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Iran के 'वॉर ब्रेन' Abbas Araghchi कौन, जिनकी चाल से मिडिल ईस्ट में उड़े अमेरिका के होश, ट्रंप हो गए कन्फ्यूज्ड

ईरान के वरिष्ठ राजनयिक Abbas Araghchi को देश की रणनीतिक सोच के अहम दिमागों में गिना जाता है. उनकी सोच में IRGC, NOPO और डिसेंट्रलाइज्ड सुरक्षा मॉडल जैसे तत्व शामिल हैं, जो कई युद्धों से मिली सीख पर आधारित बताए जाते हैं.

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( Image Source:  @MrHunny01 )

मिडिल ईस्ट की बदलती भू-राजनीति के बीच ईरान की सुरक्षा रणनीति और उसके प्रमुख रणनीतिक दिमागों पर दुनिया की नजरें टिकी हैं. इसी कड़ी में ईरान के वरिष्ठ राजनयिक और रणनीतिकार Abbas Araghchi का नाम तेजी से चर्चा में आया है. माना जाता है कि ईरान की बहु-स्तरीय सुरक्षा सोच, जिसमें Islamic Revolutionary Guard Corps (IRGC) की भूमिका, एलीट स्पेशल यूनिट NOPO की तैनाती और डिसेंट्रलाइज्ड सैन्य ढांचा शामिल है, उसी रणनीतिक दृष्टि का हिस्सा है. विशेषज्ञों के अनुसार यह मॉडल कई दशकों के युद्ध अनुभवों और क्षेत्रीय संघर्षों से मिली सीख पर आधारित है, जिसने ईरान को अपनी सुरक्षा व्यवस्था को नए तरीके से गढ़ने के लिए प्रेरित किया.

ईरान की सुरक्षा रणनीति में उनकी भूमिका क्या?

मिडिल ईस्ट की जटिल राजनीति और सुरक्षा ढांचे में सैयद अब्बास अराघची (Abbas Araghchi) का नाम तेजी से चर्चा में आया है. उन्हें ईरान की कूटनीति और सुरक्षा सोच के अहम रणनीतिकारों में गिना जाता है. लंबे समय से ईरान की विदेश नीति और सुरक्षा रणनीति को आकार देने वाले अराघची को ऐसे दिमाग के रूप में देखा जाता है जो सैन्य ताकत, कूटनीति और क्षेत्रीय नेटवर्क को एक साथ जोड़कर रणनीति तैयार करते हैं.

ईरान की सुरक्षा संरचना में IRGC और एलीट काउंटरटेरर यूनिट NOPO जैसी संस्थाओं की भूमिका बेहद अहम है. विश्लेषकों का मानना है कि इन सुरक्षा ढांचों के पीछे जो व्यापक रणनीतिक सोच है, उसे विकसित करने में इरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची जैसे नीति निर्माताओं की महत्वपूर्ण भूमिका रही है.

Abbas Araghchi कौन?

अब्बास अराघची ईरान के वरिष्ठ राजनयिक और नीति विशेषज्ञ माने जाते हैं. अगस्त 2024 तक वो ईरान के विदेश मंत्री रह थे. उन्होंने कई अहम कूटनीतिक पदों पर काम किया है और अंतरराष्ट्रीय वार्ताओं में ईरान का प्रतिनिधित्व भी किया है. कूटनीतिक अनुभव और रणनीतिक समझ के कारण उन्हें उन लोगों में गिना जाता है जो ईरान की दीर्घकालिक सुरक्षा और विदेश नीति की दिशा तय करने में भूमिका निभाते हैं.

ईरान की सुरक्षा रणनीति को लेकर उनकी सोच क्या रही है?

विश्लेषकों के अनुसार ईरान की रणनीति का मुख्य उद्देश्य यह है कि देश की नेतृत्व व्यवस्था और सैन्य क्षमता किसी एक हमले से कमजोर न हो. इसी कारण ईरान ने ऐसी सुरक्षा व्यवस्था बनाई जिसमें कई स्तरों पर अलग-अलग संस्थाएं काम करती हैं. इस मॉडल में सेना, विशेष बल, मिलिशिया और खुफिया तंत्र एक नेटवर्क की तरह काम करते हैं. इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि अगर किसी एक हिस्से पर हमला हो जाए, तब भी बाकी ढांचा काम करता रहे.

IRGC की भूमिका क्या?

IRGC ईरान की सबसे प्रभावशाली सैन्य संस्थाओं में से एक है. इसे 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद बनाया गया था ताकि देश के शासन और राजनीतिक व्यवस्था की रक्षा की जा सके. यह संगठन केवल सैन्य ताकत ही नहीं बल्कि खुफिया, मिसाइल और क्षेत्रीय नेटवर्क जैसे कई क्षेत्रों में सक्रिय है. ईरान की रक्षा रणनीति में IRGC को केंद्रीय स्तंभ माना जाता है.

NOPO फोर्स क्या है और इसका काम क्या होता है?

NOPO ईरान की एलीट काउंटरटेरर और स्पेशल ऑपरेशन यूनिट मानी जाती है. यह यूनिट खास तौर पर संवेदनशील मिशनों, आतंरिक सुरक्षा खतरों और शीर्ष नेतृत्व की सुरक्षा के लिए जानी जाती है. रिपोर्ट्स के मुताबिक इस फोर्स का इस्तेमाल विरोध प्रदर्शनों को नियंत्रित करने और उच्च जोखिम वाले ऑपरेशनों में भी किया जाता रहा है.

