शरद पवार गुट से डर या सत्ता बचाने की चाल! अजित पवार के बाद सुनेत्रा को इतनी भी क्या जल्दी थी?
अजित पवार के सियासी कदम के बाद सुनेत्रा पवार की जल्दबाज़ी को लेकर कई सवाल उठे. क्या यह शरद पवार गुट के बढ़ते दबाव का डर था या फिर सत्ता और पकड़ बचाने की सोची-समझी रणनीति? दरअसल, अजित पवार की अनुपस्थिति में NCP के भीतर टूट-फूट और विधायकों के पाला बदलने का खतरा था. ऐसे में सुनेत्रा का आगे आना एक सिग्नल था कि पावर सेंटर अभी भी सक्रिय है. यह कदम राजनीतिक खालीपन रोकने और विरोधी गुट की चाल को काटने के लिए अहम माना जा रहा है.;
अजित पवार के निधन के कुछ ही दिनों बाद उनकी पत्नी सुनेत्रा पवार को उपमुख्यमंत्री बनाए जाने का फैसला महाराष्ट्र की राजनीति में बड़े संदेश के तौर पर देखा जा रहा है. टाइम्स ऑफ इंडिया में छपी रिपोर्ट के मुताबिक, राजनीतिक गलियारों में इसे एनसीपी के नेतृत्व को लेकर चल रही अटकलों पर विराम लगाने और सत्ता संतुलन बनाए रखने की रणनीतिक कोशिश माना जा रहा है.
सूत्रों के मुताबिक, यह निर्णय एनसीपी के वरिष्ठ नेताओं ने लिया और इसे मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस तक पहुंचाया गया, जिन्होंने इस पर सहमति जता दी है. माना जा रहा है कि यह कदम अजित पवार की अनुपस्थिति से पैदा हो सकने वाले राजनीतिक शून्य को भरने और संभावित अस्थिरता को रोकने के लिए उठाया गया है.
क्यों जल्दी लिया गया फैसला?
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि एनसीपी और बीजेपी दोनों ही सुनेत्रा पवार की त्वरित नियुक्ति चाहते थे, ताकि अजित पवार के न रहने से किसी तरह का राजनीतिक नुकसान न हो. इसके साथ ही, एनसीपी के दो गुटों के संभावित विलय से पहले नेतृत्व पर पकड़ मजबूत रखने की भी कोशिश मानी जा रही है. दरअसल, हाल के स्थानीय निकाय चुनावों में दोनों एनसीपी गुटों के साथ आने के बाद विलय की चर्चाएं तेज हो गई थीं. ऐसे में पार्टी के भीतर नेतृत्व और पदों को लेकर नई मांगें उठने की आशंका भी बढ़ गई थी.
शरद पवार गुट से बढ़ी चिंता
अजित पवार के निधन के बाद एनसीपी के कुछ नेताओं ने खुलकर शरद पवार के मार्गदर्शन में पार्टी के एकीकरण की बात कही है. हालांकि, यह रुख सभी को रास नहीं आया. सूत्रों के अनुसार, कुछ नेताओं को आशंका है कि विलय की स्थिति में शरद पवार गुट सरकार में हिस्सेदारी या पार्टी पर नियंत्रण की मांग कर सकता है. बीजेपी भी आगामी राज्य बजट सत्र से पहले किसी भी तरह के राजनीतिक तनाव से बचना चाहती है. इसी वजह से दोनों दल फिलहाल स्थिरता बनाए रखने के पक्ष में हैं.
कैसे बनेगी सुनेत्रा पवार डिप्टी सीएम?
सुनेत्रा पवार वर्तमान में राज्यसभा सांसद हैं. योजना के मुताबिक, पहले उन्हें एनसीपी विधायक दल का नेता चुना जा सकता है और उसके बाद उपमुख्यमंत्री पद की शपथ दिलाई जाएगी. हालांकि, कैबिनेट विस्तार तक उनके पास कोई विभाग न होने की संभावना है. कानूनी रूप से, शपथ लेने के बाद उन्हें छह महीने के भीतर विधानसभा या विधान परिषद का सदस्य बनना होगा.
वित्त मंत्रालय पर फडणवीस की पकड़
सूत्रों का कहना है कि अजित पवार के पास रहा वित्त मंत्रालय फिलहाल मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के पास ही रह सकता है. संभावना है कि इसी साल का राज्य बजट भी फडणवीस ही पेश करेंगे. एक वरिष्ठ सूत्र ने कहा कि 'उपमुख्यमंत्री और एनसीपी विधायक दल नेता के पदों को जल्द भरने की कोशिश इसलिए की जा रही है ताकि दो एनसीपी गुटों के संभावित विलय से पहले पार्टी अपनी स्थिति मजबूत कर सके.
अगर ये पद खाली रहते और विलय हो जाता, तो एनसीपी (शरद पवार) गुट के नए नेता भी दावेदार बन सकते थे और नियंत्रण हाथ से निकल सकता था.” हालांकि, इन सभी नियुक्तियों पर अंतिम मुहर बीजेपी के केंद्रीय नेतृत्व की सहमति से ही लगेगी. एक राजनीतिक पर्यवेक्षक के मुताबिक, 'कोई भी बड़ा फैसला बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व की मंजूरी के बिना संभव नहीं है.'