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पिक्चर अभी बाकी है! BMC में करारी हार के बाद भी नहीं बदले तेवर, ‘मराठी अस्मिता’ पर अडिग उद्धव और राज ठाकरे

BMC चुनाव 2026 में 25 साल बाद ठाकरे परिवार का दबदबा खत्म हो गया. एक तरफ जहां बीजेपी–एकनाथ शिंदे की शिवसेना वाली महायुति ने सत्ता पर कब्जा जमाया. वहीं, हार के बावजूद उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे ने मराठी अस्मिता की राजनीति छोड़ने से इनकार कर दिया. उद्धव गुट ने बालासाहेब ठाकरे की तस्वीर के साथ 'लड़ाई खत्म नहीं हुई' का संदेश दिया, जबकि राज ठाकरे ने खुले तौर पर संघर्ष जारी रखने का एलान किया. दोनों नेताओं ने कहा कि मराठी भाषा, पहचान और अधिकारों की लड़ाई आगे भी जारी रहेगी.

पिक्चर अभी बाकी है! BMC में करारी हार के बाद भी नहीं बदले तेवर, ‘मराठी अस्मिता’ पर अडिग उद्धव और राज ठाकरे
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( Image Source:  ANI )

BMC Elections 2026, Uddhav Thackeray, Raj Thackeray: मुंबई की सत्ता का सबसे बड़ा केंद्र माने जाने वाले बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) चुनावों में 25 साल बाद ठाकरे परिवार का किला ढह गया. हालांकि, इस हार के बावजूद भी उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे ने साफ कर दिया है कि उनकी राजनीति का केंद्रबिंदु 'मराठी अस्मिता' कमजोर नहीं पड़ेगा.

BMC में करारी हार के बाद शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) ने पार्टी के सोशल मीडिया हैंडल पर दिवंगत बालासाहेब ठाकरे की तस्वीर साझा करते हुए लिखा, “यह लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है.” पार्टी ने कहा कि मराठियों को उनका हक और सम्मान दिलाने की लड़ाई आगे भी इसी तरह जारी रहेगी. उद्धव गुट ने 227 में से 65 वार्ड जीतकर अपनी मौजूदगी दर्ज कराई, लेकिन सत्ता से बाहर होना उनके लिए बड़ा झटका माना जा रहा है.

राज ठाकरे का खुला पत्र और आक्रामक तेवर

दूसरी ओर, महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) प्रमुख राज ठाकरे ने हार के बाद भी संघर्ष का ऐलान किया. उन्होंने कहा कि चुनावी नतीजे उनका हौसला नहीं तोड़ सकते. राज ठाकरे ने चेतावनी भरे लहजे में कहा, “अगर मराठी लोगों के खिलाफ कुछ भी होता दिखा, तो हमारे कॉरपोरेटर सत्ता में बैठे लोगों को घुटनों पर ला देंगे.”

'मराठी भाषा, मराठी पहचान और महाराष्ट्र के भविष्य के लिए लड़ाई जारी रहेगी'

भले ही MNS को सिर्फ 6 सीटें मिली हों, लेकिन राज ठाकरे ने दो टूक कहा कि मराठी भाषा, मराठी पहचान और महाराष्ट्र के भविष्य के लिए उनकी लड़ाई जारी रहेगी. उन्होंने महायुति सरकार पर मराठियों के शोषण और उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए कहा, “चुनाव आते-जाते रहेंगे, लेकिन हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि हमारी सांसें भी मराठी हैं.” राज ठाकरे ने यह भी स्पष्ट किया कि पार्टी अपनी गलतियों का विश्लेषण करेगी और जमीनी स्तर से संगठन को फिर से खड़ा करेगी.

BMC चुनाव 2026: महायुति की बड़ी जीत

2026 के BMC चुनावों में बीजेपी और एकनाथ शिंदे की शिवसेना गठबंधन ने शानदार जीत दर्ज की. कुल 227 वार्डों में बीजेपी ने 89 और शिंदे गुट की शिवसेना ने 29 सीटें जीती हैं. कुल मिलाकर महायुति को 118 सीटें मिलीं, जो बहुमत के आंकड़े 114 से ज्यादा हैं. करीब ₹74,400 करोड़ के सालाना बजट वाली BMC के लिए हुए इन चुनावों में 1,700 उम्मीदवार मैदान में थे. यह चुनाव 9 साल बाद और 4 साल की देरी से कराए गए थे. 2017 में संयुक्त शिवसेना (जिसमें तब एकनाथ शिंदे भी शामिल थे) ने BMC पर कब्जा बरकरार रखा था, लेकिन इस बार तस्वीर पूरी तरह बदल गई.

'हार अंत नहीं, एक नए राजनीतिक संघर्ष की शुरुआत है'

BMC की सत्ता हाथ से निकलने के बावजूद ठाकरे बंधुओं ने संकेत दे दिया है कि यह हार उनके लिए अंत नहीं, बल्कि एक नए राजनीतिक संघर्ष की शुरुआत है. मुंबई की राजनीति में अब मुकाबला सिर्फ सत्ता का नहीं, बल्कि मराठी पहचान और प्रभाव को लेकर और तेज होने वाला है.

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