिनों में स्थिति गंभीर हो सकती है और मरीज में ये लक्षण दिख सकते हैं:
  • भ्रम (Confusion)

शरीर के किस अंग पर सबसे ज्यादा असर?

निपाह वायरस का असर सबसे अधिक दिमाग पर देखा जाता है. यह मस्तिष्क में सूजन पैदा कर सकता है, जिसे एन्सेफलाइटिस कहा जाता है, और यह स्थिति बहुत गंभीर मानी जाती है. इसी वजह से मरीज की हालत तेजी से बिगड़ सकती है और वह बेहोशी या कोमा में भी जा सकता है. इसके साथ ही, यह वायरस सांस लेने वाले सिस्टम पर भी असर डाल सकता है, जिससे सांस संबंधी दिक्कतें बढ़ सकती हैं.

क्या इससे मौत हो सकती है?

निपाह वायरस का संक्रमण गंभीर माना जाता है और इसमें मौत का खतरा ज्यादा रहता है. अगर बीमारी की पहचान समय पर न हो और इलाज शुरू करने में देरी हो जाए, तो स्थिति जानलेवा बन सकती है. इसलिए जैसे ही शुरुआती लक्षण दिखाई दें, तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना बहुत जरूरी है.

कैसे करें बचाव?

निपाह जैसे वायरस से बचाव के लिए कुछ साधारण सावधानियां बेहद काम की साबित हो सकती हैं. जमीन पर गिरे या खुले पड़े फलों को खाने से बचें और फल खाने से पहले उन्हें अच्छी तरह धोकर, संभव हो तो छीलकर ही खाएं. किसी संक्रमित व्यक्ति के बहुत पास जाने से बचें और मास्क व साफ-सफाई का खास ध्यान रखें. बीमार जानवरों से दूरी बनाए रखना भी जरूरी है. अगर अस्पताल जाना पड़े, तो वहां बताए गए संक्रमण से बचाव के नियमों का पालन जरूर करें.

क्या इस बीमारी का है इलाज?

अभी तक कोई खास एंटीवायरल थेरेपी अप्रूव नहीं हुई है. लेकिन 

  •   ICU केयर
  •   एयरवे प्रोटेक्शन और वेंटिलेशन
  •  दौरे को कंट्रोल करना
  •   बढ़े हुए इंट्राक्रैनियल प्रेशर का मैनेजमेंट
  •  हेमोडायनामिक सपोर्ट
  • रिबाविरिन-कुछ आउटब्रेक में इस्तेमाल किया गया. हालांकि,फायदा पक्के तौर पर साबित नहीं हुआ है.
  • मोनोक्लोनल एंटीबॉडी (m102.4) का इस्तेमाल

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