ईद-उल-अजहा, जिसे आमतौर पर बकरीद कहा जाता है, इस्लाम धर्म के सबसे महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक है. यह सिर्फ जानवर की कुर्बानी का पर्व नहीं है, बल्कि इसके पीछे गहरी आध्यात्मिक और इंसानियत से जुड़ी सीख छिपी हुई है. इस त्योहार की शुरुआत पैगंबर इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) और उनके बेटे पैगंबर इस्माइल (अलैहिस्सलाम) की उस महान कहानी से जुड़ी है, जिसमें अल्लाह के प्रति उनकी अटूट आस्था और समर्पण की परीक्षा ली गई थी. इस्लाम में ‘कुर्बानी’ का अर्थ केवल बलिदान नहीं, बल्कि अल्लाह के प्रति पूर्ण समर्पण, विश्वास और आज्ञाकारिता का प्रतीक है. ‘कुर्ब’ शब्द का अर्थ ही होता है नज़दीकी, यानी अल्लाह के करीब होना. कुर्बानी के जरिए मुसलमान यह संदेश देते हैं कि उनका सब कुछ अल्लाह की राह में समर्पित है.