क्या है DDGS, जिसको लेकर किसानों के साथ धोखेबाजी के सवाल पर मचा बवाल? शिवराज सिंह को देनी पड़ी गारंटी

भारत-अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौते के तहत DDGS और कुछ कृषि उत्पादों के आयात को मंजूरी दी गई है. किसान संगठनों का दावा है कि इससे GM फसलों की एंट्री और घरेलू किसानों की आय पर असर पड़ सकता है, जबकि सरकार ने सभी मुख्य फसलों को सुरक्षित बताया है.;

( Image Source:  Sora AI )
By :  धीरेंद्र कुमार मिश्रा
Updated On : 8 Feb 2026 11:39 AM IST

भारत-अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौते के ऐलान के बाद नया शब्द (डीडीजीएस) अचानक सुर्खियों में आ गया है. केंद्र सरकार का दावा है कि इस डील से भारतीय किसानों के हित पूरी तरह सुरक्षित हैं और किसी भी GM फूड फसल को देश में एंट्री नहीं मिलेगी. दूसरी तरफ किसान संगठनों का कहना है कि पशु आहार के नाम पर अमेरिकी GM मक्के से बने DDGS और सोयाबीन तेल के आयात की मंजूरी अमेरिकी उत्पादों के लिए पिछला दरवाजा खोल सकती है.

सवाल सिर्फ एक उत्पाद का नहीं है, बल्कि उस भरोसे का है जो खेती, बाजार और खाद्य सुरक्षा से जुड़ा है. क्या प्रोसेसिंग के बाद GM तत्व सच में खत्म हो जाते हैं? क्या सस्ते आयात से घरेलू सोयाबीन और चारा उगाने वाले किसानों पर दबाव बढ़ेगा? या फिर यह समझौता निर्यात और पशुपालन क्षेत्र के लिए नया अवसर साबित होगा? इसी टकराव के बीच DDGS अब व्यापार, तकनीक और किसान राजनीति के केंद्र में आ चुका है.

क्या है DDGS? (What is DDGS Explained)

DDGS यानी Distillers Dried Grains with Solubles मक्का या अन्य अनाज से इथेनॉल बनाने के बाद बचने वाला हाई-प्रोटीन उप-उत्पाद है. इसे मुख्य रूप से पशु आहार के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है. खासकर डेयरी और पोल्ट्री सेक्टर में. अमेरिका में बड़े पैमाने पर GM मक्का से इथेनॉल उत्पादन होता है, जिसके बाद उच्च गुणवत्ता वाला DDGS तैयार होता है. भारत में भी DDGS बनता है, लेकिन किसान संगठनों का कहना है कि अमेरिकी DDGS सस्ता और ज्यादा प्रोटीन युक्त है.

भारत-अमेरिका व्यापार समझौते में क्या हुआ?

भारत ने मक्का और सोयाबीन जैसी GM फसलों पर सीधे आयात की अनुमति नहीं दी है. हालांकि, पशु आहार के लिए DDGS, लाल ज्वार, ट्री नट्स, ताजे और प्रोसेस्ड फल तथा सोयाबीन तेल के आयात पर सहमति जताई गई है. भारत अमेरिका की ओर से जारी ज्वाइंट स्टेटमेंट में 'गैर-टैरिफ बाधाएं हटाने' की बात भी कही गई, जिसे कुछ किसान संगठनों ने GM उत्पादों के लिए ‘कोड लैंग्वेज’ बताया.

किसान संगठनों की आपत्ति क्या है?

भारतीय किसान संघ (BKS) और ASHA-किसान स्वराज जैसे संगठनों ने कहा है कि DDGS ज्यादातर GM मक्के से आता है. सोयाबीन तेल अमेरिका में ट्रांसजेनिक किस्मों से तैयार होता है. आयात से घरेलू सोयाबीन और चारा उत्पादक किसानों की आय प्रभावित होगी. किसानों संगठनों का कहना है कि यह समझौता लाखों किसानों के हितों पर असर डाल सकता है.

RSS से जुड़े BKS ने भी इस मसले पर सरकार से स्पष्टीकरण मांगा है. ASHA-किसान स्वराज के किरणकुमार विस्सा और कविता कुरुगंती ने कहा, "हम इस व्यापार समझौते की आड़ में अमेरिका से GM खाद्य और चारा उत्पादों के आयात का कड़ा विरोध करते हैं, विशेष रूप से सोयाबीन तेल और DDGs जो ज्यादातर GM मक्के से आएंगे."

सरकार का क्या है पक्ष?

वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि DDGS को पशुपालन क्षेत्र की मांग पर शामिल किया गया है. उनका दावा है कि प्रोसेसिंग के बाद GM के निशान समाप्त हो जाते हैं. कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने स्पष्ट किया है कि मक्का, गेहूं, चावल, सोयाबीन, डेयरी और पोल्ट्री उत्पादों को छूट नहीं दी गई है.

भारत में GM फूड की एंट्री की अनुमति नहीं है

केंद्रीय मंत्री ने कहा, 'मुख्य फसलों और डेयरी सेक्टर के लिए कोई दरवाजा नहीं खोला गया है. उन्होंने यह भी कहा कि मसालों के निर्यात में 88% वृद्धि हुई है और कई कृषि उत्पाद अमेरिका को जीरो ड्यूटी पर निर्यात होंगे. हमने 200 देशों में मसालों का निर्यात किया है. हमारे किसानों को पूरी तरह से टैरिफ में छूट मिली है. टेक्सटाइल में, हमारा टैरिफ हमारे प्रतिद्वंद्वी देशों की तुलना में काफी कम है, जो 18% है. इस समझौते से सेल्फ-हेल्प ग्रुप की महिलाओं का जीवन भी बेहतर होगा."

GM फसल विवाद: असली मुद्दा क्या है?

भारत में GM फसलों को लेकर पहले से संवेदनशील माहौल है. कपास के अलावा किसी GM खाद्य फसल को व्यावसायिक मंजूरी नहीं मिली है. किसान संगठनों का डर है कि प्रोसेस्ड उत्पादों के जरिए GM सामग्री बाजार में प्रवेश कर सकती है. जबकि सरकार का दावा है कि प्रतिबंध बरकरार हैं.

क्या इससे भारतीय किसानों पर असर पड़ेगा?

यह असर दो स्तर पर देखा जा रहा है. सोयाबीन उत्पादक किसान पर सस्ते आयात से कीमतों पर दबाव बढ़ेगा. चारा उत्पादक किसानों पर DDGS आयात से घरेलू बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी. हालांकि, सरकार का कहना है कि घरेलू कृषि हितों से समझौता नहीं किया गया है.

डील से फायदा या खतरा?

भारत-अमेरिका व्यापार समझौता जहां निर्यात बढ़ाने का अवसर दे सकता है, वहीं DDGS और सोयाबीन तेल के आयात को लेकर किसानों की चिंता बनी हुई है. अब असली सवाल यह है कि क्या प्रोसेसिंग के बाद GM तत्व सच में खत्म हो जाते हैं या यह बहस आगे और तेज होगी? आने वाले महीनों में इसका असर साफ दिखाई देगा.

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