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ट्रंप से रहे मतभेद, US की पूर्व खुफिया चीफ Tulsi Gabbard के बारे में कितना जानते हैं आप, तारीफ किए बिना नहीं रह पाया Iran?

अमेरिका की पूर्व राष्ट्रीय खुफिया निदेशक Tulsi Gabbard के इस्तीफे के बाद ईरान ने उनकी खुलकर तारीफ की है. ईरान का कहना है कि तुलसी ने कभी इजराइल के प्रतिनिधि के तौर पर काम नहीं किया.

ट्रंप से रहे मतभेद, US की पूर्व खुफिया चीफ Tulsi Gabbard के बारे में कितना जानते हैं आप, तारीफ किए बिना नहीं रह पाया Iran?
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Tulsi Gabbard: अमेरिका की राष्ट्रीय खुफिया निदेशक तुलसी गबार्ड के इस्तीफे के बाद जहां अमेरिकी राजनीति में हलचल तेज हो गई है, वहीं ईरान की ओर से उनकी खुलकर तारीफ की गई है. आर्मेनिया स्थित ईरानी दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर तुलसी गबार्ड की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने कई बार ईरान को लेकर वह “सच” बोला, जो अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को पसंद नहीं था.

बता दें, तुलसी ने अपने पति के कैंसर होने के बाद अपनी पद से इस्तीफा दे दिया है. उन्होंने अपने रेज़िग्नेशन को सोशल मीडिया पर भी पोस्ट किया था. दरअसल, उनके पति अब्राहम को बोन कैंसर है. ऐसे में वह अपने परिवार से साथ वक्त बिताना चाहती हैं.

ईरानी दूतावास ने क्या कहा?

ईरानी दूतावास ने अपने पोस्ट में लिखा, “हम अब्राहम के जल्द और पूरी तरह स्वस्थ होने की कामना करते हैं. आपने कई बार दिखाया कि आप अमेरिका के लिए काम करती हैं, इजराइल के लिए नहीं. आपने ईरान को लेकर कई ऐसी सच्ची बातें कहीं जिन्हें ट्रंप पसंद नहीं करते थे. अफसोस है कि आपके जैसी शख्सियत ऐसी सरकार के साथ काम कर रही थी, जिसने अमेरिका को किनारे कर खुद को इजराइल का प्रतिनिधि बना लिया है.”

डोनाल्ड ट्रंप ने क्या कहा?

ट्रंप ने कहा, “तुलसी गबार्ड ने बेहतरीन काम किया है, लेकिन 30 जून को वह प्रशासन छोड़ देंगी. उनके पति अब्राहम एक गंभीर बीमारी से जूझ रहे हैं और तुलसी इस कठिन समय में उनके साथ रहना चाहती हैं. हमें पूरा भरोसा है कि वह जल्द स्वस्थ होंगे. तुलसी ने शानदार काम किया और हम उन्हें मिस करेंगे.” ट्रंप ने यह भी घोषणा की कि राष्ट्रीय खुफिया विभाग के प्रधान उप निदेशक आरोन लुकास को कार्यवाहक राष्ट्रीय खुफिया निदेशक बनाया जाएगा.

कौन हैं तुलसी गबार्ड?

