पार्षद में भी GenZ का दबदबा! 22 साल लड़की ने शिंदे गुट के उम्मीदवार को दी मात, जानें कौन है Vasai-Virar की प्रदीपिका सिंह

वसई-विरार महानगरपालिका चुनाव में बहुजन विकास आघाड़ी की प्रत्याशी प्रदीपिका सिंह ने इतिहास रच दिया है. महज 22 साल की उम्र में उन्होंने शिंदे गुट की उम्मीदवार को करीब 4 हजार वोटों से हराकर सबसे कम उम्र की निर्वाचित पार्षद बनने का रिकॉर्ड बनाया. नालासोपारा पूर्व के श्रीराम नगर से आने वाली प्रदीपिका को कुल 13,900 वोट मिले, जिससे उत्तर भारतीय और युवा मतदाताओं में खास उत्साह देखने को मिला. BHMS की पढ़ाई कर रहीं प्रदीपिका सिंह ने चुनौतीपूर्ण प्रभाग क्रमांक 8 से जीत हासिल की, जहां महायुति का दबदबा माना जा रहा था.;

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वसई-विरार महानगरपालिका चुनाव में इस बार नतीजों से ज्यादा चर्चा एक चेहरे की रही- 22 साल की प्रदीपिका सिंह. इतनी कम उम्र में पार्षद बनकर उन्होंने न सिर्फ रिकॉर्ड बनाया, बल्कि यह भी दिखा दिया कि स्थानीय राजनीति में अब Gen Z की आवाज़ सुनाई देने लगी है. यह जीत केवल एक सीट की नहीं, बल्कि युवा नेतृत्व पर भरोसे की जीत मानी जा रही है. चुनावी माहौल में जहां बड़े नाम और गठबंधन हावी दिख रहे थे, वहां एक युवा उम्मीदवार ने सबको चौंका दिया.

बहुजन विकास आघाड़ी (BVA) की प्रत्याशी प्रदीपिका सिंह ने शिंदे गुट की उम्मीदवार कल्याणी किरण पाटील को करीब 4,000 वोटों से हराया. उन्हें कुल 13,900 वोट मिले, जो इस प्रभाग में मजबूत जनसमर्थन का संकेत है. इस जीत के साथ प्रदीपिका वसई-विरार की सबसे कम उम्र की निर्वाचित नगरसेविका बन गईं. नतीजों ने साफ कर दिया कि मतदाता अब उम्र नहीं, काम और जुड़ाव देख रहे हैं.

कौन है प्रदीपिका सिंह?

प्रदीपिका सिंह नालासोपारा पूर्व के श्रीराम नगर इलाके की रहने वाली हैं. वे अपने माता-पिता, दादा-दादी, दो बहनों और दो भाइयों के साथ रहती हैं. उत्तर भारतीय समुदाय में उनकी जीत को खास उत्साह के साथ देखा गया, क्योंकि यह इलाका सामाजिक और आर्थिक रूप से विविध पृष्ठभूमि का है. स्थानीय मुद्दों से उनकी सीधी पहचान ने उन्हें मतदाताओं के करीब रखा.

राजनीतिक विरासत और संगठन का साथ

प्रदीपिका के दादा प्रदीप सिंह पिछले 26 वर्षों से बहुजन विकास आघाड़ी के सक्रिय कार्यकर्ता रहे हैं. इस वजह से संगठन और इलाके की समस्याओं की समझ उन्हें बचपन से मिली. यह चुनाव आसान नहीं था. लोकसभा और विधानसभा चुनावों में हार के बाद BVA कमजोर स्थिति में मानी जा रही थी, जबकि महायुति का दबदबा बढ़ा हुआ था. इसके बावजूद प्रदीपिका ने प्रभाग क्रमांक 8 जैसे स्लम-बहुल और चुनौतीपूर्ण इलाके से जीत हासिल की.

BHMS की छात्रा, विकास पर फोकस

प्रदीपिका सिंह फिलहाल BHMS की पढ़ाई कर रही हैं. चुनाव जीतने के बाद उन्होंने कहा कि उनकी प्राथमिकता प्रभाग में बुनियादी सुविधाओं साफ पानी, स्वास्थ्य, स्वच्छता और शिक्षा पर काम करने की होगी. उन्होंने साफ किया कि पढ़ाई और जनसेवा दोनों को संतुलन के साथ आगे बढ़ाया जाएगा. यह सोच उन्हें पारंपरिक नेताओं से अलग बनाती है.

सीधा मुकाबला, मजबूत रणनीति

शिंदे गुट की अनुभवी उम्मीदवार के खिलाफ सीधा मुकाबला होने के बावजूद प्रदीपिका ने मतगणना के शुरुआती दौर से ही बढ़त बना ली थी. यह जीत केवल संगठन की नहीं, बल्कि उनकी व्यक्तिगत मेहनत, घर-घर संपर्क और स्थानीय मुद्दों पर स्पष्ट रुख का नतीजा मानी जा रही है. महिला मतदाताओं का समर्थन भी उनकी जीत में निर्णायक रहा.

भरोसे पर खरा उतरने की चुनौती

प्रदीपिका ने अपनी जीत का श्रेय दादा, स्वर्गीय अब्दुल चाचा और BVA नेता हितेंद्र ठाकुर के मार्गदर्शन को दिया. उन्होंने कहा कि समाज सेवा की सीख उन्हें घर से मिली और संगठन ने युवा नेतृत्व पर भरोसा करके मौका दिया. अब चुनौती है उस भरोसे पर खरा उतरने की. 22 साल की यह पार्षद सिर्फ रिकॉर्ड नहीं, बल्कि स्थानीय राजनीति में पीढ़ीगत बदलाव का संकेत बनकर उभरी हैं.

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