क्लास 8 की किताब पर बवाल: SC के दबाव में NCERT ने मांगी माफी, X पोस्ट में क्या सफाई दी?

क्लास 8 की सोशल साइंस टेक्स्टबुक में ज्यूडिशियरी से जुड़े विवादित कंटेंट को लेकर मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया. सुनवाई से पहले NCERT ने किताब वापस लेते हुए बिना शर्त माफी मांगी.

( Image Source:  NCERT Facebook )

क्लास 8 की सोशल साइंस की एक किताब को लेकर विवाद बढ़ने के बाद NCERT (नेशनल काउंसिल ऑफ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग) ने बड़ा कदम उठाते हुए पूरी टेक्स्टबुक वापस ले ली है. यह किताब “Exploring Society: India and Beyond” (Part-II) शीर्षक से हाल ही में प्रकाशित हुई थी. किताब में ‘हमारे समाज में न्यायपालिका की भूमिका’ नामक चैप्टर में ज्यूडिशियरी में भ्रष्टाचार से जुड़ा एक सेक्शन शामिल था, जिस पर विवाद खड़ा हो गया. मामले की सुनवाई से पहले NCERT ने सुप्रीम कोर्ट में बिना शर्त माफी मांगते हुए कहा कि किताब को वापस ले लिया गया है और इसे अब उपलब्ध नहीं कराया जाएगा.

NCERT ने सुप्रीम कोर्ट से बिना शर्त माफी क्यों मांगी?

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई से एक दिन पहले NCERT ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि संबंधित चैप्टर के कारण उत्पन्न विवाद के लिए वह बिना शर्त और पूर्ण रूप से माफी मांगता है. परिषद ने स्पष्ट किया कि विवादित चैप्टर को लेकर संस्थान को खेद है और पूरी किताब को वापस लेने का फैसला किया गया है. साथ ही NCERT ने यह भी कहा कि वह शैक्षणिक सामग्री में सटीकता, संवेदनशीलता और जिम्मेदारी के उच्च मानकों को बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है.

विवादित चैप्टर में ऐसा क्या था जिससे मामला बढ़ गया?

बताया जा रहा है कि किताब में शामिल “हमारे समाज में ज्यूडिशियरी की भूमिका” शीर्षक वाले चैप्टर में न्यायपालिका में भ्रष्टाचार से जुड़ा एक हिस्सा जोड़ा गया था. इसी हिस्से को लेकर सवाल उठे और मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया. आलोचकों का कहना था कि स्कूल स्तर की पाठ्यपुस्तक में इस तरह की सामग्री प्रस्तुत करने का तरीका उचित नहीं था, जिससे न्यायपालिका की छवि प्रभावित हो सकती है.

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले पर क्या टिप्पणी की?

इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए NCERT की कड़ी आलोचना की. शीर्ष अदालत ने इसे न्यायपालिका की गरिमा को कमजोर करने वाला कदम बताया और किताब के आगे प्रकाशन, रीप्रिंट या डिजिटल प्रसार पर रोक लगाने का आदेश दिया. कोर्ट ने यह भी कहा कि इस तरह की सामग्री के लिए जिम्मेदारी तय होनी चाहिए और यह पता लगाया जाना चाहिए कि इसके पीछे कौन लोग जिम्मेदार थे.

आगे इस मामले में क्या हो सकता है?

सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया है कि जब तक पूरे मामले में जवाबदेही तय नहीं हो जाती, तब तक कार्यवाही बंद नहीं की जाएगी. अदालत का कहना है कि शैक्षणिक संस्थानों की जिम्मेदारी है कि वे छात्रों के लिए तैयार की जाने वाली सामग्री में सावधानी और संतुलन बनाए रखें. अब इस मामले में आगे की सुनवाई के दौरान यह देखा जाएगा कि विवादित सामग्री किताब में कैसे शामिल हुई और इसके लिए किसे जिम्मेदार ठहराया जाएगा.

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