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भारत पहुंचे US विदेश मंत्री Marco Rubio, तेल, ट्रेड और चीन से रिश्तों के बीच क्या है अमेरिका का बड़ा गेम प्लान?

अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो भारत दौरे पर पहुंचे हैं, जहां उनकी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्री एस. जयशंकर से मुलाकात होगी. यह दौरान काफी अहम माना जा रहा है.

भारत पहुंचे US विदेश मंत्री Marco Rubio, तेल, ट्रेड और चीन से रिश्तों के बीच क्या है अमेरिका का बड़ा गेम प्लान?
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( Image Source:  @ANI )

अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो शनिवार सुबह कोलकाता पहुंचे. इसके बाद वह नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात करेंगे. यह भारत की उनकी पहली आधिकारिक यात्रा है, जो 23 मई से 26 मई तक चलेगी. रुबियो का यह दौरा ऐसे समय हो रहा है जब भारत और अमेरिका के रिश्तों में आर्थिक सहयोग बढ़ रहा है, लेकिन टैरिफ और अमेरिका की बदलती विदेश नीति को लेकर कुछ मतभेद भी बने हुए हैं.

मार्को रुबियो अपने चार दिवसीय दौरे के दौरान कोलकाता, आगरा, जयपुर और नई दिल्ली जाएंगे. नई दिल्ली में उनकी विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ बैठक होने की संभावना है. इसके अलावा वह क्वाड देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक में भी शामिल होंगे. इस बैठक में जापान और ऑस्ट्रेलिया के प्रतिनिधि भी मौजूद रहेंगे.

रुबियो का भारत आना, क्या है मकसद?

अमेरिका इस दौरे को भारत के साथ अपनी रणनीतिक साझेदारी मजबूत करने के बड़े प्रयास के रूप में देख रहा है. खासकर ऐसे समय में जब भारत यूरोपीय संघ और खाड़ी देशों समेत कई वैश्विक ताकतों के साथ अपने संबंध तेजी से बढ़ा रहा है.

भारत दौरे से पहले मार्को रुबियो ने कई बार भारत को अमेरिका का “महत्वपूर्ण सहयोगी” और “बेहतरीन साझेदार” बताया. उन्होंने साफ कहा कि इस दौरे में ऊर्जा और व्यापार सबसे अहम मुद्दे होंगे. मियामी में पत्रकारों से बातचीत के दौरान रुबियो ने कहा, “हम भारत को जितनी ज्यादा ऊर्जा बेच सकें, बेचना चाहते हैं. हम भारत के ऊर्जा पोर्टफोलियो का बड़ा हिस्सा बनना चाहते हैं.”

अमेरिका की ओर से भारत के साथ ऊर्जा सहयोग बढ़ाने की कोशिश ऐसे समय हो रही है जब पश्चिम एशिया में तनाव और होर्मुज बंद होने के कारण वैश्विक स्तर पर तेल आपूर्ति और कीमतों को लेकर चिंता बढ़ गई है. रुबियो ने संकेत दिया कि अमेरिका भारत को केवल रणनीतिक साझेदार ही नहीं बल्कि दुनिया के सबसे बड़े ऊर्जा बाजारों में से एक के रूप में देख रहा है.

वेनेजुएला के प्रतिनिधि भी आएंगे भारत?

उन्होंने कहा कि भारत के साथ ऊर्जा को लेकर पहले से बातचीत चल रही थी और अमेरिका वेनेजुएला के तेल को लेकर भी नए अवसर देख रहा है. रुबियो ने बताया कि वेनेजुएला के अंतरिम नेतृत्व के प्रतिनिधि भी अगले सप्ताह भारत आ सकते हैं. इससे वैकल्पिक ऊर्जा मार्गों और सप्लाई चेन पर चर्चा की संभावना जताई जा रही है.

टीओआई की रिपोर्ट के मुताबिक, ऊर्जा के अलावा व्यापार भी दोनों देशों के रिश्तों का बड़ा हिस्सा बन चुका है. अमेरिकन चैंबर ऑफ कॉमर्स के वार्षिक नेतृत्व सम्मेलन में भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने कहा कि भारत-अमेरिका संबंध “बेहद महत्वपूर्ण दौर” में पहुंच चुके हैं.

क्या अमेरिका और भारत के बीच बढ़ा व्यापार?

उन्होंने बताया कि पिछले दो दशकों में दोनों देशों के बीच व्यापार करीब 20 अरब डॉलर से बढ़कर 220 अरब डॉलर से ज्यादा हो गया है. दोनों देश अब 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 500 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य लेकर चल रहे हैं.

सर्जियो गोर ने कहा कि भारतीय कंपनियां अमेरिका में फार्मास्यूटिकल्स, मैन्युफैक्चरिंग और टेक्नोलॉजी सेक्टर में तेजी से विस्तार कर रही हैं, जबकि अमेरिकी कंपनियां भारत में अपना निवेश बढ़ा रही हैं. उन्होंने बताया कि Uber, Walmart, Boeing, Lockheed Martin और GE Aerospace जैसी बड़ी अमेरिकी कंपनियों के अधिकारी लगातार भारत का दौरा कर रहे हैं.

क्या क्वाड बैठक भी है एक कारण?

मार्को रुबियो के दौरे में क्वाड बैठक भी अहम मानी जा रही है. 26 मई को होने वाली इस बैठक में भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया शामिल होंगे. यह समूह इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में चीन के बढ़ते प्रभाव का मुकाबला करने के लिए अमेरिका की रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है. यह बैठक ऐसे समय हो रही है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप हाल ही में बीजिंग दौरे से लौटे हैं.

रुबियो ने कहा कि अमेरिका क्वाड को काफी महत्व देता है. उन्होंने बताया कि विदेश मंत्री बनने के बाद उनकी पहली बड़ी बैठक भी क्वाड देशों के विदेश मंत्रियों के साथ ही हुई थी. उन्होंने कहा, “मुझे खुशी है कि अब यह बैठक भारत में हो रही है और इस साल एक और बैठक भी आयोजित की जाएगी.”

अमेरिकाडोनाल्ड ट्रंप
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