कैसे CJ Roy ने बनाया 8 हजार करोड़ का साम्राज्य? अनोखी मार्केटिंग से बदली थी किस्मत
सी.जे. रॉय ने रियल एस्टेट में दूसरों से अलग सोच अपनाकर और सही समय पर बड़े फैसले लेकर 8 हजार करोड़ का साम्राज्य खड़ा किया. अनोखी मार्केटिंग और रियलिटी शोज जैसे क्रिएटिव आइडियाज ने उनकी किस्मत बदल दी और ब्रांड को घर-घर पहुंचा दिया.;
सी.जे. रॉय ने रियल एस्टेट की दुनिया में वही देखा, जिसे बाकी लोग नजरअंदाज कर रहे थे. जब ज्यादातर डेवलपर्स शहर के बीचों-बीच प्रोजेक्ट खड़े कर रहे थे, तब उन्होंने बाहरी इलाकों की जमीन में भविष्य तलाशा. कम कीमत पर बड़े पैमाने पर जमीन खरीदना, दूरदृष्टि के साथ विकास करना और समय से पहले फैसले लेना, इन्हीं कदमों ने उनके कारोबार को तेजी से आगे बढ़ाया और एक मजबूत नींव तैयार की.
लेकिन रॉय की सफलता सिर्फ जमीन खरीदने तक सीमित नहीं थी. उन्होंने मार्केटिंग के ऐसे अनोखे तरीके अपनाए, जिन्होंने ब्रांड को घर-घर पहुंचा दिया. चलिए जानते हैं कैसे उन्होंने 8 हजार करोड़ का साम्राज्य खड़ा किया?
कौन थे सी.जे. रॉय?
सी.जे. रॉय कॉन्फिडेंट ग्रुप के सीईओ और फाउंडर थे. उन्होंने घर में आईटी रेड के दौरान खुद को गोली मारकर आत्महत्या की. जहां अब तक इस मामले कई तरह के खुलासे हुए हैं.
कहां से सीखा रियल स्टेट का काम?
रॉय ने जमीन के कारोबार की शुरुआती सीख अपने ही घर से ली. उनकी मां आसपास के इलाकों में छोटे-छोटे प्लॉट खरीदतीं, उन पर घर बनवातीं और फिर बेच देती थीं. रॉय इन सौदों का हिसाब-किताब संभालते थे, जिससे उन्हें समझ आया कि जमीन का लेन-देन कैसे होता है, पैसे का फ्लो कैसे चलता है और जोखिम को कैसे संभाला जाता है. यही एक्सपीरियंस आगे चलकर उनके बड़े और समझदारी भरे फैसलों की मजबूत नींव बना.
ऐसे शुरू किया कॉन्फिडेंट ग्रुप
1990 के समय में रॉय ने बीपीएल, टीवीएस और एचपी जैसी कंपनियों में सामान्य नौकरी की, लेकिन उनकी जिंदगी का बड़ा बदलाव 2001 में आया. उस दौर में ज्यादातर बिल्डर्स शहर के बीचों-बीच प्रोजेक्ट बना रहे थे, जबकि रॉय ने सरजापुर जैसे बाहरी इलाके में भविष्य देखा. तब वहां जमीन बहुत सस्ती मिलती थी और लोग उस जगह पर ज्यादा ध्यान नहीं दे रहे थे. 2005 में उन्होंने ‘कॉन्फिडेंट ग्रुप’ की शुरुआत की और शहर की सीमा से बाहर बड़ी मात्रा में जमीन खरीदकर विकास का काम शुरू किया. यह फैसला उस समय जोखिम भरा लग रहा था, लेकिन आगे चलकर यही कदम उनकी बड़ी सफलता की वजह बना.
अनोखी मार्केटिंग से बनाया नाम
काक्कनाड में रॉय की पहली प्रोजेक्ट में शुरू में कोई खरीदार नहीं आया. फिर उन्होंने एक रियलिटी शो में अपने फ्लैट को इनाम के रूप में देने का आइडिया सोचा. इस कदम से उनके प्रोजेक्ट की पहचान बढ़ी और लोगों का भरोसा बना, जिससे फ्लैट्स की बिक्री शुरू हो गई. इसके बाद उनके समूह ने केरल के कई शहरों में मिडिल क्लास और लग्जरी हाउसिंग प्रोजेक्ट्स लॉन्च किए.
गाड़ियों के थे शौकीन
रॉय का कारों का शौक 1994 में उनकी पहली मारुति कार से शुरू हुआ, लेकिन समय के साथ यह पैशन एक शानदार कलेक्शन में बदल गया. उनके गैरेज में अब रोल्स-रॉयस, बुगाटी, कोएनिगसेग, लेम्बोर्गिनी, मैकलेरन और मर्सिडीज-मेबैक जैसी कई सुपरकारें मौजूद थीं. इतना ही नहीं, उन्होंने अपनी पहली मारुति कार को ढूंढकर उसे दोबारा खरीदने की भी कोशिश की, जो उनके कारों के प्रति गहरे लगाव को दिखाता है.