Ghooskhor Pandat के बाद Yadav ji Ki love story पर बवाल; यूट्यूबर मृदुल तिवारी की बहन पर भड़का यादव समाज
27 फरवरी 2026 को रिलीज होने जा रही फिल्म 'यादव जी की लव स्टोरी' ट्रेलर रिलीज के बाद विवादों में घिर गई है. यादव समाज के कुछ संगठनों ने इसे ‘लव जिहाद’ एंगल से जोड़ते हुए विरोध शुरू कर दिया है.;
Yadav ji Ki love story: भारत के छोटे-छोटे शहरों और गांवों में जहां जातीय गौरव और सम्मान की बातें दिल से जुड़ी होती हैं, वहां एक फिल्म ने आग लगा दी है. फिल्म का नाम है 'यादव जी की लव स्टोरी' (Yadav ji Ki love story). निर्देशक अंकित भड़ाना ने इसे एक रोमांटिक थ्रिलर के रूप में पेश किया है, जिसमें लीड रोल में प्रगति तिवारी फेमस यूट्यूबर मृदुल तिवारी की बहन और विशाल मोहन हैं. प्रगति ने 'सिंपल यादव' का किरदार निभाया है. एक शांत, घरेलू लड़की, जो अपने पहले प्यार वसीम अख्तर (मुस्लिम युवक) से गहराई से जुड़ी हुई है, लेकिन परिवार उसे अभिमन्यु यादव से शादी के लिए दबाव डालता है.
फिल्म 27 फरवरी 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली है. ट्रेलर और पोस्टर जारी होते ही सोशल मीडिया पर हंगामा मच गया. कई लोग इसे 'लव जिहाद' का प्रमोशन बताते हुए नाराज हैं. यादव समाज के युवा कह रहे हैं कि यह फिल्म यादव महिलाओं की छवि को खराब कर रही है, उन्हें कमजोर और बहकने वाली दिखा रही है. एक पोस्ट में जयकी यादव ने लिखा, 'ब्राह्मण समाज ने 'घूसखोर पंडत' नाम की फिल्म को देखते ही Netflix को घुटनों पर ला दिया. महज दो दिनों में टाइटल बदलवाया, क्योंकि वह ब्राह्मणों की छवि खराब कर रहा था. लेकिन यादव समाज चुप है। एक मामूली यूट्यूबर और उसकी बहन ऐसी फिल्म ला रहे हैं, जिसमें यादव लड़की मुस्लिम लड़के के प्यार में पड़ती है. हमारी बहन-बेटियों का चरित्र परिभाषित किया जा रहा है, और यादव सो रहे हैं?'.
क्या है प्रगति तिवारी का बयान?
जयकी की यह पोस्ट वायरल हो गई. हजारों लाइक्स, रीट्वीट और कमेंट्स आए. लोग लिख रहे थे, '#BoycottYadavJiKiLoveStory' कुछ ने कहा, 'अगर लव जिहाद दिखाना है तो पंडिताइन की लव स्टोरी नाम रखो. यादव नाम क्यों?. प्रगति तिवारी ने इंस्टाग्राम पर सफाई दी, 'यह एक काल्पनिक रोमांटिक ट्रायंगल है. कोई जाति, धर्म या समाज का अपमान नहीं है. फिल्म CBFC से सर्टिफाइड है और टाइटल रजिस्टर्ड है.' लेकिन उनका यह बयान आग में घी डालने जैसा साबित हुआ. विरोध और तेज हो गया. यादव समाज के कई संगठन और युवा ग्रुप्स एकजुट होने लगे. यूपी, बिहार, राजस्थान और हरियाणा में मीटिंग्स होने लगीं. सोशल मीडिया पर हैशटैग ट्रेंड करने लगे. लोग कह रहे थे, 'जब ब्राह्मणों ने एकजुट होकर Netflix को मजबूर किया कि 'घूसखोर पंडत' का नाम बदलो, क्योंकि वह पंडितों को रिश्वतखोर दिखा रहा था, तो यादव क्यों चुप हैं? क्या हमारी बहनों की इज्जत कम अहम है?.'
क्या है फिल्म की टीम का दावा?
फिल्म के प्रोड्यूसर संदीप तोमर और टीम दावा कर रही है कि यह सिर्फ एक लव स्टोरी है, जिसमें प्यार, परिवार और समाज के दबाव को दिखाया गया है। लेकिन विरोधियों का कहना है कि टाइटल में 'यादव जी' का इस्तेमाल जानबूझकर किया गया है ताकि यादव समाज को टारगेट किया जाए. विशाल मोहन के किरदार 'वसीम अख्तर' को मुस्लिम दिखाकर 'लव जिहाद' का एंगल जोड़ा गया है. अब सवाल यह है कि क्या यादव समाज ब्राह्मणों जैसी एकजुटता दिखा पाएगा? क्या लीगल पिटीशन दाखिल होंगी? क्या थिएटर्स में विरोध प्रदर्शन होंगे? या फिर फिल्म रिलीज हो जाएगी और विवाद थम जाएगा?.
रिलीज होगी फिल्म या लगेगी रोक?
27 फरवरी नजदीक आ रहा है. सोशल मीडिया पर हर दिन नई पोस्ट्स, मीम्स और वीडियोज आ रहे हैं. यादव युवा कह रहे हैं, 'यह सिर्फ फिल्म नहीं, हमारी इज्जत का सवाल है.' एक तरफ लव स्टोरी, दूसरी तरफ जातीय सम्मान का संघर्ष. यह विवाद भारतीय समाज की उस सच्चाई को उजागर करता है जहां कला और जाति की संवेदनशीलता अक्सर टकराती है. क्या फिल्म रिलीज होगी या बदलाव होगा? समय बताएगा. लेकिन फिलहाल, 'यादव जी की लव स्टोरी' सिर्फ एक फिल्म नहीं रही यह एक सामाजिक बहस बन गई है.