क्या है चिनाब नदी पर शुरू सावलकोट मेगा हाइड्रो प्रोजेक्ट? इसलिए टेंशन में आया पाकिस्तान

चिनाब नदी पर भारत ने एक बड़े रणनीतिक और ऊर्जा प्रोजेक्ट की औपचारिक शुरुआत कर दी है. 5,129 करोड़ रुपये की लागत वाली सावलकोट जलविद्युत परियोजना पर काम शुरू हो चुका है.;

Sawalkote Hydropower Project

(Image Source:  AI: Sora )
Edited By :  विशाल पुंडीर
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जम्मू-कश्मीर में चिनाब नदी पर भारत ने एक बड़े रणनीतिक और ऊर्जा प्रोजेक्ट की औपचारिक शुरुआत कर दी है. 5,129 करोड़ रुपये की लागत वाली सावलकोट जलविद्युत परियोजना पर काम शुरू हो चुका है. खास बात यह है कि सिंधु जल संधि के प्रभावी रूप से निरस्त होने के बाद यह पहली नई बड़ी जलविद्युत परियोजना है, जिसे नरेंद्र मोदी सरकार से हरी झंडी मिली है.

यह परियोजना न केवल देश की ऊर्जा जरूरतों को मजबूती देगी, बल्कि रणनीतिक दृष्टि से भी बेहद अहम मानी जा रही है. नेशनल हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर कॉर्पोरेशन (NHPC) लिमिटेड ने इस मेगा प्रोजेक्ट के निर्माण के लिए कंपनियों से निविदाएं आमंत्रित कर दी हैं, जिससे साफ संकेत मिलता है कि केंद्र सरकार चिनाब बेसिन से जुड़ी परियोजनाओं को तेज रफ्तार देना चाहती है.

क्या है सावलकोट परियोजना?

सावलकोट एक रन ऑफ द रिवर जलविद्युत परियोजना होगी, जो पर्यावरणीय मानकों के अनुरूप मानी जाती है. न्यूज18 की रिपोर्ट के अनुसार NHPC के दस्तावेजों के मुताबिक 5 फरवरी को जम्मू-कश्मीर के उधमपुर और रामबन जिलों में इस विशाल परियोजना के निर्माण के लिए कंपनियों को आमंत्रित किया गया. सावलकोट जलविद्युत परियोजना के पहले चरण में 1,406 मेगावाट और दूसरे चरण में 450 मेगावाट क्षमता स्थापित की जाएगी. यह परियोजना चिनाब नदी पर स्थित होगी और इसका स्थान बागलिहार परियोजना (ऊपर की ओर) और सलाल परियोजना (नीचे की ओर) के बीच तय किया गया है.

क्या कहते हैं ताजा दस्तावेज?

दस्तावेजों में परियोजना की प्राथमिकता और तेजी साफ झलकती है. दस्तावेजों में कहा गया है “निर्माण पद्धति और उपकरणों का चयन इस उद्देश्य से किया गया है कि परियोजना को जल्द से जल्द चालू किया जा सके.” यह बयान इस बात का संकेत है कि केंद्र सरकार सिंधु जल संधि के निलंबन के बाद रणनीतिक परियोजनाओं पर तेजी से आगे बढ़ रही है. सिंधु जल संधि के स्थगन के बाद, पर्यावरण मंत्रालय की एक विशेषज्ञ समिति ने पिछले अक्टूबर में 1,856 मेगावाट की इस परियोजना को मंजूरी दी थी. अब NHPC ने इसके निर्माण के लिए औपचारिक रूप से टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी है.

कब तक पूरा होगा काम?

दस्तावेजों के अनुसार प्रारंभिक तैयारियों के बाद मुख्य निर्माण कार्य शुरू होंगे. इसमें यह भी स्पष्ट किया गया है कि “परियोजना क्षेत्र में एक वर्ष में उपलब्ध कार्य अवधि सभी भूमिगत कार्यों के लिए 12 महीने और सतही कार्यों के लिए गैर-मानसून अवधि के दौरान पूर्ण प्रगति दर और मानसून अवधि के दौरान 50% प्रगति दर के साथ होगी.” अनुमान है कि सावलकोट परियोजना को पूरा होने में लगभग 9 साल का समय लग सकता है.

क्या है अन्य परियोजनाओं का हाल?

केंद्र सरकार ने चिनाब नदी प्रणाली पर चार प्रमुख जलविद्युत परियोजनाओं को तेज गति से पूरा करने के निर्देश दिए हैं. इनमें दिसंबर 2026 तक पाकल दुल और किरू परियोजनाओं को चालू करने, मार्च 2028 तक क्वार परियोजना को पूरा करने और रणनीतिक रूप से संवेदनशील रैटल बांध के निर्माण में तेजी लाने के आदेश शामिल हैं. पाकिस्तान सालों से इनका विरोध करता आया है लेकिन अब काम शुरू होने से पाकिस्तान की टेंशन बढ़ने वाली है.

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