हां मेरा कैमियो है! Dhurandhar की फेक करेंसी सीन पर क्या है बोल गए कार्ति चिदंबरम
फिल्म 'धुरंधर' के फेक करेंसी सीन को लेकर सोशल मीडिया पर पूर्व वित्त मंत्री P. चिदंबरम और उनके बेटे कार्ति चिदंबरम से जोड़कर चर्चा हो रही है. कार्ति ने पॉडकास्ट में इन अटकलों को खारिज करते हुए इसे अफवाह और सोशल मीडिया भ्रम बताया.;
फिल्म 'धुरंधर' (Dhurandhar) में एक खास सीन है, जो काफी चर्चा में रहा है. यह सीन फेक करेंसी के घोटाले से जुड़ा हुआ है. फिल्म में दिखाया गया है कि एक केंद्रीय मंत्री और उनके बेटे पर आरोप लगता है कि वे इस रैकेट में शामिल हैं. वे पाकिस्तान को नकली नोट छापने वाली प्लेटें (प्रिंटिंग प्लेट्स) सौंपते हैं, वो भी एक अनियोजित पड़ाव (अनप्लांड स्टॉपओवर) के दौरान. फिल्म की कहानी में रणवीर सिंह का किरदार हमजा इस पूरे घोटाले का पर्दाफाश करता है. उसे पता चलता है कि पाकिस्तान के पास भारतीय मुद्रा की असली प्लेटें हैं, और यह काम मेजर इकबाल (अर्जुन रामपाल) के जरिए चल रहा है.
हमजा यह जानकारी आईबी के निदेशक अजय सान्याल (आर माधवन) को देता है। आगे चलकर पता चलता है कि यह पूरा नेटवर्क खानानी एंड कालिया इंटरनेशनल (KKI) नाम की कंपनी चला रही है, और इसमें आईएसआई (पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी) का समर्थन है.फिल्म में अजय सान्याल कहते हैं कि देश में इतना व्यापक भ्रष्टाचार फैला हुआ है कि अपने ऊपर वालों को बताने से कोई फायदा नहीं. इसलिए वे इस जानकारी को अपने पास ही रखते हैं और उम्मीद करते हैं कि भविष्य में कोई ईमानदार राजनेता इस पर कार्रवाई करेगा.
किस तरफ था दर्शकों का इशारा?
फिल्म रिलीज होने के बाद सोशल मीडिया पर बहुत से लोग यह कहने लगे कि यह सीन असल जिंदगी में पी. चिदंबरम (पूर्व वित्त मंत्री) और उनके बेटे कार्ति चिदंबरम की तरफ इशारा करता है. क्योंकि उन पर भी पहले कुछ इसी तरह के भ्रष्टाचार और मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप लगे थे, और नकली नोटों से जुड़े कुछ पुराने मामले भी चर्चा में रहे हैं. फिल्म को "सच्ची घटनाओं" पर आधारित बताया गया है, जिससे ये बातें और जोर पकड़ गईं.
क्या बोले कार्ति चिदंबरम
अब कार्ति चिदंबरम ने खुद इस पर बात की है. एएनआई के एक पॉडकास्ट में उनसे पूछा गया कि क्या उन्होंने 'धुरंधर' देखी है. उन्होंने हंसते हुए जवाब दिया, 'नहीं देखी लेकिन मुझे बताया गया है कि उसमें मेरा एक छोटा सा कैमियो (रोल) है. लेकिन फिल्म हिंदी में है, और मुझे पता चला है कि यह तीन घंटे लंबी है. तो शायद अपनी कई उड़ानों के दौरान मैं इसे देख लूंगा. काश फिल्म के निर्माता ने मुझे फोन करके पूछा होता कि मेरे रोल के लिए किस एक्टर को लेना चाहिए. मैं कुछ अच्छे सुझाव जरूर देता.' जब उनसे मजाक में पूछा गया कि उन्हें और उनके पिता को कौन-कौन से एक्टर अच्छे से निभा सकते हैं, तो कार्ति ने मज़ाकिया अंदाज में कहा कि पियर्स ब्रॉसनन और माइकल केन को यह भूमिका निभानी चाहिए.
मैं क्या कर सकता हूं?
फिर जब सीधे पूछा गया कि क्या फिल्म में नकली नोटों की प्लेटें बनाने वाले मामले की बात हो रही है, तो कार्ति ने गंभीर होकर कहा, 'अगर लोग सच, झूठ और व्हाट्सएप फॉरवर्ड को आपस में मिला देते हैं, तो मैं क्या कर सकता हूं? अगर आपको सच में लगता है कि ऐसा हुआ है, तो क्या भारत सरकार के पास इसका कोई रिकॉर्ड नहीं होना चाहिए? क्या कोई इसे ठीक से समझ भी पाता है? दुर्भाग्य से व्हाट्सएप और मार्क ज़करबर्ग की वजह से लोग अब सच और झूठ में फर्क नहीं कर पाते. सब कुछ एक-दूसरे में घुल-मिल जाता है. एआई के आने से तो स्थिति और भी खराब होने वाली है.'
फिल्म के बारें में
फिल्म का यह सीन फेक करेंसी के एक बड़े इंटरनेशनल नेटवर्क को दिखाता है, जिसमें पाकिस्तान की आईएसआई और कुछ कथित भारतीय मददगार शामिल हैं. कई दर्शकों ने इसे चिदंबरम परिवार से जोड़ा, लेकिन कार्ति चिदंबरम ने इसे साफ तौर पर नकारते हुए कहा कि यह सब अफवाहें, झूठ और सोशल मीडिया फॉरवर्ड का मिश्रण है. फिल्म में कोई नाम नहीं लिया गया है, इसलिए यह स्पष्ट रूप से किसी खास व्यक्ति पर आधारित है या नहीं, यह बहस का विषय बना हुआ है.