Uttarakhand के बाद Gujarat में UCC की एंट्री! तलाक से लेकर गोद लेने तक के बदल सकते हैं बड़े नियम
उत्तराखंड के बाद अब गुजरात में यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) लागू करने की तैयारी तेज हो गई है. राज्य सरकार को समिति की अंतिम रिपोर्ट मिल चुकी है, जिसमें शादी, तलाक और गोद लेने जैसे मामलों में एक समान कानून का सुझाव दिया गया है.
Guajart UCC: उत्तराखंड के बाद गुजरात में यूनिफॉर्म सिविल कोड करने वाला है. इसके लिए राज्य ने कदम उठा लिया है. यूसीसी लिए गठित विशेष समिति ने अपनी अंतिम रिपोर्ट मुख्यमंत्री Bhupendra Patel को सौंप दी है. इस रिपोर्ट में शादी, तलाक, विरासत और गोद लेने जैसे मामलों में सभी धर्मों और समुदायों के लिए एक समान कानूनी ढांचा लागू करने का सुझाव दिया गया है.
समिति की अध्यक्ष और सुप्रीम कोर्ट की पूर्व जज Ranjana Prakash Desai ने बताया कि प्रस्तावित कानून सभी धर्मों पर समान रूप से लागू होगा. रिपोर्ट में खास तौर पर महिलाओं के अधिकारों और उनके संरक्षण को प्राथमिकता दी गई है.
कब होगा गुजरात का यूसीसी बिल पेश?
सूत्रों के मुताबिक, गुजरात सरकार मौजूदा बजट सत्र के दौरान ही विधानसभा में यूसीसी का ड्राफ्ट बिल पेश कर सकती है. 25 मार्च को बजट सत्र का आखिरी दिन है और संभावना है कि इसी दिन यह बिल सदन में रखा जाए.
गुजरात के सीएम ने यूसीसी पर क्या कहा था?
मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने समिति के गठन के समय कहा था कि राज्य सरकार प्रधानमंत्री Narendra Modi के देशभर में यूसीसी लागू करने के संकल्प को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है. इस रिपोर्ट को तैयार करने के लिए समिति ने व्यापक स्तर पर काम किया. सदस्यों ने गुजरात के सभी जिलों का दौरा किया और राजनीतिक नेताओं व धार्मिक गुरुओं से फीडबैक लिया.
अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि यह बिल कब सदन में पेश और पारित होता है, और इसके बाद राज्य में इसकी क्या प्रतिक्रिया देखने को मिलती है.
UCC लागू होने से क्या बदलेगा?
- शादी और तलाक: सभी धर्मों के लिए शादी, शादी की उम्र और तलाक के नियम एक जैसे होंगे. अभी अलग-अलग धर्मों के अपने-अपने कानून लागू हैं.
- संपत्ति का बंटवारा: माता-पिता की संपत्ति में बेटे और बेटियों को बराबर अधिकार मिलेगा, चाहे उनका धर्म कोई भी हो.
- गोद लेने के नियम: एडॉप्शन के नियम सभी समुदायों के लिए समान होंगे. फिलहाल अलग-अलग धर्मों में इसके अलग प्रावधान हैं.
- बहुविवाह पर रोक: एक से अधिक शादी करने पर पूरी तरह रोक लग सकती है. अभी कुछ धर्मों में इसकी अनुमति है.
- गुजारा भत्ता: तलाक के बाद मिलने वाला भरण-पोषण किसी धार्मिक कानून की बजाय यूसीसी के तहत तय होगा.
- तलाक बाद इद्दत: उत्तराखंड की तरह गुजरात सरकार तलाक के बाद इद्दत पर रोक लगा सकती है. इद्दत तीन महीने का वह टाइम फेज होता है जब एक औरत तलाक या पति के मरने के बाद अकेले में काटती है. इस दौरान उसे केवल सगे संबंधियों से ही मिलने की इजाजत होती है.
क्या गुजरात सरकार ने मांगी थी जनता से राय?
समिति ने एक खास वेबसाइट के माध्यम से आम जनता की राय भी मांगी थी, जिसमें करीब 19 लाख सुझाव प्राप्त हुए. अगस्त 2024 में सरकार ने बताया था कि पैनल ने यूसीसी को लेकर 38 मुस्लिम संगठनों के साथ भी बैठकें की थीं. हालांकि, इस प्रस्ताव को लेकर विरोध भी सामने आया. अप्रैल 2025 में अहमदाबाद और वडोदरा में मुस्लिम समुदाय के कुछ लोगों ने इसके खिलाफ प्रदर्शन किया था.
कानूनी मोर्चे पर भी इस पहल को चुनौती मिली थी. दिसंबर में गुजरात हाईकोर्ट ने यूसीसी समिति के गठन को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी थी. सूरत के अब्दुल वहाब सोपारीवाला द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने कहा कि वह संविधान के अनुच्छेद 162 के तहत कार्यपालिका के कामों में हस्तक्षेप नहीं कर सकती.