'जो भारत को तोड़ेगा, वह खुद टूट जाएगा', RSS प्रमुख मोहन भागवत का बांग्लादेशी हिंदुओं को बड़ा संदेश, छिड़ी बहस

मुंबई में RSS के 100 साल पूरे होने पर आयोजित कार्यक्रम में मोहन भागवत ने बांग्लादेश के हिंदुओं पर बड़ा बयान दिया. उन्होंने कहा कि अगर 1.25 करोड़ हिंदू अधिकारों के लिए खड़े होते हैं तो वैश्विक हिंदू समाज उनका साथ देगा.;

By :  धीरेंद्र कुमार मिश्रा
Updated On : 8 Feb 2026 7:17 PM IST

मुंबई में RSS के 100 साल पूरे होने पर आयोजित व्याख्यानमाला के मंच से सरसंघचालक मोहन भागवत ने बांग्लादेश में रह रहे हिंदुओं की स्थिति पर ऐसा संदेश दिया, जिसने राजनीतिक और कूटनीतिक हलकों में नई बहस छेड़ दी. उन्होंने संकेत दिया कि यदि वहां के हिंदू अपने अधिकारों की रक्षा के लिए डटकर खड़े होने का निर्णय लेते हैं, तो दुनिया भर का हिंदू समाज उनके साथ खड़ा होगा.

भागवत का यह बयान ऐसे समय आया है जब बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों, खासकर हिंदुओं के खिलाफ बढ़ती घटनाओं को लेकर चिंता जताई जा रही है. संघ प्रमुख ने इसे केवल भावनात्मक मुद्दा नहीं बल्कि वैश्विक हिंदू एकजुटता के संदर्भ में रखा. उनके शब्दों को समर्थक जहां हौसला बढ़ाने वाला संदेश बता रहे हैं, वहीं विपक्ष इसे राजनीतिक संकेत के तौर पर देख रहा है.

'1.25 करोड़ हिंदू लड़ने का फैसला करें तो मिलेगी मदद'

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत ने रविवार (8 फरवरी) को अशांत बांग्लादेश में रह रहे हिंदुओं की स्थिति पर एक सख्त संदेश दिया. उन्होंने कहा कि अगर देश की हिंदू आबादी अपने अधिकारों के लिए खड़े होकर लड़ने का फैसला करती है, तो उन्हें दुनिया भर के हिंदुओं का समर्थन मिलेगा. भागवत ने मुंबई में RSS लेक्चर सीरीज के दूसरे दिन ये बयान दिया. उनके मुताबिक, "बांग्लादेश में लगभग 1.25 करोड़ हिंदू हैं. अगर वे वहीं रहने और लड़ने का फैसला करते हैं, तो दुनिया भर के सभी हिंदू उनकी मदद करेंगे." भागवत वर्ली के नेहरू सेंटर में RSS शताब्दी समारोह के मौके पर आयोजित दो दिवसीय व्याख्यानमाला 'संघ यात्रा के 100 साल: नए क्षितिज' में बोल रहे थे.

दरअसल, पिछले कुछ महीनों में बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों, खासकर हिंदुओं के खिलाफ भीड़ हिंसा में बढ़ोतरी देखी गई है, जो भारत विरोधी कट्टरपंथी छात्र नेता शरीफ उस्मान हादी की मौत के बाद हुई है. यह अशांति 5 अगस्त, 2024 को छात्र-नेतृत्व वाले आंदोलन जिसे 'जुलाई विद्रोह' कहा गया, के बाद निर्वासित प्रधानमंत्री शेख हसीना को सत्ता से हटाए जाने के बाद देशव्यापी विरोध प्रदर्शनों के बाद और बढ़ गई.

हिंदुओं पर संगठित हमले के खिलाफ रिएक्शन

 इस उथल-पुथल के बीच, हिंसक भीड़ ने देश भर में हिंदू नागरिकों को निशाना बनाया है, जिसमें व्यापारियों, मजदूरों और छात्रों सहित कई लोगों की हत्या कर दी गई है. ये हमले सड़क विरोध प्रदर्शनों के दौरान किए गए जो अल्पसंख्यकों पर संगठित हमलों में बदल गए.

घुसपैठियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करे सरकार

RSS प्रमुख ने कहा कि पिछली सरकारों ने भारत में बढ़ती जनसंख्या गतिशीलता को संबोधित करने के लिए पर्याप्त काम नहीं किया है. उन्होंने इस बदलाव के पीछे जन्म दर और अवैध प्रवास को प्रमुख कारण बताया. भागवत ने कहा, "सरकार ने पहले जनसंख्या परिवर्तन पर पर्याप्त काम नहीं किया. जन्म दर और अवैध प्रवासी इसके कारण हैं. अब जब सरकार ने कार्रवाई शुरू कर दी है, तो वह सफल होगी."

 हिंदू विरोधियों को चेतावनी: भारत को कमजोर नहीं किया जा सकता

उन्होंने यह भी जोर देकर कहा कि भारत को अब कमजोर नहीं किया जा सकता. उन्होंने कहा, "भारत को अब तोड़ा नहीं जा सकता. जो लोग भारत को तोड़ने की कोशिश करेंगे, वे खुद टूट जाएंगे."

फंड का हिसाब मांगने पर जवाब, खाने के पैसे के बदले टिफिन मांगते हैं

संघ प्रमुख मोहन भागवत ने संगठन की फंडिंग के बारे में भी सवालों के जवाब दिए, जिसमें कहा गया कि RSS कॉर्पोरेट या संस्थागत पैसे पर निर्भर नहीं है. उन्होंने कहा, "लोग RSS के फंड के बारे में जानना चाहते हैं. हम अपने कार्यकर्ताओं से फंड इकट्ठा करते हैं. जब हम यात्रा करते हैं, तो खाना खरीदने के बजाय टिफिन मांगते हैं. हम होटलों में नहीं, बल्कि कार्यकर्ताओं के घरों में रुकते हैं."

'कोई भी बन सकता है RSS प्रमुख, ब्राह्मण होना योग्यता नहीं'

 भागवत ने नेतृत्व और जाति पर कहा कि RSS भेदभाव नहीं करता है. उन्होंने आगे कहा, "किसी भी जाति का कोई भी व्यक्ति RSS प्रमुख बन सकता है. SC-ST होना कोई अयोग्यता नहीं है और ब्राह्मण होना कोई योग्यता नहीं है. हम सभी जातियों के लिए काम करते हैं, हालांकि, RSS शुरू में ब्राह्मणों के साथ शुरू हुआ था."

'RSS किसी के खिलाफ नहीं, सिर्फ समाज को एकजुट करना है'

मुस्लिम बहुल इलाकों में काम का जिक्र करते हुए, भागवत ने कहा कि संघ टकराव से बचता है. उन्होंने कहा, "मुस्लिम इलाकों में चुनौतियों को जवाब न देकर संभाला जाता है. वे गाली-गलौज कर सकते हैं, लेकिन हम जवाब नहीं देते. इस तरह संघर्ष नहीं बढ़ता है." उन्होंने ये भी कहा कि "RSS किसी के खिलाफ नहीं है. न ही वह सत्ता चाहता है या प्रेशर ग्रुप के तौर पर काम करता है.हमारा मकसद सिर्फ समाज को एकजुट करना है." भागवत ने याद करते हुए कहा कि RSS के संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार ने समाज में एकता की कमी को पहचानने के बाद 1925 में संगठन शुरू किया था.

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