कन्याश्री से ‘वोटश्री’ तक: पढ़ाई करो, शादी रोको, 25000 रुपये लो! क्या यही है ममता का सबसे बड़ा चुनावी हथियार?
बंगाल सरकार कन्याश्री योजना में ₹1000 से ₹25000 तक लाभ लड़कियों को देती है, 93 लाख बेटियों फायदा मिल चुका है. जानिए कैसे यह स्कीम TMC के लिए बना बड़ा चुनावी हथियार बना.
ममता बनर्जी सरकार की कन्याश्री स्कीम
बेटियों के सशक्तिकरण को लेकर भारत में कई बड़ी योजनाएं चलीं, लेकिन हर राज्य और केंद्र का तरीका अलग-अलग है. कन्याश्री योजना, लाड़ली योजना और बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ, ये तीनों पहल इसी लक्ष्य के अलग-अलग मॉडल पेश करती हैं. कहीं सीधी आर्थिक मदद से पढ़ाई और देर से शादी को बढ़ावा दिया गया, तो कहीं लंबी अवधि की वित्तीय सुरक्षा और कहीं सामाजिक सोच बदलने पर जोर रहा. यही फर्क तय करता है कि किस योजना का असर तुरंत दिखता है और कौन लंबे समय में बदलाव लाती है.
कन्याश्री योजना (Kanyashree Prakalpa) पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की सबसे चर्चित और सफल योजनाओं में से एक है. इसे ममता सरकार ने 2013 में इसकी शुरूआत की थी. यह योजना लड़कियों की शिक्षा, सशक्तिकरण और बाल विवाह रोकने के उद्देश्य से बनाई गई थी.
क्या है कन्याश्री योजना?
यह एक Conditional Cash Transfer (CCT) योजना है, जिसमें सरकार लड़कियों को आर्थिक सहायता देती है. ताकि वे पढ़ाई जारी रखें और 18 साल से पहले शादी न करें.
कितने लोगों को मिला लाभ?
अब तक करीब 93 लाख (9.3 मिलियन) लड़कियां इस योजना से लाभान्वित हो चुकी हैं.इस पर राज्य सरकार लगभग 17,000 करोड़ रुपये खर्च कर चुकी है. यह योजना अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सराही गई और 2017 में UN Public Service Award जीता.
योजना के 10 मुख्य फायदे
- 13 से 18 साल की छात्राओं को हर साल 1000 रुपये की स्कॉलरशिप.
- 18 साल के बाद अविवाहित रहने और पढ़ाई जारी रखने पर 25,000 रुपये एकमुश्त.
- हायर एजुकेशन या प्रोफेशनल डिग्री या डिप्लोमा के लिए अलग से सहायता.
- बाल विवाह रोकने पर विशेष फोकस.
- गरीब परिवारों की लड़कियों को आर्थिक सुरक्षा.
- लड़कियों द्वारा स्कूल छोड़ने (dropout) की दर में भारी कमी.
- तकनीकी/व्यावसायिक शिक्षा में भी शामिल होने का मौका.
- प्रवेश फीस, रजिस्ट्रेशन आदि में छूट (कुछ संस्थानों में 50%).
- सामाजिक जागरूकता लड़कियों के प्रति परिवार का नजरिया बदलना.
- लड़कियों को आत्मनिर्भर और करियर-ओरिएंटेड बनाना.
इस योजना से टीएमसी को कितना लाभ?
1. पश्चिम बंगाल में महिला मतदाताओं की बड़ी संख्या है. कन्याश्री जैसी योजनाओं ने TMC को महिला वोटों में बढ़त दिलाई.
2. ममता सरकार ने कन्याश्री, लक्ष्मी भंडार, सबुज साथी जैसी योजनाओं के जरिए “गरीब और महिला हितैषी सरकार” की छवि बनाई.
3. ग्रामीण और गरीब परिवारों में यह योजना सीधे असर डालती है, जिससे ग्रासरूट स्तर पर TMC का नेटवर्क मजबूत हुआ.
4. बीजेपी और वाम दल इस तरह की सीधी कैश ट्रांसफर योजनाओं का मुकाबला करने में कमजोर दिखे—इससे TMC को बढ़त मिली.
5. सियासी जानकारों के मुताबिक 2021 विधानसभा चुनाव में महिला वोट का बड़ा हिस्सा TMC को गया, जिसमें कन्याश्री जैसी योजनाओं की अहम भूमिका रही.
कन्याश्री योजना ने पश्चिम बंगाल में सामाजिक बदलाव, राजनीतिक लाभ दोनों दिए. एक तरफ इसने लाखों लड़कियों को शिक्षा और सुरक्षा दी, वहीं दूसरी तरफ TMC के लिए यह एक “गेम-चेंजर वेलफेयर स्कीम” साबित हुई.
बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ से बेहतर कैसे कन्याश्री?
कन्याश्री योजना सीधे कैश ट्रांसफर मॉडल पर आधारित है, जिसमें लड़कियों को पढ़ाई जारी रखने और 18 साल से पहले शादी न करने पर आर्थिक मदद मिलती है. इसका असर ग्राउंड लेवल पर तुरंत दिखता है. इसी तर्ज पर लाड़ली योजना (दिल्ली/मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में) दीर्घकालिक निवेश मॉडल है, जिसमें सरकार किश्तों में पैसा जमा करती है और बेटी को 18 साल के बाद बड़ी राशि मिलती है. यह सुरक्षा तो देता है, लेकिन तत्काल लाभ कम दिखता है.
दूसरी तरफ केंद्र की बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ जागरूकता अभियान है. ताकि लिंगानुपात सुधार, शिक्षा और सामाजिक सोच बदलने पर फोकस करता है, पर इसमें सीधे पैसे का ट्रांसफर नहीं है. यानी, कन्याश्री “तुरंत असर”, लाड़ली “भविष्य सुरक्षा” और BBBP “सोच बदलाव” पर केंद्रित है.