जयललिता की ‘परछाई’ से नई पार्टी तक: कौन हैं VK शशिकला, क्यों फिर चर्चा में ‘चिन्नम्मा’?

वीके शशिकला ने नई पार्टी लॉन्च कर तमिलनाडु की राजनीति में फिर एंट्री कर ली है. उनकी वापसी ने AIADMK, DMK और राज्य के सियासी समीकरणों को नया मोड़ दे दिया है.

( Image Source:  shashikala vk facebook )

तमिलनाडु की सियासत में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है. पूर्व मुख्यमंत्री J. Jayalalithaa की सबसे करीबी सहयोगी रहीं V. K. Sasikala ने नई पार्टी AIPTMMK (ऑल इंडिया पुरची थलाइवर मक्कल मुनेत्र कझगम) लॉन्च कर राजनीतिक वापसी का बड़ा संकेत दिया है. ऐसा कर उन्होंने तमिलनाडु की करीब नौ साल तक सक्रिय राजनीति से दूरी बनाए रखने के बाद शशिकला ने साफ कहा - “अगर अब भी चुप रही, तो तमिलनाडु की जनता के साथ विश्वासघात होगा.” ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर ‘चिन्नम्मा’ की राजनीतिक यात्रा क्या रही, वे जेल क्यों गईं और जयललिता के इतने करीब कैसे पहुंचीं?

कौन हैं वीके शशिकला? साधारण जीवन से सत्ता के केंद्र तक

V. K. Sasikala का जन्म तमिलनाडु के तिरुवरूर जिले के मन्नारगुड़ी में हुआ था. साधारण पृष्ठभूमि से आने वाली शशिकला की जिंदगी में बड़ा मोड़ तब आया, जब उनके पति एम. नटराजन ने 1980 के दशक में उनकी मुलाकात J. Jayalalithaa से कराई. यही मुलाकात धीरे-धीरे एक गहरे विश्वास में बदली और शशिकला जयललिता के बेहद करीबी दायरे का हिस्सा बन गईं.

‘अम्मा’ और ‘चिन्नम्मा’: कैसा था रिश्ता?

जयललिता को उनके समर्थक ‘अम्मा’ कहते थे, जबकि शशिकला को ‘चिन्नम्मा’ यानी ‘छोटी मां’ कहा जाने लगा. शशिकला सिर्फ निजी सहयोगी नहीं रहीं, बल्कि AIADMK के अंदर एक प्रभावशाली ‘पावर सेंटर’ बन गईं. वे पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं के बीच सेतु का काम करती थीं. 1988 के बाद तो वे चेन्नई के ‘पोएस गार्डन’ स्थित जयललिता के घर में ही रहने लगीं. हालांकि, यह रिश्ता हमेशा स्थिर नहीं रहा. 1996 और 2012 में जयललिता ने शशिकला और उनके परिवार को घर से बाहर भी कर दिया था, लेकिन बाद में रिश्ते फिर सामान्य हो गए.

विवाद और जेल: क्यों गईं शशिकला सलाखों के पीछे?

शशिकला का राजनीतिक सफर विवादों से भी घिरा रहा. 1990 के दशक में ‘आय से अधिक संपत्ति’ मामले में उन पर आरोप लगे. 2014 में विशेष अदालत ने उन्हें दोषी ठहराते हुए चार साल की सजा और जुर्माना लगाया. 2017 में सुप्रीम कोर्ट ने इस सजा को बरकरार रखा, जिसके बाद उन्होंने बेंगलुरु की परप्पना अग्रहारा जेल में आत्मसमर्पण कर दिया. जेल के दौरान उन पर विशेष सुविधाएं लेने के आरोप भी लगे, जिन्हें उन्होंने खारिज किया. करीब चार साल बाद 2021 में वे रिहा हुईं.

जयललिता के बाद सत्ता की लड़ाई और गिरता प्रभाव

2016 में जयललिता के निधन के बाद AIADMK ने शशिकला को पार्टी का महासचिव बना दिया. कुछ समय के लिए वे तमिलनाडु की सत्ता की सबसे ताकतवर दावेदार बन गईं. लेकिन जल्द ही पार्टी में आंतरिक संघर्ष शुरू हो गया. ओ. पन्नीरसेल्वम और एडप्पादी के. पलानीस्वामी जैसे नेताओं के साथ टकराव के बाद 2017 में उन्हें पार्टी से बाहर कर दिया गया और उनका राजनीतिक प्रभाव कमजोर पड़ गया.

नई पार्टी AIPTMMK: क्या फिर से वापसी की तैयारी?

अब शशिकला ने AIPTMMK के गठन के साथ नई शुरुआत की है. उन्होंने दावा किया कि उनके पास 39 साल का राजनीतिक अनुभव है और वे DMK सरकार को हटाने के लिए पूरी ताकत लगाएंगी. उनकी एंट्री ऐसे समय में हुई है जब राज्य की राजनीति में M. K. Stalin, Udhayanidhi Stalin और अभिनेता विजय की नई पार्टी भी सक्रिय है.

तमिलनाडु की आबादी कितनी है?

Tamil Nadu की आबादी 2011 जनगणना के अनुसार करीब 7.21 करोड़ थी, जो अब अनुमानित तौर पर 8 से 8.5 करोड़ के बीच पहुंच चुकी है. यानी शशिकला जिस “7 करोड़ जनता” की बात कर रही हैं, वह राज्य की बड़ी आबादी का प्रतिनिधित्व करता है.

क्या ‘चिन्नम्मा’ फिर बनेंगी सत्ता की खिलाड़ी?

V. K. Sasikala की वापसी सिर्फ एक राजनीतिक कदम नहीं, बल्कि तमिलनाडु की राजनीति में एक नए समीकरण की शुरुआत हो सकती है. जयललिता की परछाई से निकलकर अब वे खुद नेतृत्व की भूमिका में दिखना चाहती हैं. लेकिन बड़ा सवाल यही है-. क्या जनता उन्हें स्वीकार करेगी, या उनका अतीत उनकी राह में सबसे बड़ी बाधा बनेगा?

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