EXCLUSIVE: बीमार 'मेक इन इंडिया' की चीख के शोर में चतुर चीन की मौज, भारत के डूबे 100 अरब डॉलर से भर रहा खजाना- शरद कोहली
ईरान-इजराइल जंग में Donald Trump की रणनीति उलटी पड़ती दिख रही है, वहीं अमेरिका का खजाना खाली हो रहा है. उधर भारत को चीन के साथ व्यापार में 100 अरब डॉलर का घाटा, ‘Make in India’ मॉडल पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है.
इजराइल को ईरान से जंग में भिड़वाने वाले मक्कार अमेरिका और उसके राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप 18 दिन की जंग में ही हलकान हुए पड़े हैं. क्योंकि इस जंग में बम-गोला-बारूद-मिसाइल के संग-संग अमेरिका का सरकारी खजाना भी खाली होने लगा है. अमेरिकी नागरिक और राजनीतिक विरोधी ट्रंप से सवाल कर रहे है कि जब, सबकुछ शांति से चल रहा था तो वह कौन सी वजह थी जिसके चलते ट्रंप ने सोते हुए ईरान को जगाकर घर बैठे मुसीबत मोल ले ली. उधर चीन से जुड़ी भारत के लिए भी इस जंग के बीच बहुत बुरी खबर है. जिसके मुताबिक बीते 11 महीने में ही भारत के ‘बीमार’ मेक इन इंडिया कार्यक्रम के चलते देश को 100 अरब डॉलर से ज्यादा का आर्थिक घाटा हो गया है.
ऐसे में सीधा सीधा सवाल है कि आखिर जिस मेक इन इंडिया का झंडा मौजूदा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद ही बुलंद किया था, आखिर वही मेक इन इंडिया आज उस हद तक आकर क्यों हाँफने लगा है कि, जिसके चलते मक्कार और पड़ोसी दुश्मन देश चीन अपना खजाना हमारी ही दौलत से भरकर मस्त-मलंग हुआ पड़ा है. कहां है मोदी जी के सुनहरे सपनों का वह मेक इन इंडिया जिसकी तारीफों के पुलिंदे बांधते पीएम मोदी और उनकी कैबिनेट कल तक थक ही नहीं रही थी.
कौन हैं डॉ. शरद कोहली
इन्हीं तमाम सवालों के लेकर नई दिल्ली में मौजूद स्टेट मिरर हिंदी के एडिटर इनेस्टीगेशन ने लंबी एक्सक्लूसिव बात की भारत के मशहूर अर्थशास्त्री डॉ. शरद कोहली से. डॉ. कोहली ने बताया कि क्यों और कैसे चीन में भारत के डूबे 100 अरब डॉलर और, ईरान के साथ बे-वजह की जंग में इजराइल को जबरिया कुदाकर कल तक हंसने वाले, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप आखिर इस युद्ध के 18 दिन में ही कैसे हांफने लगे हैं?
ट्रंप हलकान क्यों न हों
बकौल डॉ. कोहली-“ अपने कमजोर होते हुए डॉलर को मजबूत करके अपनी कुर्सी मजबूत करने की चाहत में डोनाल्ड ट्रंप ने इजराइल को ईरान के साथ जंग में तो भिड़ा दिया. यह सोचकर कि दो चार दिन में ईरान घुटने टेक देगा. हो मगर आज 18 दिन बाद उसके एकदम उल्टा रहा है जैसा ट्रंप ने सोचा था. ईरान ने अमेरिका इजराइल और ट्रंप को दो टूक कह दिया है कि जंग शुरू तुमने की थी और खतम हम (ईरान) करेंगे. ईरान की इस चुनौती से ट्रंप का हलकान होना लाजिमी है. उधर ट्रंप ने जो इजराइल ईरान के बीच रार शुरू करवाई थी, उसे लेकर अब ट्रंप अपने ही घर में अपनों से घिरने लगे हैं. ऐसे में जब बैठे-बिठाए की रार ट्रंप ने शुरू की थी यह सोचकर कि ईरान पनाह मांग जाएगा. अब जब वही रार उल्टी गले में पड़ गई तो उसका खामियाजा भी तो ट्रंप को ही भुगतना होगा.”