  • Tulsi Gabbard अमेरिकी राजनेता और सैन्य अधिकारी हैं. उनका जन्म 12 अप्रैल 1981 को हुआ था. वह 2025 से अमेरिका की आठवीं राष्ट्रीय खुफिया निदेशक के रूप में काम कर रही थीं. इससे पहले वह 2013 से 2021 तक हवाई के दूसरे कांग्रेसनल जिले से अमेरिकी प्रतिनिधि सभा की सदस्य रह चुकी हैं.
  • तुलसी गबार्ड पहले डेमोक्रेटिक पार्टी की सदस्य थीं, लेकिन 2022 में उन्होंने पार्टी छोड़ दी थी. इसके बाद कुछ समय तक वह निर्दलीय रहीं और फिर 2024 में रिपब्लिकन पार्टी में शामिल हो गईं.
  • तुलसी गबार्ड ने 2003 में हवाई आर्मी नेशनल गार्ड जॉइन किया था. 2004 से 2005 के बीच उन्हें इराक भेजा गया, जहां उन्होंने मेडिकल यूनिट के साथ सेवा दी और Combat Medical Badge भी हासिल किया.
  • इसके बाद 2007 में उन्होंने अलबामा मिलिट्री अकादमी से अधिकारी प्रशिक्षण कार्यक्रम पूरा किया. 2008 में वह कुवैत में आर्मी मिलिट्री पुलिस अधिकारी के रूप में तैनात रहीं.
  • 2015 में कांग्रेस सदस्य रहते हुए वह हवाई आर्मी नेशनल गार्ड में मेजर बनीं. बाद में 2020 में उन्होंने अमेरिकी आर्मी रिजर्व जॉइन किया और 2021 में उन्हें लेफ्टिनेंट कर्नल के पद पर पदोन्नत किया गया.
  • 2012 में तुलसी गबार्ड हवाई के दूसरे कांग्रेसनल जिले से अमेरिकी प्रतिनिधि सभा के लिए चुनी गईं. वह अमेरिकी कांग्रेस में पहुंचने वाली पहली समोअन-अमेरिकी और पहली हिंदू-अमेरिकी सदस्य बनीं.
  • कांग्रेस में रहते हुए उन्होंने House Armed Services Committee और House Foreign Affairs Committee में काम किया. उन्होंने इस्लामी कट्टरपंथ के खिलाफ सैन्य कार्रवाई का समर्थन किया, लेकिन सीरिया में अमेरिकी सैन्य हस्तक्षेप का विरोध किया था.
  • 2020 में उन्होंने डेमोक्रेटिक पार्टी की ओर से राष्ट्रपति पद की दावेदारी भी पेश की थी. हालांकि बाद में उन्होंने अपना नाम वापस लेकर जो बाइडेन का समर्थन किया. इससे पहले वह 2013 से 2016 तक Democratic National Committee की उपाध्यक्ष भी रह चुकी थीं.
  • 2021 में कांग्रेस छोड़ने के बाद तुलसी गबार्ड ने कई मुद्दों पर अधिक रूढ़िवादी रुख अपनाया. इनमें ट्रांसजेंडर अधिकार, सीमा सुरक्षा और विदेश नीति जैसे मुद्दे शामिल थे. 2022 में उन्होंने कंजर्वेटिव CPAC सम्मेलन में हिस्सा लिया और डेमोक्रेटिक पार्टी छोड़ने का ऐलान किया.
  • 2024 में उन्होंने डोनाल्ड ट्रंप का समर्थन किया और उसी साल रिपब्लिकन पार्टी जॉइन कर ली. बाद में ट्रंप ने उन्हें राष्ट्रीय खुफिया निदेशक पद के लिए नामित किया.
  • हालांकि सीरिया और रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर उनके पुराने बयानों पर काफी विवाद भी हुआ. इसके बावजूद कई पूर्व सैनिकों और रिपब्लिकन नेताओं ने उनके सैन्य अनुभव और कांग्रेस में लंबे कार्यकाल का हवाला देते हुए उनका बचाव किया.
  • फरवरी 2025 में अमेरिकी सीनेट ने तुलसी गबार्ड की नियुक्ति को मंजूरी दी. इसके साथ ही वह अमेरिकी इतिहास में सबसे वरिष्ठ प्रशांत द्वीपीय मूल की सरकारी अधिकारी बन गईं.
  • मार्च 2026 में डोनाल्ड ट्रंप ने सार्वजनिक रूप से संकेत दिया था कि ईरान और उसके परमाणु कार्यक्रम को लेकर उनके और तुलसी गबार्ड के विचार अलग-अलग हैं. ट्रंप ने उन्हें इस मुद्दे पर “थोड़ा नरम” बताया था.
  • इसके बाद अब 22 मई 2026 को तुलसी गबार्ड ने अपने इस्तीफे की घोषणा कर दी, जो 30 जून से प्रभावी होगा.
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