देवेंद्र फडणवीस कैसे बने मुंबई के धुरंधर? BMC चुनाव में ठाकरे ब्रदर्स की बज गई 'पुंगी'
मुंबई महानगरपालिका (BMC) चुनाव में भाजपा की ऐतिहासिक जीत के पीछे मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की रणनीति सबसे बड़ा कारण बनी. ठाकरे ब्रदर्स के दोबारा साथ आने के बावजूद फडणवीस ने मराठी वोट बैंक में सेंध लगाई और भाजपा को सिंगल लार्जेस्ट पार्टी बना दिया. जमीन स्तर पर संगठन को मजबूत करना, विकास के मुद्दों पर फोकस और खुद को ‘मराठी मनूस’ के रूप में पेश करना उनकी जीत की कुंजी रहा. इस जीत ने ठाकरे परिवार के दशकों पुराने दबदबे को तोड़ते हुए फडणवीस को मुंबई का नया ‘धुरंधर’ बना दिया.
महाराष्ट्र की राजनीति में 16 जनवरी 2026 का दिन ऐतिहासिक बन गया. BMC और अन्य नगर निगम चुनावों में बीजेपी-शिंदे महायूति ने जोरदार प्रदर्शन करते हुए राज्य की सत्ता समीकरण बदल दिए. भाजपा की इस रिकॉर्ड तोड़ जीत के पीछे सबसे बड़ा नाम है मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का. लंबे समय से विभाजित ठाकरे परिवार की मराठी वोट बैंक पर पकड़ को तोड़ते हुए फडणवीस ने मुंबई में पार्टी की सिंगल-बड़ा नेता की पहचान कायम कर दी.
54 वर्षीय फडणवीस ने न केवल बीजेपी को ऐतिहासिक जीत दिलाई, बल्कि खुद महाराष्ट्र की राजनीति में सबसे प्रभावशाली नेता के रूप में उभरकर सामने आए. उनकी रणनीति, जमीन स्तर पर पार्टी की मजबूती, और मराठी वोट बैंक पर ध्यान ने इस विजय को मुमकिन बनाया.
फडणवीस का रिकॉर्ड तोड़ प्रदर्शन
चुनाव से पहले फडणवीस ने कहा था, 'मुझे विश्वास है कि हम अपना ही रिकॉर्ड तोड़ देंगे." ठाकरे परिवार की 20 सालों बाद पुनर्मिलन और मराठी पहचान को लेकर उठे सवालों के बीच फडणवीस ने बीजेपी को लगभग पूरी सफाई दिला दी. BMC में भाजपा की जीत ने स्पष्ट किया कि अब पार्टी ही 'बड़ा भाई' बनकर अपना मेयर चुन पाएगी. BJP अब अकेली सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है और 1,230 सीटों के रिकॉर्ड को हासिल करने की राह पर है. इससे फडणवीस की महाराष्ट्र में सियासी पकड़ और मजबूत हुई है.
फडणवीस की लोकप्रियता का सफर
फडणवीस ने महाराष्ट्र की राजनीति में दोबारा पैठ बनाने के लिए जमीन स्तर पर BJP को मजबूत किया. उन्होंने मुंबई और उसके उपनगरों में पार्टी की उपस्थिति बढ़ाई और पारंपरिक वोट बैंक के साथ-साथ दक्षिण भारतीय वोटर्स और मराठी हिंदू वोटर्स को भी जोड़ा. उन्होंने खुद को 'मराठी मनूस' के रूप में पेश किया और वादा किया कि अगला मेयर मराठी हिंदू होगा. पीएम मोदी और अमित शाह की गैरमौजूदगी में फडणवीस ने अकेले रणनीति बनाकर पार्टी को जीत दिलाई.
राजनीति की नींव: फडणवीस की शुरूआत
फडणवीस ने 22 साल की उम्र में नागपुर नगर निगम से राजनीतिक करियर की शुरूआत की और 27 साल की उम्र में नागपुर के सबसे कम उम्र के मेयर बने. जन संघ के वरिष्ठ नेता गंगाधर फडणवीस के पुत्र के रूप में उन्होंने 1989 में ABVP से जुड़कर राजनीति की बुनियाद रखी. 1999 में विधानसभा चुनाव लड़ा और तब से लगातार राजनीति में मजबूती बनाते आए.
विकास पुरुष की पहचान
फडणवीस ने मुंबई में मेट्रो सेवाओं का संचालन कराया, अटल सेतु और अंडरग्राउंड कोस्टल रोड के निर्माण को आगे बढ़ाया. 17,000 करोड़ रुपये के BDD चॉल पुनर्विकास योजना और एशिया के सबसे बड़े स्लम धारावी के विकास कार्य उनके नेतृत्व में शुरू हुए. BMC और अन्य निगमों में फडणवीस की रणनीति ने ठाकरे परिवार की पकड़ तोड़ दी और बीजेपी को महाराष्ट्र में राजनीतिक बहुमत दिलाया. यह उनके राजनीतिक करियर का सबसे महत्वपूर्ण पल है और 2029 विधानसभा चुनाव की राह को भी आसान बना देगा.