क्या ट्रंप ने मरा सांप गले में डाला
ट्रंप जो जंग ईरान को मुसीबत बनाकर दिए बैठे हैं. आज युद्ध के बदले हुए हालातों में वही जंग अब ट्रंप के लिए टेंशन और उनके राजनीतिक विरोधियों व अमेरिका के आमजन के लिए ट्रंप के खिलाफ तुरुप का पत्ता सा हाथ लग गई है. नवंबर में अमेरिका में चुनाव हैं. ईरान इजराइल के बीच छिड़वाई जंग में पासा उल्टा अपने ही गले में फंसा देख डोनाल्ड ट्रंप समझ चुके हैं कि अब उनके राजनीतिक भविष्य की खैर शायद ही हो सके. ट्रंप ने यह जंग दरअसल पूछो तो अपने गले में मरे हुए सांप की सी डाल ली है. या कहूं कि यह जंग ट्रंप के गले की फांस बन गया है. हां, अगर ट्रंप और इजराइल की घुड़कियों से घबड़ा कर ईरान ने इस जंग को खत्म करने का ऐलान कर दिया होता, तो ट्रंप इस बाजी को जीत जाते. ऐसा मगर इस बार चूंकि ईरान ने होने नहीं दिया है. लिहाजा अब ट्रंप अपने ही घर में चौतरफा घिर चुके हैं.
ट्रंप अपनों के ही निशाने पर क्यों
बेबाक लंबी एक्सक्लूसिव बातचीत में भारत के मशहूर अर्थशास्त्री डॉ. शरद कोहली आगे कहते हैं, “दरअसल इस जंग में भले ही युद्ध मैदान में आमने सामने ईरान-इजराइल हों. खजाना मगर ट्रंप यानी अमेरिका का ही खाली हो रहा है. अमेरिकी इस जंग को ट्रंप की निहायत निजी बेवकूफी मान रहे हैं. जोकि अमेरिका को वैश्विक, विदेश, सैन्य रक्षा और सामरिक नीति की नजर से बेहद घातक साबित हो रही है. इससे न केवल अमेरिका की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर छवि धुमिल हुई है अपितु ट्रंप की वाहियात जिद ने अमेरिका को कहीं मुंह दिखाने के काबिल नहीं छोड़ा. ट्रंप का अमेरिकी जनता जो विरोध कर रही है, सो तो है ही.
इस जंग से ट्रंप को क्या हासिल होगा
इसके अलावा ट्रंप को सबसे बड़ा झटका तब लगा जब इजराइल-ईरान के बीच बीते 18-19 दिन से चल रहे भीषण युद्ध के बीच अमेरिका प्रशासन के शीर्ष काउंटरटेररिज्म अधिकारी जो केंट ने इस लड़ाई से कुपित होकर अपने पद से इस्तीफा दे दिया. भले ही इस कदम को ट्रंप दुनिया की नजर में यह जाहिर कर रहे हों कि उन्हें कोई नुकसान इस इस्तीफे से नहीं हुआ है. मगर अमेरिका और वहां की राजनीतिक को अंदर से जानने वाले इस इस्तीफा की महत्तता को समझते हैं. जो केंट के इस इस्तीफे ने साफ कर दिया है कि अपनी बेवकूफाना जिद पर अड़कर ट्रंप ने भले ही ईरान के साथ इजराइल को जबरिया क्यों न जंग में भिड़ा दिया हो. मगर ट्रंप प्रशासन के तमाम उच्चाधिकारी इस जंग के फेवर में कतई नहीं है. क्योंकि यह जंग सिर्फ और सिर्फ अमेरिका के खजाने को खाली और अमेरिकी जनता को कमजोर कर रही है.” बताते हैं डॉ. शरद कोहली.