सुप्रीम लीडर की सुरक्षा में इन संस्थाओं का क्या महत्व है?

ईरान की राजनीतिक व्यवस्था में सुप्रीम लीडर का पद सबसे महत्वपूर्ण होता है. इसलिए उनकी सुरक्षा को लेकर बहु-स्तरीय व्यवस्था बनाई गई है. इस व्यवस्था में IRGC, विशेष सुरक्षा इकाइयों और खुफिया एजेंसियों की संयुक्त भूमिका होती है. इनका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना होता है कि किसी भी संभावित खतरे को पहले ही रोक दिया जाए.

अब्बास अराघची की रणनीतिक सोच क्या हासिल करना चाहती है?

विशेषज्ञों के अनुसार अराघची जैसे रणनीतिकारों की सोच यह रही है कि ईरान की सुरक्षा केवल सैन्य ताकत से नहीं बल्कि बहु-स्तरीय रणनीति से सुनिश्चित की जाए. इसमें कूटनीतिक प्रयास, क्षेत्रीय सहयोग, सैन्य क्षमता और आंतरिक सुरक्षा ढांचे को एक साथ मजबूत करने पर जोर दिया जाता है. उनका लक्ष्य ऐसा सुरक्षा ढांचा बनाना माना जाता है जो लंबे समय तक किसी भी बाहरी या आंतरिक चुनौती का सामना कर सके.

किन युद्धों से सीख ले ईरान को बनाया अमेरिका से लड़ने वाला देश?

ईरान की सुरक्षा और सैन्य रणनीति को समझने के लिए यह देखना जरूरी है कि Abbas Araghchi जैसे रणनीतिकारों ने किन युद्धों और संघर्षों से सबक लेकर अपनी सोच विकसित की. ईरान की वर्तमान रक्षा रणनीति, जिसमें Islamic Revolutionary Guard Corps (IRGC) की मजबूत भूमिका, डिसेंट्रलाइज्ड सुरक्षा ढांचा और एलीट यूनिट NOPO जैसी फोर्स शामिल हैं. कई दशकों के अनुभव और क्षेत्रीय युद्धों से मिली सीख का परिणाम मानी जाती है.

1. Iran–Iraq War से क्या सीख मिली?

1980 से 1988 तक चला ईरान-इराक युद्ध ईरान की सैन्य सोच को सबसे ज्यादा प्रभावित करने वाला संघर्ष माना जाता है. इस युद्ध में ईरान को पारंपरिक सेना की सीमाओं का एहसास हुआ. इसी अनुभव के बाद ईरान ने ऐसी रणनीति पर काम किया जिसमें बड़ी सेना के बजाय कई छोटे-छोटे लेकिन बेहद प्रशिक्षित यूनिट्स हों. यही सोच आगे चलकर IRGC और अन्य विशेष इकाइयों की मजबूती की वजह बनी.

2. 2003 Iraq War से क्या रणनीतिक संकेत मिले?

2003 में अमेरिका के नेतृत्व में इराक पर हुए हमले ने ईरान को यह दिखाया कि आधुनिक युद्ध में बड़े सैन्य ढांचे को बहुत जल्दी निशाना बनाया जा सकता है. इससे ईरान ने यह रणनीति अपनाई कि सैन्य शक्ति को अलग-अलग हिस्सों में बांट दिया जाए. यानी डिसेंट्रलाइज्ड फोर्स स्ट्रक्चर, जिसमें कई स्वतंत्र यूनिट्स एक साथ काम करें और किसी एक हमले से पूरी व्यवस्था प्रभावित न हो.

3. Syrian Civil War से क्या सबक मिला?

सीरिया के युद्ध ने ईरान को हाइब्रिड वारफेयर यानी पारंपरिक और अप्रत्यक्ष युद्ध के मिश्रण का महत्व समझाया. इस संघर्ष में क्षेत्रीय नेटवर्क, मिलिशिया और स्पेशल फोर्स के समन्वय का महत्व सामने आया. इससे ईरान ने अपने सुरक्षा ढांचे में लचीले और तेज प्रतिक्रिया वाले यूनिट्स को प्राथमिकता दी.

4. Israel–Hezbollah War (2006) से क्या रणनीति निकली?

2006 में लेबनान में हिज़्बुल्लाह और इज़राइल के बीच हुए युद्ध ने दिखाया कि छोटे लेकिन संगठित और प्रशिक्षित समूह भी बड़ी सैन्य ताकत को चुनौती दे सकते हैं. इससे ईरान ने ऐसी रणनीति पर जोर दिया जिसमें विशेष बल, नेटवर्क आधारित ऑपरेशन और असममित युद्ध (asymmetric warfare) शामिल हो.

5. NOPO जैसी एलीट यूनिट की सोच कैसे विकसित हुई?

इन सभी युद्धों के अनुभव के बाद ईरान ने यह निष्कर्ष निकाला कि टॉप लीडरशिप और संवेदनशील संस्थानों की सुरक्षा के लिए अलग और बेहद प्रशिक्षित यूनिट जरूरी है. इसी सोच के तहत एलीट काउंटर-टेरर यूनिट NOPO को मजबूत किया गया. यह यूनिट हाई-रिस्क मिशन, आतंकवाद विरोधी ऑपरेशन और शीर्ष नेतृत्व की सुरक्षा जैसे संवेदनशील कार्यों के लिए जानी जाती है.

ईरान इजरायल युद्धवर्ल्‍ड न्‍यूज
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