BMC चुनाव के बाद महाराष्ट्र में 'रिसॉर्ट पॉलिटिक्स' की री-एंट्री, फाइव स्टार होटल में कैद हुए शिंदे के पार्षद! क्या BJP के साथ होगा 'खेला'?
मुंबई में बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) चुनावों के बाद एक बार फिर रिसॉर्ट पॉलिटिक्स शुरू हो गई है. किंगमेकर की भूमिका में आई एकनाथ शिंदे की शिवसेना ने अपने सभी 29 नवनिर्वाचित नगरसेवकों को पांच सितारा होटल में शिफ्ट कर दिया है. इसके पीछे हॉर्स ट्रेडिंग की आशंका और बीएमसी मेयर पद को लेकर बीजेपी पर दबाव बनाने की रणनीति मानी जा रही है. हालांकि महायुति (बीजेपी-शिंदे शिवसेना) के पास बहुमत से ज्यादा 118 सीटें हैं, लेकिन विपक्ष अगर एकजुट होता है तो उसे सत्ता हासिल करने के लिए सिर्फ 8 और नगरसेवकों की जरूरत होगी. ऐसे में बीएमसी की सत्ता को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है.
BMC election 2026, Mumbai resort politics: मुंबई की सियासत में एक बार फिर 'रिसॉर्ट पॉलिटिक्स' की वापसी हो गई है. बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) चुनावों में किंगमेकर बनकर उभरी उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की शिवसेना ने अपने सभी नवनिर्वाचित नगरसेवकों को मुंबई के एक पांच सितारा होटल में ठहराने का फैसला किया है. यह कदम ऐसे समय उठाया गया है, जब बीएमसी में सत्ता गठन को लेकर जोड़-तोड़ और सौदेबाज़ी का दौर तेज हो गया है.
सूत्रों के मुताबिक, शिंदे खेमे के इस फैसले के पीछे दो बड़े कारण बताए जा रहे हैं. पहला, संभावित दलबदल और हॉर्स ट्रेडिंग की आशंका, और दूसरा, बीएमसी के मेयर पद को लेकर बीजेपी के साथ मोलभाव में अपनी स्थिति मजबूत करना.
महायुति ने खत्म की ठाकरे परिवार की 25 साल की सत्ता
हालिया बीएमसी चुनावों में बीजेपी-शिवसेना (शिंदे गुट) गठबंधन यानी महायुति ने 25 साल से चली आ रही ठाकरे परिवार की सत्ता को खत्म करते हुए बहुमत का आंकड़ा पार कर लिया है. हालांकि, कोई भी पार्टी अपने दम पर बहुमत हासिल नहीं कर सकी है.
बीजेपी ने 227 वार्डों में से 89 सीटें जीती
बीजेपी ने जहां 227 वार्डों में से 89 सीटें जीती हैं, वहीं शिंदे गुट की शिवसेना को 29 सीटों पर जीत मिली है. दोनों को मिलाकर गठबंधन का आंकड़ा 118 तक पहुंच गया है, जबकि बीएमसी में बहुमत का जादुई आंकड़ा 114 है. इसके अलावा अजित पवार की एनसीपी ने तीन सीटें जीती हैं, जिससे महायुति की स्थिति और मजबूत हो गई है.
शरद पवार की एनसीपी को मिली महज 1 सीट
दूसरी ओर विपक्षी खेमे की बात करें तो उद्धव ठाकरे की शिवसेना (UBT) को 65 सीटें मिली हैं. उनके सहयोगी महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) को 6 और एनसीपी (शरद पवार गुट) को 1 सीट मिली है. कांग्रेस ने 24, AIMIM ने 8 और समाजवादी पार्टी ने 2 सीटें जीती हैं. अगर पूरा विपक्ष एकजुट होता है, तो उसके पास कुल 106 सीटें होती हैं, जो बहुमत से सिर्फ 8 सीट कम हैं. यहीं से हॉर्स ट्रेडिंग का डर पैदा हो रहा है.
क्या बीएमसी की सत्ता में आ सकता है विपक्ष?
सूत्रों का कहना है कि यदि विपक्ष महायुति के आठ नगरसेवकों को अपने पाले में लाने में सफल हो गया, तो बीएमसी की सत्ता का समीकरण पूरी तरह बदल सकता है. इसी आशंका को देखते हुए शिंदे गुट ने अपने सभी 29 नगरसेवकों को एकजुट रखने के लिए उन्हें होटल में शिफ्ट किया है.
शिंदे पर मेयर पद से समझौता न करने का बना दबाव
सूत्र यह भी बता रहे हैं कि यह कदम केवल सुरक्षा का नहीं, बल्कि रणनीतिक दबाव बनाने का भी हिस्सा है. शिंदे गुट चाहता है कि बीएमसी का मेयर उसकी शिवसेना से ही बने, भले ही वह गठबंधन में जूनियर पार्टनर क्यों न हो. पार्टी के भीतर से भी शिंदे पर दबाव है कि वह मेयर पद को लेकर कोई समझौता न करें.
पुरानी दिनों की यादें हुईं ताजा
इस घटनाक्रम ने महाराष्ट्र की राजनीति में पुराने दिनों की यादें ताज़ा कर दी हैं. इससे पहले 2019 के विधानसभा चुनावों के बाद और 2022 में शिवसेना टूट के दौरान भी विधायकों को मुंबई, सूरत, गुवाहाटी और गोवा के होटलों में रखा गया था.
विपक्ष ने कसा तंज
विपक्ष ने इस कदम पर तंज भी कसे हैं. कांग्रेस नेता नसीर हुसैन ने शिंदे पर कटाक्ष करते हुए कहा कि उन्हें आखिर किससे डर है और कौन उनके नगरसेवकों को तोड़ सकता है. वहीं उद्धव ठाकरे ने दावा किया कि शिंदे बीजेपी से डर रहे हैं और बीएमसी को लेकर उनके खेमे में टूट भी हो सकती है.
किस ओर जाएगा बीएमसी मेयर का पद?
बीजेपी की रिकॉर्ड जीत के बावजूद, मुंबई में शिवसेना की पारंपरिक ताकत को लेकर भी सवाल खड़े हुए हैं. जहां उद्धव ठाकरे की शिवसेना को 65 सीटें मिलीं, वहीं शिंदे गुट 29 सीटों पर सिमट गया. ऐसे में बीएमसी का मेयर पद किसके पास जाएगा, यह आने वाले दिनों में महाराष्ट्र की राजनीति की दिशा तय करेगा.





