हमारे गहने वापस दो! Margot Robbie ने पहना Mumtaz Mahal का 'ताजमहल नेकलेस', भड़के यूजर्स ने कहा- अंग्रेजों ने चुराया

हॉलीवुड अभिनेत्री मार्गोट रॉबी के गले में दिखा ‘ताजमहल नेकलेस’ सोशल मीडिया पर विवाद का कारण बन गया है. बताया जाता है कि यह शाही आभूषण मुगल काल में नूरजहां और मुमताज़ महल से जुड़ा था.;

( Image Source:  X/badestoutfit )
Edited By :  नवनीत कुमार
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हॉलीवुड स्टार Margot Robbie जब लॉस एंजिल्स में अपनी आने वाली फिल्म Wuthering Heights के प्रीमियर पर पहुंचीं, तो कैमरों की चमक से ज्यादा ध्यान उनके गले में सजे हार ने खींचा. दिल के आकार का सुनहरा पेंडेंट, जिस पर माणिक जड़े थे, पहली नजर में एक शाही आभूषण लगा. लेकिन कुछ ही घंटों में यह रेड कार्पेट की शान सोशल मीडिया पर गुस्से और बहस की वजह बन गई क्योंकि बात सिर्फ फैशन की नहीं, इतिहास और विरासत की थी.

जिस हार को रॉबी ने पहना, उसकी अनुमानित कीमत करीब 8 मिलियन डॉलर बताई गई. उन्होंने कहा कि यह आभूषण कभी एलिज़ाबेथ टेलर का था और खास मौके के लिए उन्हें Cartier ने दिया. रॉबी के मुताबिक, इस नेकलेस में “रोमांटिक इतिहास” की अनुभूति है. लेकिन उनकी यह व्याख्या अधूरी मानी गई, क्योंकि इस आभूषण की जड़ें भारत के मुगलकाल तक जाती हैं और वही बात भारतीयों को चुभ गई.

‘ताजमहल’ नेकलेस की क्या है कहानी?

यह हार 1600 के दशक में मुगल सम्राट Jahangir की प्रभावशाली पत्नी Nur Jahan को भेंट किया गया था. पेंडेंट पर नूरजहां का नाम, ‘लेडी ऑफ द पादशाह’ की उपाधि और जहांगिर के शासन-वर्ष का उल्लेख अंकित है. बाद में यह आभूषण Shah Jahan तक पहुंचा, जिन्होंने इसे अपनी पत्नी Mumtaz Mahal को दिया जिनकी स्मृति में ताजमहल बना. यहीं से इसे ‘ताजमहल नेकलेस’ कहा जाने लगा.

दिल्ली से अमेरिका तक: कैसे बदला मालिकाना?

इतिहासकारों के मुताबिक 1739 में नादिर शाह के दिल्ली आक्रमण के दौरान यह नेकलेस भारत से बाहर चला गया. वर्षों बाद यह अमेरिका पहुंचा और अभिनेता रिचर्ड बर्टन ने एलिज़ाबेथ टेलर को उनके 40वें जन्मदिन पर इसे उपहार में दिया. टेलर के निधन के बाद 2011 में यह नीलामी में गया और अंततः Cartier ने इसे 8.8 मिलियन डॉलर में खरीदा लेकिन भारत में सवाल यह उठा कि क्या यह ‘खरीद’ औपनिवेशिक लूट की विरासत को वैध ठहराती है?

सोशल मीडिया पर फूटा भारतीयों का गुस्सा

भारतीय यूज़र्स ने रॉबी की प्रस्तुति और बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी. कई लोगों ने कहा कि लेखों में लिखा जाना कि यह नेकलेस “एलिज़ाबेथ टेलर तक पहुंच गया” इतिहास को धुंधला करता है. एक यूज़र ने लिखा, “यह किसी तरह ‘खुद-ब-खुद’ किसी श्वेत अभिनेत्री तक नहीं पहुंचा. इसके पीछे लूट और जब्ती का इतिहास है.” वहीं, एक यूजर ने कहा कि हमारे गहने वापस करो. बहस ने फैशन से आगे बढ़कर सांस्कृतिक स्वामित्व और औपनिवेशिक न्याय तक का रूप ले लिया.

स्मृति, पहचान और विरासत का प्रतीक

यह विवाद एक बार फिर उस पुराने सवाल को सामने लाता है कि क्या ऐतिहासिक भारतीय आभूषणों को वैश्विक मंचों पर पहनना महज़ स्टाइल है, या उनकी वापसी पर गंभीर बातचीत का समय? रेड कार्पेट पर चमकता नेकलेस अब सिर्फ एक ज्वेलरी पीस नहीं रहा; वह स्मृति, पहचान और विरासत का प्रतीक बन गया है. और इसी प्रतीक ने दुनिया को याद दिलाया कि सुंदरता के पीछे छुपा इतिहास कभी-कभी सबसे तेज आवाज़ बन जाता है.

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