जंग के बीच चीन और भारत क्यों
ईरान-इजराइल और अमेरिका के बीच छिड़ी जंग में अब भारत और चीन को लेकर बेहद डराने वाली खबर भी निकल कर आ रही है. इस खबर के मुताबिक चीन के साथ होने वाले भारत के निर्यात का बेड़ा गर्क हो चुका है. इसकी पुष्टि खुद भारत सरकार के केंद्रीय वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़े कर रहे हैं. जिनके मुताबिक चीन के साथ व्यापार करने में भारत को बीते 11 महीने में करीब 100 अरब डॉलर का घाटा हो चुका है. मतलब भारत, बिना किसी जंग के दौर से गुजरे हुए ही चतुर चीन के साथ व्यापार को लेकर अपने 100 अरब डॉलर डुबोए बैठा है.
भारत को डूब मरने बात क्यों
हिंदुस्तानी हुकूमत के लिए बेशक यह शर्म से डूब मरने वाली बात है. आखिर चीन के साथ व्यापार में भारत की इस कदर की दुर्गति क्यों हो रही है? इस सवाल के जवाब में मशहूर अर्थशास्त्री डॉ. शरद कोहली ने अंदर की जो अब तक छिपी रही अनकही कहानी बयान की, उसे सुनकर एक बात तो साफ हो जाएगी कि चीन के साथ व्यापार में भारत को होने वाले 100 अरब डॉलर के घाटे के पीछे, असल वजह चीन नहीं है. असली जड़ है मौजूदा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘मेक इन इंडिया’ का बीमार और बेदम होकर हांफता सपना.
मेक इन इंडिया बीमार क्यों
भारत के मशहूर अर्थशास्त्री डॉ. शरद कोहली, “दरअसल जिस मकसद से मोदी जी ने मेक इन इंडिया की स्थापना या परिकल्पना की थी. यह मेक इन इंडिया आज उस पर खरा नहीं उतर पा रहा है. मेक इन इंडिया के बीमार होने का ही खामियाजा भारत को चीन के साथ व्यापार में महज 11 महीने में करीब 100 अरब डॉलर के नुकसान से उठाना पड़ा है.” सवाल यह है कि आखिर जिस मेक इन इंडिया को कामयाब बनाने का सपना देश के प्रधानमंत्री मोदी ने खुद देखा था. वह बीमार क्यों? इस सवाल के जवाब में डॉ, शरद कोहली कहते हैं, “मेक इन इंडिया जब तक देश के 35 साल से कम उम्र के शिक्षित नौजवानों तक लेकर सरकार खुद नहीं पहुंचेगी. तब तक यह बीमार ही रहेगा. और जब तक मेक इन इंडिया को बीमारी से बाहर लाकर उसे सेहतमंद नहीं किया जाएगा. तब तक हमारे युवा की खून-पसीने की मेहनत से खजाना चीन का भरता रहेगा.
भारत सरकार यह क्यों नहीं करती
भारत सरकार को चाहिए कि जो आज भारत का युवा चीन की ओर व्यापार के लिए घूमकर देखता है. उस युवा को ही भारत में ही उत्पादन, निर्माण, फैक्टरी लगाने के लिए प्रोत्साहित करके. सिर्फ कागजों में ही नहीं. न ही सरकारी योजनाओं तक ही. सरकार को खुद आज के भारतीय युवा के पास चलकर जाना होगा. उससे कहना होगा कि आप चीन से सामान मंगवा भारत में कुछ मत करो. जो सामान आप चीन से खरीद रहे हैं उसका उत्पादन भारत में आप खुद करें. जमीन, पैसा सुविधा तकनीकी सपोर्ट सब भारत देगा. अगर ऐसा हो जाता है तो भारत के युवा को आगे बढ़ने से देश में कोई नहीं रोक सकता है. और जब युवा मजबूती से आगे बढ़ेगा तो देश मजबूत होगा. देश की अर्थ-व्यवस्था मजबूत होगी. साथ ही भारत और उसके युवा को अपना पैसा चीन के खजाने में जमा करने की भला फिर जरूरत ही क्यों महसूस होगी.” मात्र 11 महीने में चीन के साथ व्यापार में भारत को हुए 100 अरब डॉलर के घाटे की आगे से तत्काल रोकथाम और भरपाई पर बात करते हुए कहते हैं देश के मशहूर अर्थशास्त्री डॉ. शरद कोहली.